हड़पसर की शोभा बढ़ानेवाला डॉ. राममनोहर लोहिया उद्यान स्वर्ण जयंती वर्ष मनाने जा रहा है। इस उद्यान का उद्घाटन 18 जुलाई 1972 को पुणे के उस समय के महापौर सोनबा नानाजी उर्फ भाऊसाहेब चव्हाण के शुभ हाथों किया गया। करीब साढ़े चार से पांच एकड़ में बना यह सबसे पुराना उद्यान है। वड, पिपल, उंबर, निलगिरी ऐसे विविध घने पेड़ व फूलों के पौधों ने सुशोभीकरण किया हुआ है, यह लोकप्रिय उद्यान हड़पसर के बीच में है। उस समय महानगरपालिका के उपमहापौर जयसिंहराव जेथे थे। नाले के नजदीक यह एक ऐसा पार्क है जो हर चीज से भरा है, यह उद्यान नन्हें- मुन्ने बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिक व महिलाओं के लिए एक आकर्षण है।
अब उद्यान अपने स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शायद इसकी लोकप्रतिनिधीयों को किसी भी तरह की जागरूकता नहीं है। अंदर नन्हें-मुन्ने बच्चों के लिए खिलौने हैं, परंतु उनकी दुरावस्था (बहुत पुराने, रंग चले गए) दिखाई दे रही है, इसे सुधारने की जरूरत है।
यह कहना पड़ता है कि यहां एक सुशोभित फव्वारा था, लेकिन अब वो बंद है। कोरोना काल में इस पर ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन अब लगता है कि बाग पूरी तरह खिल चुका है, इसलिए उपाय के कदम उठाने चाहिए।
सुबह-शाम यहां युवा लड़के-लड़की, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं घूमने के लिए आते हैं। रविवार के दिन कुछ कंपनियों के सेवानिवृत्ति लोग यहां आकर समय बिताते हैं। उद्यान में श्रीदत्तत्रेय का एक छोटा सा मंदिर है साथ ही उद्यान के बाहर संत शिरोमणि सावतामाली महाराज मंदिर, हिंदू-मुस्लिमों का श्रद्धास्थान दर्गा तो दूसरी ओर श्री चंद्रमौलेश्वर महादेव मंदिर, इस कारण यहां दर्शन के लिए आनेवाले श्रद्धालु इस उद्यान में एक पल के लिए सैर या विश्राम के लिए जरूर आते हैं। स्वर्ण जयंती वर्ष में पदार्पण करनेवाले उद्यान के वापस अच्छे दिन आयें, बस यही मनोकामना!
अब उद्यान अपने स्वर्ण जयंती वर्ष में प्रवेश कर चुका है, लेकिन शायद इसकी लोकप्रतिनिधीयों को किसी भी तरह की जागरूकता नहीं है। अंदर नन्हें-मुन्ने बच्चों के लिए खिलौने हैं, परंतु उनकी दुरावस्था (बहुत पुराने, रंग चले गए) दिखाई दे रही है, इसे सुधारने की जरूरत है।
यह कहना पड़ता है कि यहां एक सुशोभित फव्वारा था, लेकिन अब वो बंद है। कोरोना काल में इस पर ध्यान नहीं दिया गया, लेकिन अब लगता है कि बाग पूरी तरह खिल चुका है, इसलिए उपाय के कदम उठाने चाहिए।
सुबह-शाम यहां युवा लड़के-लड़की, वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं घूमने के लिए आते हैं। रविवार के दिन कुछ कंपनियों के सेवानिवृत्ति लोग यहां आकर समय बिताते हैं। उद्यान में श्रीदत्तत्रेय का एक छोटा सा मंदिर है साथ ही उद्यान के बाहर संत शिरोमणि सावतामाली महाराज मंदिर, हिंदू-मुस्लिमों का श्रद्धास्थान दर्गा तो दूसरी ओर श्री चंद्रमौलेश्वर महादेव मंदिर, इस कारण यहां दर्शन के लिए आनेवाले श्रद्धालु इस उद्यान में एक पल के लिए सैर या विश्राम के लिए जरूर आते हैं। स्वर्ण जयंती वर्ष में पदार्पण करनेवाले उद्यान के वापस अच्छे दिन आयें, बस यही मनोकामना!
श्री सुधीर मेथेकर, (वरिष्ठ पत्रकार)

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