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भाषा विभाग की तीन वर्षीय कार्ययोजना तैयार करें : मराठी भाषा मंत्री सुभाष देसाई

मुंबई,
राज्य सरकार के भाषा विभाग ने पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय कार्य किया है और विभिन्न गतिविधियों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। मराठी भाषा मंत्री सुभाष देसाई ने मराठी भाषा विभाग को दिशा देनेवाली अगले तीन वर्षों के लिए एक ठोस कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया।
मराठी भाषा विभाग के अंतर्गत आने वाले चार संस्थानों के कार्य की समीक्षा एवं आगामी समय में शुरु होने वाली विभिन्न योजनाओं की समीक्षा मंत्री श्री देसाई की अध्यक्षता में की गई। इस समय विश्वकोश बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजा दीक्षित, अध्यक्ष, साहित्य संस्कृति मंडल प्रा. डॉ. सदानंद मोरे, भाषा सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. लक्ष्मीकांत देशमुख सहित भाषा विभाग के प्रमुख सचिव भूषण गगरानी, संयुक्त सचिव मिलिंद गावड़े, मीनाक्षी पाटिल, संजय पाटिल, शामकांत देवरे सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
मराठी भाषा नीति के कार्यान्वयन के लिए संशोधित मसौदा तैयार करने, अभिजीत मराठी भाषा जन अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन, मराठी बोली से संबंधित नई पहल, मराठी को ज्ञान की भाषा बनाने के लिए विभिन्न पहलों के कार्यान्वयन पर चर्चा हुई। सदानंद मोरे ने कहा कि मराठी भाषा नीति तैयार है और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी। लक्ष्मीकांत देशमुख ने कहा कि कुछ सुझावों के साथ 15 फरवरी तक रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। श्री देसाई ने कहा कि कैबिनेट के प्रस्ताव को 27 फरवरी से पहले मंजूरी मिल जानी चाहिए।
मराठी के प्रचार-प्रसार के लिए कई संस्थाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करती हैं। इसके लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच का गठन किया गया है। भाषा विभाग को देश और विदेश में मराठी संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए एक प्रणाली विकसित करने का निर्देश दिया गया था।
मराठी भाषा मंत्री श्री देसाई ने विभाग का कार्यभार संभालने के बाद विभिन्न योजनाओं को पूरा किया है। कई लंबित विषयों को सुलझा लिया गया है। मरीन ड्राइव क्षेत्र में मराठी भाषा विभाग के लिए अच्छी जगह पर भूखंड मिला। उपकेन्द्र का प्रश्न हल हो गया। शास्त्रीय मराठी के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। भूषण गगरानी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में पुस्तक ग्राम योजना का विस्तार, अनिवार्य मराठी बोर्ड, सभी माध्यम विद्यालयों में मराठी भाषा का अनिवार्य शिक्षण जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं।
श्री देसाई ने कहा कि भाषा विभाग के अंतर्गत आने वाले चारों संस्थानों को अपने-अपने विभागों की बैठक कर अगले तीन साल के लिए कार्यक्रम तय करना चाहिए ताकि भाषा विभाग के काम में तेजी लाई जा सके।

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