श्री मुकुंद किर्दत
प्रवक्ता : आम आदमी पार्टी, महाराष्ट्र राज्य
हड़पसर, जून (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
आम जनता की तकलीफ, बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर के दाम, युवाओं के हाथों में कोई काम नहीं आदि मूलभूत आवश्यकताओं से हमारा देश जूझ रहा है। इस ओर ध्यान देने के लिए किसी के पास समय नहीं है? बस सत्ता हथिया में ही सब लगे हुए हैं। महाराष्ट्र की जनता ने भरोसे से आपको वोट दिया है, सत्ता हथियाने के लिए नहीं, क्या आप भूल गए हो!
पिछले कुछ दिनों में राज्यसभा सांसद चुनाव बाद के विधान परिषद चुनाव, महाराष्ट्र में कुर्सी के चारों ओर राजनीति के रूप में जनता देख रही है। गत सप्ताह में महाराष्ट्र की जनता को एक अलग राजनीति का अगला प्रयोग देखने को मिला है। गत दिनों में जो कुछ घटनांए हो रही थीं, उसमें भारतीय जनता पार्टी व शिवसेना के कुछ नेतागण क्या वे एक साथ आएंगे और सत्ता हथिया लेंगे इस ओर सारी चर्चा इसी के इर्द-गिर्द चल रही है। इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी व भाजपा द्वारा तड़के सुबह शपथ ग्रहण विधि, महाराष्ट्र के मतदाताओं ने विधानसभा चुनाव के बाद देखा। फिर एक विकल्प के रूप में मतदाताओं के सामने अस्वाभाविक रूप से विपक्षी दल एक साथ आकर शपथ ग्रहण विधि करते हुए भी दिखा गया था। नियत समय पर भी मतदाताओं को इस धोखे का अहसास हुआ। उसके बाद कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी व शिवसेना ने साथ एक होकर महाविकास आघाडी सरकार को गठित करते हुए भी महाराष्ट्र की जनता ने देखा। राष्ट्रवादी, भाजपा, शिवसेना, कांग्रेस व मनसे किसी के साथ भी सत्ता स्थापित कर सकते हैं यहां तक कि इन स्थापित पार्टियों की राजनीतिक नैतिकता बिगड़ गई है। आज जो ये पार्टियां कर रही हैं वे अगले पड़ाव पर पहुंच गई हैं।
एक तरफ देश भर में युवाओं के रोजगार के सवाल पर, अग्निपथ योजना पर अत्यंत तीव्र आंदोलन हो रहे हैं। महंगाई चरम सीमा पर पहुंच गई है, जिसके कारण आम आदमी की रीड की हड्डी टूट गई है। छोटे व्यवसायी, जो रोजंदारी पर व्यवसाय करते हैं, वह वर्ग आज तक कोरोना संकट के कारण पैदा हुआ आर्थिक संकट का सामना नहीं कर पा रहे हैं ना ही वो आर्थिक संकट से उभर पा रहे हैं। आज जब जनता ऐसे सवालों से पूरी तरह से घिरी हो, ऐसी स्थिति में यह स्थापित राजनीतिक दल केवल सत्ता के लिए खेल खेल रहे हैं। इसके पीछे बड़े आर्थिक घटनाक्रम भी हो रहे हैं ! इसे जनता के साथ विश्वासघात के रूप में होते हुए देखा जा रहा है। महाराष्ट्र में आज के हालात में मतदाता पूरी तरह से चौपट हो गया है उसे एक कोने में ़फेंक दिया गया है। जो कुछ घटनाएं महाराष्ट्र में होते हुए दिखाई दे रही हैं वो केवल बस सत्ता हथिया के लिए! सत्ता हथियाने के लिए राजनीतिक नैतिकता में भारी गिरावट व मतदाताओं के साथ विश्वासघात का गंदा रूप है।

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