‘आदर्श महिला शिक्षक पुरस्कार’ प्रदान समारोह सम्पन्न
आदर्श ‘महिला शिक्षक पुरस्कार’ से अध्यापिका को सम्मानित करते हुए अॅड. गेणूजी विठ्ठल सातव फाउंडेशन के प्रमुख व जनसेवक संजय सातव, साथ में अन्य उक्त चित्र में दिखाई दे रहे हैं।
हड़पसर, अक्टूबर (ह.ए. प्रतिनिधि)
शिक्षक ही है जो अपने ज्ञान के बल पर अच्छा व्यक्ति, सदृढ़ समाज और राष्ट्र का निर्माण करता है। वो शिक्षक ही होता है जो विद्यार्थियों में आत्मविश्वास का संचार करता है, जिसके कारण छात्र अपने जीवन में कुछ करने का हौसला रखते हैं। छात्रों के जीवन में प्रकाशरूपी रोशनी भरकर वे सफलता के शिखर तक पहुंच सकें, अपने माता-पिता का नाम पूरी दुनिया में रोशन करने में शिक्षकगणों का अथक परिश्रम होता है। हर छात्र को उसकी जिन्दगी में सफल होने के लिए एक शिक्षक का बड़ा हाथ होता है। यह विचार अॅड. गेणूजी विठ्ठल सातव फाउंडेशन के प्रमुख व जनसेवक संजय सातव ने व्यक्त किए।
मोहम्मदवाडी स्थित डॉ. दादा गुजर माध्यमिक विद्यालय में लायन्स क्लब ऑफ पुणे व अॅड. गेणूजी विठ्ठल सातव फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आदर्श महिला शिक्षक पुरस्कार प्रदान समारोह का आयोजन किया गया था, तब वे बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां लायन्स क्लब ऑफ कल्चरल के अध्यक्ष शेखर पेटकर, डॉ. दादा गुजर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य डी. एम. पाटिल, स्वाति झरेकर, हनुमंत घुले, झोपड़पट्टी अध्यक्ष हड़पसर विधानसभा दीपक भोसले, पुणे शहर उपाध्यक्ष राजेश कांबले, नम्रता कामत, संजय भुजबल, अॅड. गेणूजी फाउंडेशन के सदस्य संदीप नलावडे प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
आदर्श महिला शिक्षक पुरस्कार से प्रणिता शितोले, जैतून पानसरे, सुनीता वाडकर, नीलम सप्रा, रूचिता पंडित, पूनम दातीर, प्रीति उपरे, रचना येवले, सोनाली बोरसे, सोनाली गाडे, अनुजा ओमसे, उज्ज्वला पाटिल, अश्विनी धावरे, पद्मजा पाटिल, रुपाली पवार, मोनिका सुपे, वैशाली गुंड, सुवर्णा भुजबल, रोहिणी शिंदे, वैशाली जगदाले, मनीषा पवार को सम्मानित किया गया।
डॉ. दादा गुजर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य डी. एम. पाटिल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज को आकार देने में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है। पिछले दो वर्षों से सभी शिक्षकों पर कोविड-19 में विद्यार्थियों को ऑनलाइन ज्ञान देने की जिम्मेदारी है। छात्रों को अकादमिक रूप से नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए, इस हेतु ऑनलाइन पद्धति से ज्ञान प्रदान करने के लिए जिम्मेदार थी, उसे भी शिक्षकों ने अच्छी तरह से निभाया। पुरस्कार के रूप में पीठ पर थपथपाने के बाद शिक्षकों का उत्साह बढ़ता है।
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