दिव्यांग छात्रों में होती है दिव्य दृष्टि से सृष्टि को देखने की शक्ति : डॉ. राजू पाटोदकर
पुणे, अप्रैल (जिमाका)
विकलांगों के जीवन को सुखमय बनाने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर प्रगति की जाए। यह अपील अपर पुलिस आयुक्त नामदेव चव्हाण ने की है।
कोरेगांव पार्क स्थित लड़कों के नेत्रहीन स्कूल में हड़पसर मेडिकल असोसिएशन और सिद्धेश्वर महिला बहुउद्देशीय संस्था द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कक्षा 10 वीं के विद्यार्थियों और उनकी मदद करने वाले लेखकों के विदाई समारोह में वे बोल रहे थे। यहां सूचना उपसंचालक डॉ. राजू पाटोदकर, प्रशासकीय अधिकारी कृष्णा शेवाले, सिद्धेश्वर के डॉ. शंतनु जगदाले, हड़पसर मेडिकल असोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सचिन आवणे आदि उपस्थित थे।
श्री चव्हाण ने कहा कि विद्यार्थी दिव्यांग नहीं दिव्य हैं। उन्हें यह महसूस किए बिना कि वे समाज से अलग हैं, उन्हें स्वयं अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करना चाहिए। कठिनाइयों के बिना जीवन में सफलता नहीं मिलती। अपनी खुद की कमियों को खोजें और उन्हें दूर करें और अपनी रुचि के क्षेत्र का चयन करें और इसके माध्यम से आगे बढ़ें। उन्होंने संस्था और छात्रों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
डॉ. पाटोदकर ने कहा कि दिव्यांग छात्रों में दिव्य दृष्टि से सृष्टि को देखने की शक्ति होती है, भले ही उनके पास दृष्टि न हो। उन्हें निराश हुए बिना लक्ष्य तक पहुंचने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि समाज उनके पीछे है। यह वास्तव में उनके जीवन की शुरुआत है। 10वीं का कोर्स पूरा करना जीवन का एक महत्वपूर्ण क्षण है, उसका आनंद लें। हमारे पास जो ज्ञान है वह समाज के अन्य वर्गों तक और अपने भाइयों तक पहुंचाना आपकी जिम्मेदारी है। जीवन के अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं और भारतीय प्रशासनिक सेवा में भी जाएं।
डॉ. आवणे ने कहा कि नेत्रहीन स्कूल, स्कूल नहीं बल्कि विद्यार्थियों का घर है। यहां नि:स्वार्थ भाव से काम कर विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। समाज को ऐसी संस्थाओं को मदद कर सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
इस अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों के शुभ हाथों विद्यार्थियों एवं लेखकों को विद्यालय सामग्री एवं नकद रकम देकर सम्मानित किया गया। यहां शिक्षक व विद्यार्थियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
विकलांगों के जीवन को सुखमय बनाने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर प्रगति की जाए। यह अपील अपर पुलिस आयुक्त नामदेव चव्हाण ने की है।
कोरेगांव पार्क स्थित लड़कों के नेत्रहीन स्कूल में हड़पसर मेडिकल असोसिएशन और सिद्धेश्वर महिला बहुउद्देशीय संस्था द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कक्षा 10 वीं के विद्यार्थियों और उनकी मदद करने वाले लेखकों के विदाई समारोह में वे बोल रहे थे। यहां सूचना उपसंचालक डॉ. राजू पाटोदकर, प्रशासकीय अधिकारी कृष्णा शेवाले, सिद्धेश्वर के डॉ. शंतनु जगदाले, हड़पसर मेडिकल असोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. सचिन आवणे आदि उपस्थित थे।
श्री चव्हाण ने कहा कि विद्यार्थी दिव्यांग नहीं दिव्य हैं। उन्हें यह महसूस किए बिना कि वे समाज से अलग हैं, उन्हें स्वयं अपनी क्षमता का पूरा उपयोग करना चाहिए। कठिनाइयों के बिना जीवन में सफलता नहीं मिलती। अपनी खुद की कमियों को खोजें और उन्हें दूर करें और अपनी रुचि के क्षेत्र का चयन करें और इसके माध्यम से आगे बढ़ें। उन्होंने संस्था और छात्रों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
डॉ. पाटोदकर ने कहा कि दिव्यांग छात्रों में दिव्य दृष्टि से सृष्टि को देखने की शक्ति होती है, भले ही उनके पास दृष्टि न हो। उन्हें निराश हुए बिना लक्ष्य तक पहुंचने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि समाज उनके पीछे है। यह वास्तव में उनके जीवन की शुरुआत है। 10वीं का कोर्स पूरा करना जीवन का एक महत्वपूर्ण क्षण है, उसका आनंद लें। हमारे पास जो ज्ञान है वह समाज के अन्य वर्गों तक और अपने भाइयों तक पहुंचाना आपकी जिम्मेदारी है। जीवन के अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं और भारतीय प्रशासनिक सेवा में भी जाएं।
डॉ. आवणे ने कहा कि नेत्रहीन स्कूल, स्कूल नहीं बल्कि विद्यार्थियों का घर है। यहां नि:स्वार्थ भाव से काम कर विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। समाज को ऐसी संस्थाओं को मदद कर सामाजिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
इस अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों के शुभ हाथों विद्यार्थियों एवं लेखकों को विद्यालय सामग्री एवं नकद रकम देकर सम्मानित किया गया। यहां शिक्षक व विद्यार्थियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।


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