-श्री सत्येंद्र सिंह
सप्तगिरी सोसायटी, जांभुलवाडी रोड, आंबेगांव खुर्द,
पुणे-411046
पहली जनवरी से नव वर्ष शुरू हो गया। यह नव वर्ष पूरी दुनिया में ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार माना जाता है। वैसे दुनिया में करीब 35 कैलेंडर हैं, जिनमें हिंदू संवत्सर भी शामिल हैं, परंतु ग्रेगोरियन कैलेंडर सर्वाधिक प्रचलित है। हिंदू संवत्सर और महीनों के नाम पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की स्थिति के आधार पर बने हैं, परंतु ग्रेगोरियन कैलेंडर के महीनों के नाम रोमन देवी देवताओं के नाम पर लैटिन शब्दों से बने हैं। जैसे जनवरी का नाम रोमन देवता ‘जेनस’ के नाम पर रखा गया तो फरवरी का नाम ‘फैबरा’ अर्थात् शुद्धि के देवता के नाम पर रखा गया। कुछ लोग मानते हैं कि रोम की देवी ‘फेबुएरिया’ के नाम पर रखा गया था। मार्च महीने का नाम रोम के देवता ‘मार्स’ के नाम पर रखा गया। अप्रैल का नामकरण लैटिन शब्द ‘ऐपेरायर’ से बना है जिसका अर्थ होता है कलियों का खिलना अर्थात् बसंत। मई महीने का नाम रोमन देवता ‘मरकरी’ की माता ‘माइया’ के नाम पर रखा गया। जून का नाम रोम के सबसे बड़े देवता जीयंस की पत्नी ‘जूनो’ के नाम पर रखा गया बताते हैं। जुलाई महीने के नाम के बारे में कहा जाता है कि रोमन साम्राज्य के शासक ‘जूलियस सीजर’ के नाम पर रखा गया था। अगस्त महीने का नाम ‘सैंट ऑगस्ट सीजर’ के नाम पर रखा गया। सितंबर नाम लैटिन के ‘सेप्टेम’ शब्द से बना जिसे रोम में सेप्टेंबर कहा जाता है। अक्टूबर का नाम लैटिन के ‘ऑक्टो’ शब्द से लिया गया। नवंबर लैटिन शब्द ‘नवम्’ से बना तो दिसंबर महीने का नाम लैटिन शब्द ‘डेसम’ से लिया गया।
दिसंबर जनवरी का समय हिंदू कैलेंडर के अनुसार अगहन माह में आता है, जो भारत में सर्दी का समय होता है। भारत में दो संवत्सर विक्रम और शक संवत् चलते हैं। इसी प्रकार हर देश में अपने कैलेंडर हैं पर ग्रेगोरियन कैलेंडर अधिक प्रचलित है। अतः नव वर्ष की सभी को शुभकामनाएँ।
0 टिप्पणियाँ