मुंबई स्थित राजभवन में डॉ. बच्चूसिंह टाक को महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ‘वर्ल्ड बुक ऑफ रेकॉर्ड लंडन का प्रमाणपत्र, संवेदना इंटरनेशनल लाइफ सेवर अवॉर्ड व अध्याय ग्लोबल कंपेटिशन’ पुरस्कार देकर सम्मानित करते हुए, साथ में नेशनल इंटिग्रेटेड फोरम ऑफ आर्टिस्ट एंड एक्टिविस्ट के संस्थपाक प्रीतपालसिंह पनू, संवेदना महाराष्ट्र के सह आयोजक व महाराष्ट्र अंत्रप्रेनर चेंबर के अध्यक्ष अमेय पाटिल उक्त चित्र में दिखाई दे रहे है।
हड़पसर, अप्रैल (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
डॉ. बच्चूसिंह टाक को महाराष्ट्र राज्य के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी के शुभहाथों वर्ल्ड बुक ऑफ रेकॉर्ड लंडन का प्रमाणपत्र, संवेदना इंटरनेशनल लाइफ सेवर अवॉर्ड व अध्याय ग्लोबल कंपेटिशन पुरस्कार देकर सम्मानित किया है।
कोरोना काल में महसूस हो रही खून की कमी को देखते हुए शहीद भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव के 90 वें शहीद दिवस के अवसर पर भव्य रक्तदान शिविर आयोजित करके महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा रक्त संकलित करनेवाले डॉ. बच्चूसिंह टाक को राजभवन में संपन्न हुए समारोह में राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी ने सम्मानित किया है। इस अवसर पर यहां नेशनल इंटिग्रेटेड फोरम ऑफ आर्टिस्ट एंड एक्टिविस्ट के संस्थापक प्रीतपालसिंह पनू, संवेदना महाराष्ट्र के सह आयोजक व महाराष्ट्र अंत्रप्रेनर चेंबर के अध्यक्ष अमेय पाटिल, नेशनल इंटिग्रेटेड मेडिकल असोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. विनायक टेंभुर्लेकर व महाराष्ट्र शासन जलसंपदा विभाग के अधिकारी सतीश जोंधले आदि अतिथिगण उपस्थित थे।
कोरोना काल मे महसूस हो रही खून की कमी को देखते हुए संस्था की ओर से संवेदना मुहिम के अंतर्गत 23 मार्च 2021 को पूरे भारत देश में, साथ ही अन्य देशों में शहीद भगतसिंह, राजगुरु व सुखदेव के 90 वें शहीद दिन के अवसर पर 1476 जगहों पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया था, इस शिविर में 1 लाख से अधिक रक्त बैग एकत्र किए गए थे। एक ही दिन में बड़ी मात्रा में रक्त एकत्रित होने के कारण इस घटना को लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। महाराष्ट्र में कुल 97 रक्तदान शिविर आयोजित किए गए, इसमें 4150 ब्लड बैग एकत्र किए गए। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा रक्त संग्रह केंद्र हड़पसर में डॉ. बच्चूसिंह टाक का था। इन्हें जन समुदाय में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मान पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह जानकारी नेशनल इंटिग्रेटेड फोरम ऑफ आर्टिस्ट एंड एक्टिविस्ट के संस्थपाक प्रीतपालसिंह पनू ने दी।

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