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स्कूल शुरू करने से पहले और बाद में शिक्षकों को है स्वास्थ्य व अन्य प्रशिक्षण की आवश्यकता

पी.एम. शहा फाउंडेशन द्वारा 500 शिक्षकों से समस्या जानने के लिए किया गया ऑनलाइन सर्वेक्षण
पी.एम. शहा फाउंडेशन के संचालक एड्. चेतन गांधी द्वारा जानकारी

पुणे, सितंबर (ह.ए. प्रतिनिधि)
शासन के आदेशानुसार राज्य के स्कूल शुरू करने से पहले व स्कूल शुरू होने के बाद स्वास्थ्य, स्वच्छता व अन्य सुरक्षा एवं उपाय योजना के बारे में मार्गदर्शक सूचना (एसओपी) शासन द्वारा बताई गई है, उसके अनुसार स्कूल प्रशासन, शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की किस तरह तैयारी हुई है अथवा उन्हें किस-किस संभावित परेशानियों के समक्ष जाना पड़ेगा व सभी शिक्षकों को क्या अपेक्षा है? इस उद्देश्य को मद्देजनर रखते हुए पी.एम. शहा फाउंडेशन ने पुणे जिले के 50 स्कूलों के करीब 500 शिक्षकों से ऑनलाइन प्रश्नों के माध्यम से समस्या जानने का प्रयास किया। इसका शिक्षकों की ओर से सकारात्मक प्रतिसाद प्राप्त हुआ। यह जानकारी संस्था के संचालक एड्. चेतन गांधी द्वारा दी गई है।
    पी.एम. फाउंडेशन द्वारा शिक्षकों से ऑनलाइन प्राप्त प्रश्नावली की छंटाई करते हुए बाएँ से दाएँ सुश्री रूपाली नायडू, प्रो. अरुण एल. फडतरे, अधिवक्ता चेतन गांधी, सुश्री सयाली फुंडे, सुश्री वैष्णवी भोसले उक्त चित्र में दिखाई दे रहे हैं।

ऑनलाइन प्रश्नों के माध्यम से संस्था को जिले के शिक्षकों से प्राप्त हुई जानकारी, जो इस प्रकार हैं...
1) 83.1 प्रतिशत शिक्षकों ने बताया कि कोरोना के पश्चात शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ेगी, उनका मानसिक तनाव भी बढ़ेगा, उन्हें समुपदेशन की आवश्यकता है।
2) 15.7 प्रतिशत शिक्षकों को लगता है कि शासन के आदेशानुसार स्कूल शुरू करने के लिए स्कूलों में आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
3) 93 प्रतिशत शिक्षकों को लगता है कि स्कूल शुरू करने के लिए अभिभावकों को प्रबोधन की आवश्यकता है।
4) 71.8 प्रतिशत शिक्षकों को लगता है कि शासन के नियमानुसार स्कूल शुरू करने के लिए शिक्षकों को स्वास्थ्य के बारे में प्रशिक्षित होना आवश्यक है।
5) 25.1 प्रतिशत शिक्षकों ने बताया कि कोरोना प्रतिबंधक नियमानुसार स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए सभी सुविधाएं प्रदान करना प्रशासन को संभव नहीं है।
6) 31.3 प्रतिशत शिक्षकों को लगता है कि स्कूल में शिक्षक, कर्मचारी वर्ग या विद्यार्थी कोरोना संक्रमित पाया गया तो नजदीक के अस्पताल में भर्ती करने के लिए जिला व राज्यस्तर पर हेल्पलाइन नंबर होना बहुत जरूरी है।
7) 18.3 प्रतिशत शिक्षकों का मानना है कि स्कूल शुरू करने के लिए व्यवस्थापन की पूरी तैयारी नहीं है।
8) 84.3 प्रतिशत शिक्षकों को लगता है कि स्कूल आने के लिए विद्यार्थियों की मानसिकता नहीं है, इसलिए उन्हें काउंसिलिंग की आवश्यकता है।
9) 9.9 प्रतिशत शिक्षकों का मानना है कि आज की परिस्थिति में विद्यार्थियों की मानसिकता ऑफलाइन पद्धति स्वीकार करना संभव नहीं है।
10) 52.5 प्रतिशत शिक्षकों का मानना है कि स्कूल शुरू होने के बाद कोरोना संक्रमण बढ़ जाएगा।
11) 23.6 प्रतिशत शिक्षकों के पास ऑनलाइन शिक्षण कौशल को बढ़ाने के लिए कोई प्रशिक्षण नहीं है।
12) 73.5 प्रतिशत शिक्षकों का पूर्ण टीकाकरण नहीं हुआ है। 23.6 प्रतिशत शिक्षकों ने पहली डोस ले ली है और 2.9 प्रतिशत शिक्षकों ने एक भी टीका नहीं लगवाया है।
13) 13.7 प्रतिशत शिक्षकों का मानना है कि कोरोना काल में अध्यापन में शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच उचित संवाद   नहीं था।
उक्त सर्वेक्षण पी.एम. शहा फाउंडेशन के संचालक एड्. चेतन गांधी के मार्गदर्शन में प्रा. ए. एल. फडतरे, रुपाली नायडू, सरस्वती मेहता, सायली फुंडे, वैष्णवी भोसले द्वारा किया गया। इसमें पुणे जिला विज्ञान अध्यापक संघ के अध्यक्ष रोहिदास एकाड का बहुमूल्य सहयोग प्राप्त हुआ।

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