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हड़पसर की अमरधाम श्मशानभूमि की शीतपेटियों की साफ-सफाई कर उपयोग में लाया जाए : समाजसेवक विजय मोरे द्वारा मनपा प्रशासन से मांग

हड़पसर, अक्टूबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
हड़पसर की अमरधाम श्मशानभूमि में दो लाख रुपये खर्च करके सांसद निधि से उपलब्ध कराई गई शीतपेटी धूल खाती हुई पड़ी है। पुणे महानगरपालिका    द्वारा इसे नजरअंदाज किया जा रहा है। हालांकि नागरिकों को अपने रिश्तेदारों के शवों को शीतपेटी में रखने के लिए अस्पतालों में चक्कर लगाने पड़ रहे हैं जब कि पुणे महानगरपालिका के पास यह सुविधा है फिर भी न रहने के बराबर है? इसके लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? यह सवाल पुणे महानगरपालिका प्रशासन से समाजसेवक विजय मोरे ने किया है। 

हड़पसर श्मशानभूमि में शीतपेटी रखने के लिए अलग कमरा, रखरखाव के लिए कर्मचारी व शीतपेटी की मरम्मत करने के लिए पुणे महानगरपालिका आयुक्त विक्रमकुमार व विधायक चेतन तुपे से मांग करूंगा।

आगे उन्होंने बताया कि हड़पसर की सात लाख की आबादी के लिए हड़पसर मालवाडी की अमरधाम श्मशानभूमि महानगरपालिका के माध्यम से कार्यरत है। 2016-17 की सांसद निधि से सांसद गिरीश बापट ने हड़पसर अमरधाम श्मशानभूमि को दो शीतपेटियां दी हैं। इन शीतपेटियों के उपयोग की व्यवस्था महानगरपालिका के पास नहीं है, इसलिए इन पर धूल चढ़ गई है। कई बार नागरिकों को अपने परिजनों के शरीर दान करने पड़ते हैं। इसके अलावा, यदि किसी व्यक्ति की रात में मृत्यु होने पर अगले दिन दाह संस्कार करने का समय आता है। तब शीतपेटी में शवों को रखने की कोई व्यवस्था न रहने से नागरिकों को अस्पताल और निजी एम्बूलेंसधारकों से मन्नतें करनी पड़ती है। इसका खर्च हजारों रुपए का होता है जबकि सांसद निधि से 2 लाख रुपये की शीतपेटियां उपलब्ध कराई गई हैं। इसका उपयोग क्यों नहीं किया जाता है? हड़पसर जैसे बड़े उपनगर में सांसद निधि से उपलब्ध हुई शीतपेटी धूल खा रही है तो इससे पुणे शहर में कितनी शीतपेटियां उपयोग के बिना पड़ी है।
रत्नमाला मुनोत नामक महिला की मृत्यु हो गई थी, महिला को देहदान करने की इच्छा थी परंतु रात के समय शव को रखने की कोई व्यवस्था न रहने के कारण विजय मोरे, महेश नलावडे व विलास शेलार ने श्मशानभूमि में जाकर धूल से ढकी शीतपेटी निकालकर साफ सफाई करके कार्यरत की, परंतु कई दिनों से बंद रहने के कारण शीतपेटी की मरम्मत करना जरूरी था। उन्होंने इस समस्या की ओर विशेष रूप से महानगरपालिका को ध्यान देकर आवश्यक कदम उठाने की मांग  की है।

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