पुणे, जून (जिमाका)
सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग द्वारा संचालित शिरूर में पिछड़ा वर्ग बालिकाओं के लिए सरकारी छात्रावास में शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जाति एवं भटक्या जनजाति, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग, विशेष पिछड़ा वर्ग, शारीरिक रूप से विकलांग एवं अनाथ छात्रों को सरकारी छात्रावासों में आरक्षित प्रतिशत के अनुसार प्रवेश दिया जायेगा।
8वीं व इससे अधिक के स्कूल व कॉलेज के छात्र जो नया प्रवेश लेना चाहते हैं, वे सरकारी छात्रावासों में उपलब्ध मुद्रित आवेदन पत्र, शर्तों और सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए कार्यालय समय के दौरान गृहपाल, पिछड़ा वर्ग की लड़कियों का सरकारी छात्रावास, शिरूर से संपर्क कर सकते हैं। सरकारी छात्रावास के लिए प्रवेश फॉर्म निःशुल्क है।
शासकीय छात्रावासों में नामांकित विद्यार्थियों को नि:शुल्क भोजन एवं आवास उपलब्ध कराया जाता है। शैक्षणिक संस्था प्रमुख की संस्तुति के अनुसार पाठ्यक्रम पूर्ण करने के लिए आवश्यक पाठ्य पुस्तकों, शैक्षिक सामग्री, गणवेश आदि के लिए निर्धारित राशि छात्रों के बैंक खाते में जमा की जाती है। साथ ही 600 रुपये प्रति माह का निर्वाह भत्ता भी दिया जाता है। जिले के जरूरतमंद व गरीब छात्रों से छात्रावास योजना का लाभ लेने की अपील गृहपाल श्रीमती आर. वी. साखरे द्वारा की गई।
सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग द्वारा संचालित शिरूर में पिछड़ा वर्ग बालिकाओं के लिए सरकारी छात्रावास में शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, विमुक्त जाति एवं भटक्या जनजाति, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग, विशेष पिछड़ा वर्ग, शारीरिक रूप से विकलांग एवं अनाथ छात्रों को सरकारी छात्रावासों में आरक्षित प्रतिशत के अनुसार प्रवेश दिया जायेगा।
8वीं व इससे अधिक के स्कूल व कॉलेज के छात्र जो नया प्रवेश लेना चाहते हैं, वे सरकारी छात्रावासों में उपलब्ध मुद्रित आवेदन पत्र, शर्तों और सुविधाओं के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए कार्यालय समय के दौरान गृहपाल, पिछड़ा वर्ग की लड़कियों का सरकारी छात्रावास, शिरूर से संपर्क कर सकते हैं। सरकारी छात्रावास के लिए प्रवेश फॉर्म निःशुल्क है।
शासकीय छात्रावासों में नामांकित विद्यार्थियों को नि:शुल्क भोजन एवं आवास उपलब्ध कराया जाता है। शैक्षणिक संस्था प्रमुख की संस्तुति के अनुसार पाठ्यक्रम पूर्ण करने के लिए आवश्यक पाठ्य पुस्तकों, शैक्षिक सामग्री, गणवेश आदि के लिए निर्धारित राशि छात्रों के बैंक खाते में जमा की जाती है। साथ ही 600 रुपये प्रति माह का निर्वाह भत्ता भी दिया जाता है। जिले के जरूरतमंद व गरीब छात्रों से छात्रावास योजना का लाभ लेने की अपील गृहपाल श्रीमती आर. वी. साखरे द्वारा की गई।

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