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विकलांगों की विभिन्न मांगों को लेकर विकलांग युवक विजय मोरे मुख्यमंत्री से मिलने साइकिल से लातूर से मुंबई के लिए रवाना

हड़पसर आगमन पर मराठवाडा बहुउद्देशीय प्रतिष्ठान और सुरक्षा फाउंडेशन द्वारा स्वागत
हड़पसर, सितंबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
कोई विकलांग पैदा होता है तो कोई विभिन्न घटनाओं के कारण, कोई जन्म के बाद विकलांग हो जाता है। विकलांग भाइयों और बहनों को कई समस्याएं होती हैं। यह देखा गया है कि शासकों ने लगातार इसकी ओर अनदेखी की है। विकलांगों को अपना जीवन अच्छी तरह से सक्षम रूप से जीने के लिए विकलांगों की प्रमुख मांगों की ओर मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करने हेतु लातूर का एक विकलांग युवक साइकिल से लातूर से मुंबई की यात्रा करने जा रहा है और मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखेगा। इस युवक ने मंगलवार को लातूर से यात्रा शुरू की और हड़पसर पुणे में पहुंचने पर मराठवाडा बहुउद्देशीय प्रतिष्ठान व सुरक्षा फाउंडेशन की ओर से उसका सम्मान किया गया है। इस अवसर पर यहां मराठवाडा बहुउद्देशीय प्रतिष्ठान संस्थापक अध्यक्ष महेश टेले पाटिल, सुरक्षा फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष इम्तियाज मोमीन, युवा उद्योगपति अनिकेत मोरे, कालिदास जगताप, सूरज कारकर, सुरेश जाधव आदि उपस्थित थे। 
लातूर निवासी विजय मोरे विकलांग युवक ने सन् 2012 में ट्रेन हादसे में अपना दाहिना पैर गंवा दिया। इसके बाद उन्होंने खुद को कृत्रिम पैर पर रखकर अपने जीवन की यात्रा जारी रखी। हालांकि कृत्रिम पैर होने से जीने में काफी परेशानी होती है। कोई विकल्प नहीं होने के कारण तकलीफों को झेलना पड़ रहा है। विकलांगों को दूसरों की तरह जीने में सक्षम बनाने के लिए सरकार ने कृत्रिम सामग्री प्रदान की है।
सामग्री का रखरखाव (रखरखाव और मरम्मत) लगातार रखना पड़ता है। चूंकि लातूर जिले और मराठवाड़ा में कोई रखरखाव और मरम्मत केंद्र नहीं है, विकलांगों को सीधे मुंबई जाना पड़ता है। सफर के दौरान उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। साथ ही उन पर आर्थिक बोझ भी पड़ता है। लातूर जिले में सैकड़ों विकलांग भाई-बहन हैं। उन सभी की सुविधा के लिए लातूर जिले में एक दिव्यांग केंद्र स्थापित करने, सामग्री रखरखाव और मरम्मत के साथ-साथ अन्य सुविधाएं प्रदान करने की आवश्यकता है। विकलांगों की दुर्दशा और अपेक्षाओं की किसी को परवाह नहीं है। विजय मोरे ने अपने अभिनंदन का जवाब देते हुए खेद व्यक्त किया।
प्रतिदिन 60 किमी साइकिल यात्रा : 
लातूर से मुंबई की दूरी करीब 550 किलोमीटर है। विकलांग युवक विजय मोरे ने 6 सितंबर से अपनी यात्रा शुरू की है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि वह रोजाना करीब 60 किलोमीटर का सफर तय कर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। मुख्यमंत्री विकलांगों की समस्याओं से अवगत हैं, इसलिए विजय मोरे ने विश्वास जताया है कि वह मुझसे जरूर मिलेंगे और मेरी मांगें मानेंगे। मोरे ने कहा कि मैं यह लड़ाई अपने लिए नहीं लड़ रहा हूं बल्कि मैंने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि मेरे जैसे कई विकलांग लोगों को दुर्दशा का सामना न करना पड़े।
ये हैं प्रमुख मांगें :
विजय मोरे, एक विकलांग युवक, साइकिल पर लातूर से मुंबई की यात्रा कर रहा है क्योंकि वह हम पर आए दुर्भाग्यपूर्ण समय और हमारे जैसे हजारों विकलांग लोगों की दुर्दशा को सहन और देख नहीं सकता है।
- कृत्रिम सामग्री के रखरखाव और मरम्मत के लिए लातूर में एक विकलांग केंद्र स्थापित किया जाना चाहिए।
- विकलांगों के लिए पांच सौ रुपये का अल्प पारिश्रमिक वर्तमान में बढ़ाया जाना चाहिए।
-विकलांगों के विकास के लिए जिलास्तर पर विकलांग महामंडल की स्थापना की जानी चाहिए।

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