पुणे, अक्टूबर (ह.ए. प्रतिनिधि)
कृषि आधारित व्यवसाय को बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पुणे के मांजरी स्थित संस्थान राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र में जनवरी 2020 से एक परियोजना ‘कृषि-व्यवसाय उद्भवन (एबीआई) केंद्र’ का प्रारम्भ हुआ है। यह परियोजना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय कृषि नवाचार कोष (एनएआईएफ) योजना के तहत वित्त पोषित है। इस परियोजना के मुख्य उद्देश्य कृषि आधारित व्यवसाय का माहौल बनाना, स्टार्टअप का समर्थन करना, कृषक उत्पादक संगठन एवं कृषि उत्पादक कंपनियों की स्थापना में सहयोग देना है। पुणे के मांजरी स्थित इस अनुसंधान केंद्र में अपनी स्थापना के बाद से ही इस एबीआई ने नवयुवकों के बीच व्यावसायिक विचारों के प्रचार के लिए जागरूकता अभियान का आरम्भ किया और विभिन्न जिलों में स्थित विभिन्न कृषि कॉलेजों के छात्रों हेतु ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम शुरू किये। इसके साथ ही किसानों तथा कृषि व्यवसायों से जुड़े व्यक्तियों हेतु प्रशिक्षण और पारस्परिक सत्र/बैठकों का आयोजन भी किया गया। एबीआई की सलाहकार समिति में प्राप्त विभिन्न व्यवसाय प्रस्तावों पर चर्चा की गयी, इनका मूल्यांकन करने के बाद कुछ प्रस्तावों को सहगोग देने हेतु उचित पाया गया। सांगली स्थित एक कंपनी वीवीपी इंटरनेशनल का एक प्रस्ताव था। यह कंपनी गुणवत्ता वाले किशमिश उत्पादन में शामिल है। इस कंपनी के किशमिश ब्रांड को स्थापित करने तथा बाजार में पहुँच बढ़ाने में यह एबीआई अपनी भूमिका निभाएगा। जबकि दूसरा प्रस्तावनासिक स्थित कंपनी सीताई एग्रो प्रोसेसिंग का था। यह प्रस्ताव अंगूर की किस्म मांजरी मेडिका जूस के उत्पादन से सम्बंधित है। इस किस्म के जूस को न्यूट्रास्युटिकल उत्पाद के रूप में बढ़ावा देना मुख्य उद्देश्य है। जैसा कि विदित है कि इस किस्म के जूस में उच्च एंटीऑक्सीडेंट गतिविधियां होती हैं। दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों ने 18 अक्टूबर, 2021 को भाकृअनुप-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र, पुणे के एबीआई केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। सीताई एग्रो प्रोसेसिंग के प्रतिनिधि श्री विवेक उगले तथा वीवीपी इंटरनेशनल के श्री योगेश पदमन ने एवं भाकृअनुप-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. आर. जी. सोमकुवर के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।
कृषि आधारित व्यवसाय को बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पुणे के मांजरी स्थित संस्थान राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र में जनवरी 2020 से एक परियोजना ‘कृषि-व्यवसाय उद्भवन (एबीआई) केंद्र’ का प्रारम्भ हुआ है। यह परियोजना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय कृषि नवाचार कोष (एनएआईएफ) योजना के तहत वित्त पोषित है। इस परियोजना के मुख्य उद्देश्य कृषि आधारित व्यवसाय का माहौल बनाना, स्टार्टअप का समर्थन करना, कृषक उत्पादक संगठन एवं कृषि उत्पादक कंपनियों की स्थापना में सहयोग देना है। पुणे के मांजरी स्थित इस अनुसंधान केंद्र में अपनी स्थापना के बाद से ही इस एबीआई ने नवयुवकों के बीच व्यावसायिक विचारों के प्रचार के लिए जागरूकता अभियान का आरम्भ किया और विभिन्न जिलों में स्थित विभिन्न कृषि कॉलेजों के छात्रों हेतु ऑनलाइन जागरूकता कार्यक्रम शुरू किये। इसके साथ ही किसानों तथा कृषि व्यवसायों से जुड़े व्यक्तियों हेतु प्रशिक्षण और पारस्परिक सत्र/बैठकों का आयोजन भी किया गया। एबीआई की सलाहकार समिति में प्राप्त विभिन्न व्यवसाय प्रस्तावों पर चर्चा की गयी, इनका मूल्यांकन करने के बाद कुछ प्रस्तावों को सहगोग देने हेतु उचित पाया गया। सांगली स्थित एक कंपनी वीवीपी इंटरनेशनल का एक प्रस्ताव था। यह कंपनी गुणवत्ता वाले किशमिश उत्पादन में शामिल है। इस कंपनी के किशमिश ब्रांड को स्थापित करने तथा बाजार में पहुँच बढ़ाने में यह एबीआई अपनी भूमिका निभाएगा। जबकि दूसरा प्रस्तावनासिक स्थित कंपनी सीताई एग्रो प्रोसेसिंग का था। यह प्रस्ताव अंगूर की किस्म मांजरी मेडिका जूस के उत्पादन से सम्बंधित है। इस किस्म के जूस को न्यूट्रास्युटिकल उत्पाद के रूप में बढ़ावा देना मुख्य उद्देश्य है। जैसा कि विदित है कि इस किस्म के जूस में उच्च एंटीऑक्सीडेंट गतिविधियां होती हैं। दोनों कंपनियों के प्रतिनिधियों ने 18 अक्टूबर, 2021 को भाकृअनुप-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र, पुणे के एबीआई केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। सीताई एग्रो प्रोसेसिंग के प्रतिनिधि श्री विवेक उगले तथा वीवीपी इंटरनेशनल के श्री योगेश पदमन ने एवं भाकृअनुप-राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. आर. जी. सोमकुवर के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर पुणे स्थित एक स्टार्टअप मैसर्स स्पंदन इनोवेटर्स, जो कि कृषि में रोबोटिक्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग के अवसरों पर कार्यरत है ने विकसित रोबोट आधारित प्रोटोटाइप का अंगूर के बागों में प्रदर्शन भी किया। इस अवसर पर एबीआई की सलाहकार समिति के सदस्य श्री शांतनु जगताप, एमसीसीआईए, पुणे एवं डॉ. राजीव काले, वैज्ञानिक, भाकृअनुप-प्याज एवं लहसुन अनुसंधान निदेशालय राजगुरुनगर भी उपस्थित थे। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय अंगूर अनुसंधान केंद्र के विभिन्न विशेषज्ञों डॉ. अजय कुमार शर्मा (प्रधान अन्वेषक-एबीआई केंद्र), डॉ. अजय कुमार उपाध्याय, डॉ. अहमद शबीर टीपी, डॉ. दीपेन्द्र यादव, डॉ निशांत देशमुख और डॉ. प्रशांत निकुंभे, डॉ. सोमनाथ होल्कर, इत्यादि वैज्ञानिकों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक डॉ. आर. जी. सोमकुवर ने की। डॉ. अहमद शबीर टीपी ने सभी का आभार व्यक्त किया तथा सलाहकार समिति के सदस्यों से अनुरोध किया कि भविष्य में भी एबीआई को वह अपना सहयोग निरंतर देते रहेंगे।
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