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कर्मयोगी पद्मश्री, हड़पसर भूषण डा. सुदाम काटे

समाज का ऋण व सामाजिक प्रतिबद्धता की शिक्षा ग्रहण करते समय से ही आपने अपने समक्ष जीवन की रूपरेखा तैयार की व कड़ी मेहनत और सेवाभावीवृत्ति का जीवन में पालन किया। ऐसे कर्मयोगी हैं पद्मश्री, हड़पसर भूषण डा. सुदाम काटे।
बायोकेमिस्ट्री विषय में स्नातकोत्तर अध्ययन पूर्ण करने के बाद आपके अंदर संशोधक के जुनून से आपने मेडिकल जेनेस्टिक्स में पीएच. डी. की पदवी प्राप्त की। इस क्षेत्र में पीएच. डी. की पदवी प्राप्त करने वाले आप पहले थे, यह एक विशेष गौरव व प्रशंसनीय बात है। जिस उद्देश्य से ज्ञान की गंगा का आपने उचित मूल्य से शिक्षा का पवित्रदान किया। पुणे स्थित बी. जे. मेडिकल कॉलेज में आपने 26 साल और श्री भाऊसाहेब हिरे सरकारी वैद्यकीय महाविद्यालय में 2 साल सेवा करते हुए ज्ञानदान करने का पवित्र कार्य किया है। साथ ही 1994 से 1998 तक इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च संस्था में आपने वैद्यकीय शास्त्रज्ञ की अहम भूमिका निभाई। इस क्षेत्र में 40 सालों से अधिक समय की सेवा में विकसित पद्धति का लाभ भविष्य काल में सभी को होगा। राष्ट्रीय व अन्तरराष्ट्रीय संस्था के साथ 12 संशोधन प्रकल्प आपने पूर्ण किए। अपने कार्य काल में आपने प्रकाशित किए हुए 84 संशोधन आपकी निष्ठा व कुछ करने का जज्बा के गवाह हैं।  अन्तरराष्ट्रीय नियततालिका में आपके संशोधन को प्राप्त हुआ स्थान इसकी मान्यता सिद्ध करता है। पुणे के बी.जे. मेडिकल कॉलेज में आपके द्वारा शुरू किए गए जेनेटिक सेंटर का उल्लेख होना चाहिए। इस केन्द्र में जनुकीय बीमारी के बारे में किया जानेवाला अध्ययन अखिल मानवता जाति के कल्याण के लिए उपयुक्त साबित हुआ है। आपके द्वारा शुरू किया गया यह केन्द्र पूरे भारत में सर्वोत्कृष्ट तीन केन्द्रों में से एक है। वर्ष 1971 व 1973 में जनुकीय विषय पर राष्ट्रीयस्तर परिषद व जनसंख्या के बारे में जनुकीय संदर्भ में समय-समय पर किया गया सर्वेक्षण इस क्षेत्र में कार्य की दिशा ठहराता है। आदिवासी व पिछड़े भागों में विशेषत: सिकल सेल बीमारी के अनुषंग से किए गए सर्वेक्षण में इस बीमारी को नियंत्रण कार्य में लक्षणीय उपयोग हुआ। सिकल सेल एमिनिया विषय पर 2015 साल में सुमतिभाई शहा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज व महाराष्ट्र हेल्थ यूनिवर्सिटी नासिक द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया चर्चासत्र राष्ट्रीय स्तरपर प्रशंसनीय चर्चासत्र साबित हुआ।
आदिवासी भाग के समुदायों के लोगों की सेवा करने का व्रत ही नहीं लिया बल्कि आपने आपका पूरा सर्वस्व न्यौछावर किया। लोगों की सेवा के प्रति समर्पित होकर उनकी स्वास्थ्य समस्याओं पर काम करने के लिए आपने बी.जे. मेडिकल कॉलेज में संशोधन केन्द्र तो स्थापित किया ही साथ में आदिवासी भाग के समुदायों के लोगों के लिए लगातार स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन करके बड़ी जनजागरूकता की मुहिम शुरू की। नंदुरबार जिले में स्थित धडगांव में आपके द्वारा शुरू किए गए सिकल सेल दवाखाना सिकल सेल बीमारी पर काम करनेवाला केन्द्र यानी वहां के असंख्य लोगों के लिए संजीवनी केन्द्र है। बीमारी का निदान व इलाज के साथ ही वहां पर समुपदेशन की व्यवस्था है। आपके द्वारा शुरू किए गए इस स्वास्थ्य केन्द्र का लाभ महाराष्ट्र के साथ-साथ मध्य प्रदेश व गुजरात राज्यों को भी हो रहा है। 
डा. सुदाम काटे को पद्मश्री पुरस्कार सहित विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों के साथ-साथ विभिन्न संघटनों की ओर से पुरस्कार देकर नवाजा गया है।
-श्री सुधीर मेथेकर
वरिष्ठ पत्रकार

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