साहित्यिक डॉ. डी.टी. गायकवाड व मनोहर कांबले द्वारा लिखित किताबों का विमोचन करते हुए पूर्व विधायक जयदेव गायकवाड, एडवोकेट पलूसकर, अखिल भारतीय पत्रकार कल्याण संघ पुणे शहर व जिला अध्यक्ष वसंत वाघमारे, संजीवनी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ.किशोर शहाणे व अरूण आल्हाट उक्त चित्र में दिखाई दे रहे हैं।
रामटेकड़ी, दिसंबर (ह.ए. प्रतिनिधि)
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान सभी जातियों और जनजातियों को ध्यान में रखकर लिखा है। डॉ. बाबासाहेब ने सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, कृषि, औद्योगिक, जल आदि का सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद संविधान का मसौदा तैयार किया। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचार सभी तत्वों के लिए हैं। यह विचार साहित्यिक डॉ. डी.टी. गायकवाड ने व्यक्त किए।
रामटेकडी स्थित मिलिंद बुद्ध विहार में सामाजिक, चिकित्सा, राजकीय, पत्रकार क्षेत्र में कार्य करनेवालों का सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था, तब वे बोल रहे थे। इस अवसर पर डॉ. डी. टी. गायकवाड द्वारा लिखित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और किसान व विवेकवादी धम्म आन्दोलन ग्रंथों व मनोहर कांबले द्वारा लिखित ‘भारत भ्रमण’ किताब का विमोचन पूर्व विधान परिषद के सदस्य व वरिष्ठ विचारक एडवोकेट जयदेव गायकवाड, एडवोकेट पलूसकर, अखिल भारतीय पत्रकार कल्याण संघ पुणे शहर व जिला अध्यक्ष वसंत वाघमारे, संजीवनी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ.किशोर शहाणे व अरूण आल्हाट के शुभ हाथों किया गया। यहां समाजसेवक तुकाराम शिंदे, सामाजिक न्याय विभाग हड़पसर अध्यक्ष वामन धाडवे, सत्यशील संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र वाघमारे, महादेव कांबले, रामभाऊ कसबे, रामभाऊ कसबे, आशीष आल्हाट, सुखदेव कांबले, विशाल कसबे, प्रदीप वाघमारे, बनसोडे आदि के साथ-साथ महिला व नागरिक उपस्थित थे।
साहित्यिक डॉ. डी.टी. गायकवाड ने आगे कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने अनेक ग्रंथ लिखे हैं। ग्रंथ मनुष्य को दृष्टि देने का कार्य करते हैं। अगर आप एक आदमी के गांव में रहना चाहते हैं तो दृष्टि आवश्यक है इसलिए ग्रंथ पढ़ने में रुचि पैदा करनी चाहिए व पढ़नी चाहिए। लेखक एक पुस्तक बनाने में बहुत समय और प्रयास लगाते हैं व खर्च करके किताब बनती है। जैसे स्त्री बच्चे को जन्म देते हुए उसे दर्द होता है वैसा ही दर्द नए ग्रंथों की रचना करते समय लेखक को होता है। नए विचार, नई रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए प्रचंड वेदना होती है। जब नए पत्ते या नए अंकुर फूटते हैं, पेड़ की छाल, छिलका फट जाता है और पत्तियाँ निकल आती हैं। इस तरह से ग्रंथ की प्रक्रिया होती है।
पूर्व विधान परिषद के सदस्य व वरिष्ठ विचारक एडवोकेट जयदेव गायकवाड ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर दलितों, बहुजन समाज के बारे में कैसे सोचते थे इस पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
समारोह का सफलतापूर्वक आयोजन संजीवनी फाउंडेशन, सत्यशील सामाजिक संस्था और मिलिंद बुद्ध विहार की ओर से किया गया था।
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