अमरीका पर आतंकवादी हमले की 20वीं बरसी आज है। 11 सितंबर 2001 को इस हमले में लगभग तीन हजार लोगों की मौत हो गई थी। 9/11 के उल्लेख से ही आज से 20 वर्ष पहले अमरीका पर हुए आतंकी हमले की याद ताजा हो जाती है जिसने पूरी दुनिया को हिला दिया था। इस्लाम के नाम पर आतंकवाद का घिनौना चेहरा अल-कायदा की उस करतूत से सबसे सामने आ गया था जिसमें दो जेट विमान 11 सितंबर, 2001 को न्यूयॉर्क के ट्विन टावर से टकराकर पेन्सिलवानिया के मैदान में जा गिरे थे।
दो दशक पहले आज ही के दिन अलकायदा के 19 आतंकवादियों ने नापाक इरादे से अमरीका में चार विमानों का अपहरण किया था। न्यूयॉर्क में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के टावरों में दो विमानों को दुर्घटनाग्रस्त किया गया। एक विमान वाशिंगटन के बाहर पेंटागन में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। चौथा विमान पेनसेल्वानिया के ग्रामीण क्षेत्र में उस समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ जब यात्रियों ने अपहरणकर्ताओं से विमान का नियंत्रण वापस लेने की कोशिश की। इन नृशंस हमलों में दो हजार 977 लोग मारे गए थे। मृतकों में अधिकतर अमरीकी नागरिक थे। इसमें सौ से अधिक देशों के नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई। इन हमलों का मास्टरमाइंड आतंकी संगठन अल-कायदा का संस्थापक ओसामा बिन लादेन था। विडंबना यह है कि अधिकतर अपहरणकर्ता सऊदी मूल के थे और उन्हें अफगानिस्तान में प्रशिक्षण दिया गया था। इनमें से चार आतंकवादियों ने अमरीका के उड़ान प्रशिक्षण स्कूलों में प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इस घटना ने वैश्विक आक्रोश को जन्म दिया और तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक युद्ध का आह्वान करना पड़ा। कार्रवाई स्थायी आजादी के अन्तर्गत अमरीकी सैनिकों को अफगानिस्तान भेजा गया और काबुल में तत्कालीन शासन समाप्त हो गया तथा आतंकवाद का सफाया हो गया। दो मई 2011 को ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया गया। 20 वर्षों में वैश्विक समुदाय के ठोस कदमों से आतंकवादियों के नापाक मंसूबों का पर्दाफाश हुआ और आतंकवाद के खतरे को जड़ से समाप्त करने की आवश्यकता को बल मिला।

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