सह्याद्री प्रतिष्ठान और अस्तित्व कलामंच की पहल से पावनखिंड फिल्म का आनंद कान्हेवाडी बुद्रुक, सहाणेवाडी व ठाकर समाज आदीवासी बस्ती के जिला परिषद स्कूल के नन्हें-मुन्ने बच्चों ने उठाया।
हड़पसर, प्रतिनिधि (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
सह्याद्री प्रतिष्ठान और अस्तित्व कलामंच की पहल पर पावनखिंड फिल्म के साथ-साथ मगरपट्टा-अमनोरा सिटी की यात्रा से अभिभूत हुए नन्हें-मुन्ने बच्चों ने पहली बार देखा सोने का पेड़, आसमान में ऊंची इमारतों की मिनारें, एस्केलेटर की यात्रा, भव्य मॉल, कल्पना से परे चमक और किताब का इतिहास जीवंत रोमांच पर्दे पर देखने का आनंद मगरपट्टा व अमनोरा सिटी में लिया है।
कान्हेवाडी बुद्रुक, सहाणेवाडी व ठाकर समाज आदीवासी बस्ती के जिला परिषद स्कूल के नन्हें-मुन्ने बच्चों के लिए मगरपट्टासिटी के सिजन मॉल में ‘पावनखिंड’ ऐतिहासिक फिल्म का आयोजन सह्याद्री प्रतिष्ठान की ओर से किया गया था। छात्रों को मॉल व फिल्म के साथ-साथ अमनोरा सिटी के सुवर्ण वृक्ष, गगनचुंबी टॉवर, कृत्रिम झील, खुला हॉल दिखाया गया। इस दौरान फिल्म के पात्रों के ऐतिहासिक संवाद से प्रेरित होकर छात्र छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम का जप कर रहे थे।
इस बीच, फिल्म के पार्श्व गायक अवधूत गांधी ने वीडियो कॉल पर नन्हें-मुन्ने बच्चों के साथ बातचीत की और उन्हें शुभकामनाएं दीं। छात्रों ने भी हाथ उठाकर खुशी जाहिर की। एस्केलेटर पर चढ़ना कई छात्रों के लिए आश्चर्य की बात थी। अपनी चौड़ी आँखों से इन छात्रों ने जल्द ही इस नवाचार को अपनी आँखों में देखा। अमनोरा सिटी के प्रबंध निदेशक अनिरुद्ध देशपांडे और उपाध्यक्ष सुनील तरटे ने छात्रों से मुलाकात कर बातचीत की और उनकी सराहना की। छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर सहयोगी बाजीप्रभु देशपांडे के वीर जीवन का इतिहास किताब में पढ़ा है। यहां तक कि राजाओं के प्रति वफादार शिव काशीद जैसे साथियों को भी सुना गया है। बहरहाल, पावनखिंड फिल्म देखते वक्त यह सब मेरे सामने ही होता दिख रहा था, यह भावना छात्रों ने व्यक्त की।
अस्तित्व कलामंच के योगेश गोंधले, धीरज दरवडे, श्रुतिका चौधरी, डॉ.अश्विनी शेंडे, प्रमिला लोखंडे, अश्विनी सुपेकर, पल्लवी धुरू आदि 15 स्वयंसेवकों के साथ सह्याद्री प्रतिष्ठान के अध्यक्ष कृष्णकांत कोबल, कार्यकर्ता राहुल निमसे, विनायक रूके, देवेंद्र सहाणे, विलास कोबल, मुख्याध्यापक सुरेशराव नाईकरे, शिक्षक राजेंद्र थोरात गणपत खैरे, रोहिणी बेल्हेकर, गोरक्ष मुलूक, शंकर बुरसे, संजय घुमटकर, वैजयंता नाईकडे ने इस पहल का संयोजन किया। विश्वनाथ गायकवाड, रवींद्र थोरात, मिलिंद कोबल, संतोष बेंडुरे, दिलीप मांजरे, चंद्रकांत कोबल, शंकर कोबल, विनोद कोबल, संतोष सावंत, चंद्रकांत सहाणे, रोहिणी तुपे का सहयोग मिला।
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