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एक्सप्रेस-वे हाईवे पर लगे 46,000 पेड़ कहां गए? : आप के प्रवक्ता मुकुंद किर्दत ने पूछा मुख्यमंत्री से सवाल

हड़पसर, अगस्त (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
हाइवे पर पौधरोपण यह जुमला है? नियमानुसार हाइवे पर वृक्षारोपण हुआ ही नहीं है। एक्सप्रेस-वे हाईवे पर लगे 46,000 पेड़ कहां गए? क्या मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मुझे बताएंगे कि यह पेड़ कहां गायब हो गए हैं? यह सवाल आम आदमी पार्टी के महाराष्ट्र राज्य प्रवक्ता मुकुंद किर्दत ने किया है। 
प्रवक्ता मुकुंद किर्दत ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया कि 1995 के आसपास जब पुणे मुंबई एक्सप्रेस वे की चर्चा शुरू हुई तब पर्यावरणविदों ने बहुत आपत्तियां उठाईं। चूंकि यह सड़क मुख्य रूप से सह्याद्री घाट से होकर गुजरती है, इसलिए बड़ी मात्रा में पेड़ काटे जाने थे। वन्य जीवों का नुकसान, गांवों का बंटवारा और सड़कों को जोड़ने में दिक्कत, खड्डों का खुलना जैसी समस्याएं थीं। बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होगी, सरकार ने आश्वासन दिया कि एक लाख से अधिक पेड़ लगाए जाएंगे और उनका संरक्षण किया जाएगा। नितिन गडकरी तब बड़े-बड़े वादे करने में आगे थे, लेकिन मेरा आरोप है कि वायदे निभाये ही नहीं गये।
सूचना के अधिकार का उपयोग करते हुए मैंने 2017 से वृक्षारोपण की स्थिति जानकर ली है। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण और रखरखाव का ठेका और बदले में टोल वसूली का ठेका आइडियल रोड बिल्डर्स को दिया गया था। 2005 के इस अनुबंध के अनुसार, कंपनी हाईवे का रखरखाव करते हुए 93 किमी एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर 1 लाख पेड़ लगाने के लिए जिम्मेदार थी। यह काम दो साल में पूरा करना था। आइडियल रोड बिल्डर के साथ अनुबंध की यह शर्तें है। इस ठेके के अनुसार यशवंतराव चव्हाण एक्सप्रेस हाईवे और पुराने एमएच 4 मार्ग का रखरखाव करते समय अकेले एक्सप्रेस रोड पर 1 लाख पेड़ लगाना अनिवार्य था और उनमें से कम से कम 80,000 अच्छी स्थिति में होने चाहिए, लेकिन बाद में रखरखाव अनुबंध ने एक्सप्रेस वे और पुराने राजमार्ग को कम से कम 80,000 पेड़ों के रूप में व्याख्यायित किया।
विगत सत्रह वर्षों में वृक्षारोपण एवं गणना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार वृक्षों की स्थिति इस प्रकार है- 2005 में एक्सप्रेस-वे पर 1,00,000 पेड़ लगाए गए थे।
-2011 के अंत तक एक्सप्रेस वे पर 1,03,455 पेड़ थे।
-2012 में, पुराने राजमार्ग पर 15,000 अधिक एक्सप्रेस वे पर के 68292 ऐसे कुल 83292 पेड़ यानी एक्सप्रेस वे पर वृक्षारोपण से 35163 पेड़ कम होने की सूचना प्राप्त हुई है। 
-2014 से 2016 तक, पुराने राजमार्ग पर 15000 अधिक एक्सप्रेस वे पर 80,176 सहित कुल 95,176 पेड़ तो 2017 के अंत में, यह बताया गया था कि पुराने राजमार्ग पर 13,000 और एक्सप्रेस वे पर 1,02,176 पेड़ थे, कुल 1,15,176 पेड़ की गणना की जानकारी सूचित की गई है।
-2019 के अंत तक पुराने राजमार्ग पर 15,426 व एक्सप्रेस वे पर 71,826 कुल 87,252 ऐसे पेड़ की गिनती की जानकारी बताई गई है। वास्तविक एक्सप्रेस हाईवे पर देखी गई स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। कुछ क्षेत्रों में, आंखों की गिनती करने पर ऐसा लगता है कि वृक्षों की गणना का आंकड़ा बढ़ा-चढ़ा कर दिखाया गया है, इसलिए इसका अनुसरण किया जाना चाहिए । जुलाई 2022 में आरटीआई में एमएसआरडीसी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार दोनों सड़कों पर कुल 64,035 पेड़ मौजूद हैं।
यानी 93 किमी की एक्सप्रेस व उससे भी लंबा पुराना हाईवे इन दोनों सड़कों के संयुक्त वृक्ष आँकड़ा 1,15,176 से घटकर 64,035 पर आ गया है। आशंका जताई जा रही है कि पेड़ों की वास्तविक संख्या और भी कम हो सकती है। अब ये 46000 पेड़ 5 साल में कहां गए? सड़कों, राजमार्गों पर मानकों, ग्रेड, अनुसंधान का आदान-प्रदान करनेवाले भारतीय सड़क कांग्रेस के दिशा निर्देशों के अनुसार (खठउ) कम से कम एक किमी सड़क के पीछे 666 पेड़ तो नए आईआरसी-एसपी 21 के अनुसार एक किमी सड़क पर 999 पेड़ होने की उम्मीद है। वृक्षारोपण हेतु परियोजना राशि में सिविल कार्य का 1 प्रतिशत ग्रीन हाईवे फंड के रूप में ग्रहण किया जाता है। इसके बावजूद इस हाईवे पर पर्याप्त पौधरोपण व रखरखाव नहीं किया गया है। राजमार्ग विकास के बजाय, कॉरीडॉर (गलियारे) की अवधारणा पर्यावरण के बारे में व्यापक दृष्टिकोण रखती है, लेकिन हकीकत में इसे ज्यादा लागू नहीं किया जाता है। पुणे-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर 10000 पौधों का रोपण व जहां कम से कम 80000 पेड़ अच्छी स्थिति में होने की उम्मीद है, वहीं आज सिर्फ 49035 पेड़ों का ही पंजीकरण हुआ है, इसलिए किसी बड़े प्रोजेक्ट में ‘पर्यावरण जिम्मेदारी’ का भी जुमला है। यह आरोप आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता मुकुंद किर्दत ने लगाया है। 
फिलहाल एक्सप्रेस हाईवे पर ‘मिसिंग लिंक’ 13.3 किलोमीटर सड़क तैयार होने के दौरान 5300 पेड़ काटे जानेवाले हैं और बदले में 48000 पेड़ लगाने जा रहे हैं। साथ ही पुणे में भी बालभारती हिल रोड तो मुंबई में गोरेगांव मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। सवाल उठता है कि क्या सरकार इस एक्सप्रेस-वे के अनुभव से कुछ सीखेगी। क्या सरकार पर्यावरण के मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी? यह सवाल प्रवक्ता मुकुंद किर्दत ने महाराष्ट्र राज्य सरकार से पूछा है। 
इस अवसर पर यहां आम आदमी पार्टी के सतीश यादव, दिनेश चौधरी, अक्षय शिंदे, शंकर थोरात आदि उपस्थित थे।

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