स्वाभिमानी ब्रिगेड संघटना के संस्थापक अध्यक्ष रोहन सुरवसे पाटिल द्वारा मांग
हड़पसर, नवंबर (ह.ए. प्रतिनिधि)
एसटी महामंडल ने एसटी के नुकसान पर विचार किया, फायदे पर ध्यान दिया, लेकिन क्या महामंडल के कर्मचारियों के पेट का क्या होगा, इस पर गौर किया है? यह सवाल स्वाभिमानी ब्रिगेड संघटना के संस्थापक अध्यक्ष रोहन सुरवसे पाटिल ने एसटी महामंडल के समक्ष प्रस्तुत किया है।
उन्होंने आगे बताया कि कुछ दिनों से शासकीय विलय के लिए अड़े एसटी कर्मचारियों ने हड़ताल का शस्त्र उठाया है। यह समय कर्मचारियों पर एसटी महामंडल ने लाया है, क्योंकि एसटी महामंडल ने कभी कर्मचारियों की भावनाएं और उनके परिवार का विचार किया है ? अपनी कड़ी मेहनत से एसटी महामंडल को लाखों रुपयों की आमदनी कराने पर भी एसटी महामंडल को समाधान नहीं हुआ है। क्या कर्मचारियों को एसटी महामंडल बस आमदनी का जरिया ही समझता है, ऐसा ही लगता है।
रोहन सुरवसे पाटिल ने अंत में कहा कि एसटी महामंडल हमेशा यह भूल गया है कि कर्मचारी भी एक इंसान है, उसका भी एक परिवार है। समय पर उन्हें भोजन या पानी नहीं मिलता है? परिवार को समय नहीं दे पाते हैं? फिर भी वे अपने कर्तव्य के प्रति वफादार रहे हैं। कम पारिश्रमिक मिलने पर वे संतुष्ट हैं। प्राप्त मानदेय में मासिक किराना का सामान भी शामिल नहीं है। ऐसे तमाम मामले जानने के बाद भी एसटी महामंडल ने कर्मचारियों के साथ अन्याय किया है और उसका ही परिणाम आज दिखाई दे रहा है। उनकी भावनाओं का अंत न देखते हुए कर्मचारियों की सभी मांगें पूर्ण करनी चाहिए। यह मांग स्वाभिमानी ब्रिगेड संघटना के संस्थापक अध्यक्ष रोहन सुरवसे पाटिल ने की है।
एसटी महामंडल ने एसटी के नुकसान पर विचार किया, फायदे पर ध्यान दिया, लेकिन क्या महामंडल के कर्मचारियों के पेट का क्या होगा, इस पर गौर किया है? यह सवाल स्वाभिमानी ब्रिगेड संघटना के संस्थापक अध्यक्ष रोहन सुरवसे पाटिल ने एसटी महामंडल के समक्ष प्रस्तुत किया है।
उन्होंने आगे बताया कि कुछ दिनों से शासकीय विलय के लिए अड़े एसटी कर्मचारियों ने हड़ताल का शस्त्र उठाया है। यह समय कर्मचारियों पर एसटी महामंडल ने लाया है, क्योंकि एसटी महामंडल ने कभी कर्मचारियों की भावनाएं और उनके परिवार का विचार किया है ? अपनी कड़ी मेहनत से एसटी महामंडल को लाखों रुपयों की आमदनी कराने पर भी एसटी महामंडल को समाधान नहीं हुआ है। क्या कर्मचारियों को एसटी महामंडल बस आमदनी का जरिया ही समझता है, ऐसा ही लगता है।
रोहन सुरवसे पाटिल ने अंत में कहा कि एसटी महामंडल हमेशा यह भूल गया है कि कर्मचारी भी एक इंसान है, उसका भी एक परिवार है। समय पर उन्हें भोजन या पानी नहीं मिलता है? परिवार को समय नहीं दे पाते हैं? फिर भी वे अपने कर्तव्य के प्रति वफादार रहे हैं। कम पारिश्रमिक मिलने पर वे संतुष्ट हैं। प्राप्त मानदेय में मासिक किराना का सामान भी शामिल नहीं है। ऐसे तमाम मामले जानने के बाद भी एसटी महामंडल ने कर्मचारियों के साथ अन्याय किया है और उसका ही परिणाम आज दिखाई दे रहा है। उनकी भावनाओं का अंत न देखते हुए कर्मचारियों की सभी मांगें पूर्ण करनी चाहिए। यह मांग स्वाभिमानी ब्रिगेड संघटना के संस्थापक अध्यक्ष रोहन सुरवसे पाटिल ने की है।
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