आप के पुणे जिला अध्यक्ष मुकुंद किर्दत द्वारा महाराष्ट्र शासन से मांग
हड़पसर, जुलाई (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
रिसाव (लीक) हुए टेमघर बांध की मरम्मत का खर्च जनता पर क्यों? टेमघर की रिसाव व निधि के अभाव की कमी के कारण मरम्मत में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है? मरम्मत को और कितने साल? जनता के सिर पर इस खर्चे का बोझ क्यों? बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 के अनुसार सभी बांधों का पुन: निरीक्षण और प्रबंधन किया जाना चाहिए। यह मांग आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता व पुणे जिला अध्यक्ष मुकुंद किर्दत द्वारा महाराष्ट्र शासन से की है।
उन्होंने आगे बताया कि दरअसल खडकवासला शृंखला में पानशेत, वरसगांव बांध से कृषि के लिए पानी की आपूर्ति होती है, इसलिए पुणे के लिए एक विशेष पानी की सुविधा के रूप में टेमघर बांध 1997 में बनाने का निर्णय लिया गया। बांध वास्तव में 2011 में बनकर तैयार हुआ था। एक बांध का औसत जीवन 100 वर्ष होता है परंतु 6 साल के अंदर ही बांध में रिसाव होने लगा। मेरी संस्था के पूर्व अधिकारी व आम आदमी पार्टी के विजय पांढरे ने इस रिसाव पर मांग की कि जिम्मेदार ठेकेदार व अधिकारियों के खिलाफ आरोप दायर किया जाए। इसके बाद मरम्मत का काम शुरू किया गया व संबंधित कंपनियों को बंद कर दिया गया, पूर्व कर्मचारियों, निदेशकों के खिलाफ अपराध दर्ज किए गए। श्रीनिवास कंस्ट्रक्शन के 7 कर्मचारी, प्रोग्रेसिवइन कंस्ट्रक्शन के 2 अधिकारी और जल संसाधन अधिकारी तरह 33 लोग इसमें शामिल हैं। बांध बनानेवाले ठेकेदार कंपनी ने कभी इसकी मरम्मत नहीं की। सरकार ने टेमघर बांध की मरम्मत के लिए 100 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया और यह काम ठेकेदार कंपनी को दे दिया गया। इन बांधों की मरम्मत का खर्च ठेकेदारों से वसूला जाना चाहिए न कि जनता के पैसे से। यह मांग भी आम आदमी पार्टी ने की है।
संबंधित ठेकेदारों की कंपनी बंद हुई है। कहा जाता है कि प्रवर्तकों ने नुकसान के लिए दावा दायर किया हालांकि, कोई प्रगति नहीं हुई है। इस मामले में असली अपराधी ठेकेदार को तत्कालीन जल संसाधन मंत्री सुनील तटकरे और अजीत पवार पर उनका समर्थन करने का आरोप आम आदमी पार्टी ने लगाया था। 2011 में बांध में बिना किसी ग्राउटिंग कार्य के पानी जमा किया गया था। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही वर्षों में बांध में रिसाव होने लगा। दिसंबर 2016 में बांध को खाली कर दिया गया था, लेकिन जुलाई 2022 के अंत तक काम अधूरा है, इसलिए टेमघर बांध को पिछले साल भी खाली करना पड़ा था। पिछले पांच साल से पुणेवासी इस रिसाव की कीमत चुका रहे हैं। 100 करोड़ रुपए का काम पूरा होने के बाद भी 50 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मांग की गई है।
3.71 टीएमसी क्षमतावाला बांध भी पिछले साल खाली किया गया था, लेकिन दो साल में निधि की कमी के कारण कुछ खास नहीं किया गया है। पुणे को प्रति वर्ष लगभग 18 टीएमसी पानी की आवश्यकता होती है। 3.73 टीएमसी बांध में पानी पिछले 5 वर्षों से जल्दी छोड़ा गया है। चूंकि खडकवासला बांध की शृंखला में एक बांध है, इसलिए टेमघर के पानी को पहले घुमाने के लिए इस्तेमाल करना पड़ता है।
टेमघर बांध से अभी भी 175 लीटर प्रति सेकेंड की गति से पानी रिसाव हो रहा है। हालांकि पिछले साल प्रशासनिक स्वीकृति के अभाव में बांध को खाली कर दिया गया था, लेकिन रिसाव की मरम्मत का काम नहीं किया गया है। इसके अलावा एक और मुद्दा यह है कि बांध मजबूत नहीं है, इसलिए विकल्प तलाशने और काम करने की जरूरत है। इसके लिए बांध को और 1-2 साल खाली करना पड़ सकता है। इसे प्रशासनिक स्वीकृति को तत्काल दिए जाने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार ने ‘बांध सुरक्षा अधिनियम 2021’ पेश किया है। तद्नुसार बांध संबंधी आपदाओं को रोकने के लिए और बांध रखरखाव, जांच, कार्यकरण, ध्यान, सुरक्षा और सहायक मामलों के लिए एक प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है। आज महाराष्ट्र में 2394 बांध हैं और कुछ 100 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। जलवायु परिवर्तन और बांधों की उम्र, पुराने बांध निर्माण मानदंड में बदलाव इस पृष्ठभूमि में सभी बांधों का पुन: निरीक्षण करते हुए 2021 के कानून के अनुसार एक सक्षम प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए। यह मांग महाराष्ट्र शासन से आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता व पुणे जिला अध्यक्ष मुकुंद किर्दत ने की है।
रिसाव (लीक) हुए टेमघर बांध की मरम्मत का खर्च जनता पर क्यों? टेमघर की रिसाव व निधि के अभाव की कमी के कारण मरम्मत में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है? मरम्मत को और कितने साल? जनता के सिर पर इस खर्चे का बोझ क्यों? बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 के अनुसार सभी बांधों का पुन: निरीक्षण और प्रबंधन किया जाना चाहिए। यह मांग आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता व पुणे जिला अध्यक्ष मुकुंद किर्दत द्वारा महाराष्ट्र शासन से की है।
उन्होंने आगे बताया कि दरअसल खडकवासला शृंखला में पानशेत, वरसगांव बांध से कृषि के लिए पानी की आपूर्ति होती है, इसलिए पुणे के लिए एक विशेष पानी की सुविधा के रूप में टेमघर बांध 1997 में बनाने का निर्णय लिया गया। बांध वास्तव में 2011 में बनकर तैयार हुआ था। एक बांध का औसत जीवन 100 वर्ष होता है परंतु 6 साल के अंदर ही बांध में रिसाव होने लगा। मेरी संस्था के पूर्व अधिकारी व आम आदमी पार्टी के विजय पांढरे ने इस रिसाव पर मांग की कि जिम्मेदार ठेकेदार व अधिकारियों के खिलाफ आरोप दायर किया जाए। इसके बाद मरम्मत का काम शुरू किया गया व संबंधित कंपनियों को बंद कर दिया गया, पूर्व कर्मचारियों, निदेशकों के खिलाफ अपराध दर्ज किए गए। श्रीनिवास कंस्ट्रक्शन के 7 कर्मचारी, प्रोग्रेसिवइन कंस्ट्रक्शन के 2 अधिकारी और जल संसाधन अधिकारी तरह 33 लोग इसमें शामिल हैं। बांध बनानेवाले ठेकेदार कंपनी ने कभी इसकी मरम्मत नहीं की। सरकार ने टेमघर बांध की मरम्मत के लिए 100 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया और यह काम ठेकेदार कंपनी को दे दिया गया। इन बांधों की मरम्मत का खर्च ठेकेदारों से वसूला जाना चाहिए न कि जनता के पैसे से। यह मांग भी आम आदमी पार्टी ने की है।
संबंधित ठेकेदारों की कंपनी बंद हुई है। कहा जाता है कि प्रवर्तकों ने नुकसान के लिए दावा दायर किया हालांकि, कोई प्रगति नहीं हुई है। इस मामले में असली अपराधी ठेकेदार को तत्कालीन जल संसाधन मंत्री सुनील तटकरे और अजीत पवार पर उनका समर्थन करने का आरोप आम आदमी पार्टी ने लगाया था। 2011 में बांध में बिना किसी ग्राउटिंग कार्य के पानी जमा किया गया था। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही वर्षों में बांध में रिसाव होने लगा। दिसंबर 2016 में बांध को खाली कर दिया गया था, लेकिन जुलाई 2022 के अंत तक काम अधूरा है, इसलिए टेमघर बांध को पिछले साल भी खाली करना पड़ा था। पिछले पांच साल से पुणेवासी इस रिसाव की कीमत चुका रहे हैं। 100 करोड़ रुपए का काम पूरा होने के बाद भी 50 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मांग की गई है।
3.71 टीएमसी क्षमतावाला बांध भी पिछले साल खाली किया गया था, लेकिन दो साल में निधि की कमी के कारण कुछ खास नहीं किया गया है। पुणे को प्रति वर्ष लगभग 18 टीएमसी पानी की आवश्यकता होती है। 3.73 टीएमसी बांध में पानी पिछले 5 वर्षों से जल्दी छोड़ा गया है। चूंकि खडकवासला बांध की शृंखला में एक बांध है, इसलिए टेमघर के पानी को पहले घुमाने के लिए इस्तेमाल करना पड़ता है।
टेमघर बांध से अभी भी 175 लीटर प्रति सेकेंड की गति से पानी रिसाव हो रहा है। हालांकि पिछले साल प्रशासनिक स्वीकृति के अभाव में बांध को खाली कर दिया गया था, लेकिन रिसाव की मरम्मत का काम नहीं किया गया है। इसके अलावा एक और मुद्दा यह है कि बांध मजबूत नहीं है, इसलिए विकल्प तलाशने और काम करने की जरूरत है। इसके लिए बांध को और 1-2 साल खाली करना पड़ सकता है। इसे प्रशासनिक स्वीकृति को तत्काल दिए जाने की आवश्यकता है। केंद्र सरकार ने ‘बांध सुरक्षा अधिनियम 2021’ पेश किया है। तद्नुसार बांध संबंधी आपदाओं को रोकने के लिए और बांध रखरखाव, जांच, कार्यकरण, ध्यान, सुरक्षा और सहायक मामलों के लिए एक प्रणाली स्थापित करना आवश्यक है। आज महाराष्ट्र में 2394 बांध हैं और कुछ 100 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। जलवायु परिवर्तन और बांधों की उम्र, पुराने बांध निर्माण मानदंड में बदलाव इस पृष्ठभूमि में सभी बांधों का पुन: निरीक्षण करते हुए 2021 के कानून के अनुसार एक सक्षम प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए। यह मांग महाराष्ट्र शासन से आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता व पुणे जिला अध्यक्ष मुकुंद किर्दत ने की है।

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