हमारे देश में लगभग 60 से 65 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर हैं। भारत एक कृषि प्रधान देश के रूप में जाना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आजीविका कृषि पर निर्भर होती है।
किसानों की समस्या, इससे उपजे अवसाद और इससे उपजे किसानों की आत्महत्या की उचित जांच होनी चाहिए। प्रशासन को किसानों की समस्याओं और प्रश्नों को समझना चाहिए, इस पर क्या उपाय किए जा सकते हैं और रणनीतिक निर्णय लिए जा सकते हैं, इसके लिए अधिकारियों व पदाधिकारियों को संपूर्ण दिन किसानों के साथ व्यतीत कर उनकी समस्याओं को समझने के लिए ‘मेरा एक दिन मेरे किसान के लिए’ (माझा एक दिवस माझ्या बळीराजासाठी) यह उपक्रम 1 सितंबर से 30 नवंबर 2022 तक लागू किया जा रहा है। इसके बारे में जानकारी के आधार पर लेख...
प्रशासन के सभी वरिष्ठ अधिकारी, विद्यापीठ के वैज्ञानिकों को सुबह से शाम तक यानी संपूर्ण दिन किसानों के साथ रहकर उनके सामने दैनिक कृषि कार्य में आने वाली कठिनाइयाँ उनके साथ विभिन्न कार्यों में भाग लेकर हल करने के लिए ‘मेरा एक दिन मेरे किसान के लिए’ इस उपक्रम को कार्यान्वित किया जा रहा है।
इस उपक्रम में शामिल होने वाले अधिकारी
इस उपक्रम में राज्यस्तर पर कृषि के प्रधान सचिव, आयुक्त, कृषि संचालक और विद्यापीठस्तर पर वैज्ञानिकों में कृषि विद्यापीठ के कुलगुरु, विद्यापीठ के विभाग प्रमुख, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता शामिल होंगे।
विभागस्तरीय अधिकारियों में विभागीय आयुक्त, विभागीय कृषि सहसंचालक और जिलास्तर पर अधिकारियों में जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी, प्रकल्प संचालक (आत्मा) व अन्य जिलास्तरीय अधिकारी शामिल होंगे। उपविभागीयस्तर पर राजस्व के उपविभागीय अधिकारी, उपविभागीय कृषि अधिकारी व अन्य उपविभागीयस्तरीय अधिकारी एवं तालुकास्तर पर अधिकारियों में तहसीलदार, समूह विकास अधिकारी, तालुका कृषि अधिकारी व अन्य तालुकास्तरीय अधिकारियों का समावेश होगा।
इस उपक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों को महीने में तीन दिन एवं राजस्व, ग्रामविकास व अन्य विभाग के अधिकारियों को महीने में एक दिन गांवों में जाना होगा।
गांवों और किसानों का चयन
‘मेरा एक दिन मेरे किसान के लिए’ इस उपक्रम में गांवों का चयन करते समय दूरस्थ, पहाड़ी, शुष्क, आदिवासी, सामाजिक और कमजोर क्षेत्रों का चयन किया जाएगा। गांव का चयन करते समय संबंधित अधिकारी/ पदाधिकारियों को अपने मुख्यालय से सबसे दूर के गांवों का चयन करना चाहिए।
गांव का चयन नजदीक के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारियों को किया जाना चाहिए, साथ ही मिलने जाने के लिए किसान का चयन करते समय संभवत: एक शुष्क भूमि वाले किसान का चयन किया जाना चाहिए।
उपक्रम अवधि के दौरान दी जाने वाली जानकारी..
अधिकारी, पदाधिकारियों को गांवों का चयन करने के बाद गांव के शासकीय, निमशासकीय, अशासकीय संस्था, गांव की बैंकें, सोसाइटी, दूध संस्था किसानों को किस प्रकार मदद दी जा सकती है, इस पर चर्चा करें। अनौपचारिक चर्चा कर किसानों की समस्याओं, उनके उत्पादन, खर्च और बचत की जानकारी प्राप्त करें। आत्महत्या प्रभावित वर्ग के किसानों द्वारा झेले जा रहे अवसाद के कारणों का पता लगायें। तदनुसार, उनकी समस्याओं और प्रश्नों के समाधान के लिए क्या रणनीतिक निर्णय लिए जा सकते हैं, इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए।
दौरा करने वाले गांव में ग्राम कृषि विकास समिति की बैठक आयोजित कर उसमें गांव की फसल प्रणाली, परिवर्तन करनेवाली फसल प्रणाली के बारे में, साथ ही किसानों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक के बारे में भी विस्तार से चर्चा होगी। किसानों की सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। विश्वविद्यालय के अधिकारी, वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी किसानों के कृषि करने के आर्थिक कारणों को स्पष्ट करें। गांव में बैठक कर नई तकनीक, फसलवार किस्मों की जानकारी दी जाए।
गांव के किसानों, उत्पादन कंपनियों, बचत समूह, महिला बचत समूहों, सामूहिक कृषि उपक्रम आदि का दौरा किया जाएगा। कुल मिलाकर ‘मेरा एक दिन मेरे किसान के लिए’ यह पहल किसानों की समस्याओं के समाधान में मददगार साबित होगी।
किसानों की समस्या, इससे उपजे अवसाद और इससे उपजे किसानों की आत्महत्या की उचित जांच होनी चाहिए। प्रशासन को किसानों की समस्याओं और प्रश्नों को समझना चाहिए, इस पर क्या उपाय किए जा सकते हैं और रणनीतिक निर्णय लिए जा सकते हैं, इसके लिए अधिकारियों व पदाधिकारियों को संपूर्ण दिन किसानों के साथ व्यतीत कर उनकी समस्याओं को समझने के लिए ‘मेरा एक दिन मेरे किसान के लिए’ (माझा एक दिवस माझ्या बळीराजासाठी) यह उपक्रम 1 सितंबर से 30 नवंबर 2022 तक लागू किया जा रहा है। इसके बारे में जानकारी के आधार पर लेख...
प्रशासन के सभी वरिष्ठ अधिकारी, विद्यापीठ के वैज्ञानिकों को सुबह से शाम तक यानी संपूर्ण दिन किसानों के साथ रहकर उनके सामने दैनिक कृषि कार्य में आने वाली कठिनाइयाँ उनके साथ विभिन्न कार्यों में भाग लेकर हल करने के लिए ‘मेरा एक दिन मेरे किसान के लिए’ इस उपक्रम को कार्यान्वित किया जा रहा है।
इस उपक्रम में शामिल होने वाले अधिकारी
इस उपक्रम में राज्यस्तर पर कृषि के प्रधान सचिव, आयुक्त, कृषि संचालक और विद्यापीठस्तर पर वैज्ञानिकों में कृषि विद्यापीठ के कुलगुरु, विद्यापीठ के विभाग प्रमुख, कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता शामिल होंगे।
विभागस्तरीय अधिकारियों में विभागीय आयुक्त, विभागीय कृषि सहसंचालक और जिलास्तर पर अधिकारियों में जिलाधिकारी, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी, प्रकल्प संचालक (आत्मा) व अन्य जिलास्तरीय अधिकारी शामिल होंगे। उपविभागीयस्तर पर राजस्व के उपविभागीय अधिकारी, उपविभागीय कृषि अधिकारी व अन्य उपविभागीयस्तरीय अधिकारी एवं तालुकास्तर पर अधिकारियों में तहसीलदार, समूह विकास अधिकारी, तालुका कृषि अधिकारी व अन्य तालुकास्तरीय अधिकारियों का समावेश होगा।
इस उपक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों को महीने में तीन दिन एवं राजस्व, ग्रामविकास व अन्य विभाग के अधिकारियों को महीने में एक दिन गांवों में जाना होगा।
गांवों और किसानों का चयन
‘मेरा एक दिन मेरे किसान के लिए’ इस उपक्रम में गांवों का चयन करते समय दूरस्थ, पहाड़ी, शुष्क, आदिवासी, सामाजिक और कमजोर क्षेत्रों का चयन किया जाएगा। गांव का चयन करते समय संबंधित अधिकारी/ पदाधिकारियों को अपने मुख्यालय से सबसे दूर के गांवों का चयन करना चाहिए।
गांव का चयन नजदीक के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपने अधीनस्थ अधिकारियों को किया जाना चाहिए, साथ ही मिलने जाने के लिए किसान का चयन करते समय संभवत: एक शुष्क भूमि वाले किसान का चयन किया जाना चाहिए।
उपक्रम अवधि के दौरान दी जाने वाली जानकारी..
अधिकारी, पदाधिकारियों को गांवों का चयन करने के बाद गांव के शासकीय, निमशासकीय, अशासकीय संस्था, गांव की बैंकें, सोसाइटी, दूध संस्था किसानों को किस प्रकार मदद दी जा सकती है, इस पर चर्चा करें। अनौपचारिक चर्चा कर किसानों की समस्याओं, उनके उत्पादन, खर्च और बचत की जानकारी प्राप्त करें। आत्महत्या प्रभावित वर्ग के किसानों द्वारा झेले जा रहे अवसाद के कारणों का पता लगायें। तदनुसार, उनकी समस्याओं और प्रश्नों के समाधान के लिए क्या रणनीतिक निर्णय लिए जा सकते हैं, इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए।
दौरा करने वाले गांव में ग्राम कृषि विकास समिति की बैठक आयोजित कर उसमें गांव की फसल प्रणाली, परिवर्तन करनेवाली फसल प्रणाली के बारे में, साथ ही किसानों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक के बारे में भी विस्तार से चर्चा होगी। किसानों की सामाजिक सुरक्षा से संबंधित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। विश्वविद्यालय के अधिकारी, वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी किसानों के कृषि करने के आर्थिक कारणों को स्पष्ट करें। गांव में बैठक कर नई तकनीक, फसलवार किस्मों की जानकारी दी जाए।
गांव के किसानों, उत्पादन कंपनियों, बचत समूह, महिला बचत समूहों, सामूहिक कृषि उपक्रम आदि का दौरा किया जाएगा। कुल मिलाकर ‘मेरा एक दिन मेरे किसान के लिए’ यह पहल किसानों की समस्याओं के समाधान में मददगार साबित होगी।
संकलन : विभागीय सूचना कार्यालय, पुणे

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