कोई इधर आँख न उठाना, अब यहाँ पर चौहान हैं सारे।
और चौहान भी वो जो अपनी गलती कभी ना दुहराएंगे,
मरेंगे मारेंगे अपनी जमीं पर और यहीं पर दफनाएंगे।
सावधान ऐ दुनिया वालो, भारत अब नहीं लुटने वाला,
और न किसी भी लुटेरे को छोड़ने वाला न सहने वाला।
बहुत बाँट लिया भारत को, पर अब नहीं बँटने वाला,
धर्म पंथ क्षेत्र और भाषा किसी भी चाल में न फँसने वाला।
भारत एक है एक रहेगा बन मिसाल एकता अखंडता की,
किसी की दाल न गलने पाएगी न सफलता उदंडता की।
पंथ, मार्ग, विचार अनेक पर धर्म एक ही है भारत का,
स्त्री बच्चों की सुरक्षा सम्मान अरु भाईचारा आपस का।
प्रेम-भक्ति-ज्ञान-साधना यहां के प्रतीक आज भी हैं सारे,
मानव जीवन का चरम लक्ष्य देगा सबको भारत ही प्यारे।

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