हड़पसर, अक्टूबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
हड़पसर व परिसर की सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक भूख को संतुष्ट करने का काम हड़पसर सामाजिक व सांस्कृतिक प्रतिष्ठान की ओर से जारी है। प्रतिष्ठान की ओर से प्रदान किए जानेवाले ‘त्रिनेत्र’ पुरस्कार के माध्यम से समाज का मन व कलाई को मजबूत बनानेवाले व्यक्तियों का सम्मान करके मानवतावादी विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है। राष्ट्र निर्माण के लिए इन चीजों की वास्तव में जरूरत है।
त्रिनेत्र पुरस्कार यानी मानवता प्रति कृतज्ञता। यह विचार शिरूर लोकसभा चुनाव क्षेत्र के सांसद डॉ. अमोल कोल्हे ने व्यक्त किए।
हड़पसर सामाजिक व सांस्कृतिक प्रतिष्ठान की ओर से हड़पसर देवस्थान कमेटी के पूर्व अध्यक्ष स्व. बाबूराव श्रीपती तुपे व स्व. अशोकराव बापूसाहेब मगर के स्मरण में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करनेवाले व्यक्तियों को ‘त्रिनेत्र’ कृतज्ञता पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इस साल वरिष्ठ विचारक, साहित्यिक व वक्ता प्रा. हरि नरके और शहीद भगतसिंह जीवनरक्षक फाउंडेशन के अध्यक्ष व समाजसेवक डॉ. बच्चूसिंह टाक को सांसद डॉ. अमोल कोल्हे के शुभ हाथों पुरस्कार दिया गया, तब वे बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां विधायक चेतन तुपे, पूर्व विधायक जगन्नाथ शेवाले, महादेव बाबर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पुणे शहर के अध्यक्ष प्रशांत जगताप, पूर्व नगरसेवक योगेश सासणे, श्रीनाथ भिमाले, कांग्रेस ब्लॉक हड़पसर के पूर्व अध्यक्ष प्रशांत मामा तुपे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी हड़पसर विधानसभा चुनाव क्षेत्र के अध्यक्ष डॉ. शंतनु जगदाले, हड़पसर सामाजिक व सांस्कृतिक प्रतिष्ठान के अध्यक्ष निलेश मगर, उपाध्यक्ष प्रजाक मगर, कोषाध्यक्ष रामदास तुपे, सचिव नाजीम शेख आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
कार्यक्रम का प्रास्ताविक करते हुए हड़पसर सामाजिक व सांस्कृतिक प्रतिष्ठान के अध्यक्ष निलेश मगर ने कहा कि प्रतिष्ठान की ओर से पिछले बहुत सालों से दिवाली भोर संगीत महोत्सव रमा एकादशी से भाईदूज तक आयोजित किया जाता है। इसमें महाराष्ट्र के संगीत क्षेत्र के कई नामी कलाकारों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस साल पंडित उपेंद्र भट की संतवानी, वरिष्ठ संगीतकार और गायक श्रीधर फड़के द्वारा ‘फिटे अंधाराचे जाळे’, शास्त्रीय गायक अजीत कडकडे द्वारा ‘कैवल्याच्या चांदण्याला’, रमा कुलकर्णी, मालवीका दीक्षित, राहुल जोशी, अजीत विसपुते द्वारा लता मंगेशकर की स्वर्गीय यादें, सलील कुलकर्णी व संदीप खरे का ‘आयुष्यावर बोलू काही’ और कु. अंजली व कु. नंदिनी गायकवाड के ‘अवघा रंग एक झाला’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
पुरस्कारार्थी प्रा. हरि नरके, डॉ. बच्चूसिंह टाक और विधायक चेतन तुपे ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का सूत्र-संचालन प्रा. नितिन लगड और आभार प्रदर्शन उपाध्यक्ष अविनाश तुपे ने किया।
हड़पसर व परिसर की सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक भूख को संतुष्ट करने का काम हड़पसर सामाजिक व सांस्कृतिक प्रतिष्ठान की ओर से जारी है। प्रतिष्ठान की ओर से प्रदान किए जानेवाले ‘त्रिनेत्र’ पुरस्कार के माध्यम से समाज का मन व कलाई को मजबूत बनानेवाले व्यक्तियों का सम्मान करके मानवतावादी विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है। राष्ट्र निर्माण के लिए इन चीजों की वास्तव में जरूरत है।
त्रिनेत्र पुरस्कार यानी मानवता प्रति कृतज्ञता। यह विचार शिरूर लोकसभा चुनाव क्षेत्र के सांसद डॉ. अमोल कोल्हे ने व्यक्त किए।
हड़पसर सामाजिक व सांस्कृतिक प्रतिष्ठान की ओर से हड़पसर देवस्थान कमेटी के पूर्व अध्यक्ष स्व. बाबूराव श्रीपती तुपे व स्व. अशोकराव बापूसाहेब मगर के स्मरण में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करनेवाले व्यक्तियों को ‘त्रिनेत्र’ कृतज्ञता पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इस साल वरिष्ठ विचारक, साहित्यिक व वक्ता प्रा. हरि नरके और शहीद भगतसिंह जीवनरक्षक फाउंडेशन के अध्यक्ष व समाजसेवक डॉ. बच्चूसिंह टाक को सांसद डॉ. अमोल कोल्हे के शुभ हाथों पुरस्कार दिया गया, तब वे बोल रहे थे। इस अवसर पर यहां विधायक चेतन तुपे, पूर्व विधायक जगन्नाथ शेवाले, महादेव बाबर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी पुणे शहर के अध्यक्ष प्रशांत जगताप, पूर्व नगरसेवक योगेश सासणे, श्रीनाथ भिमाले, कांग्रेस ब्लॉक हड़पसर के पूर्व अध्यक्ष प्रशांत मामा तुपे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी हड़पसर विधानसभा चुनाव क्षेत्र के अध्यक्ष डॉ. शंतनु जगदाले, हड़पसर सामाजिक व सांस्कृतिक प्रतिष्ठान के अध्यक्ष निलेश मगर, उपाध्यक्ष प्रजाक मगर, कोषाध्यक्ष रामदास तुपे, सचिव नाजीम शेख आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
कार्यक्रम का प्रास्ताविक करते हुए हड़पसर सामाजिक व सांस्कृतिक प्रतिष्ठान के अध्यक्ष निलेश मगर ने कहा कि प्रतिष्ठान की ओर से पिछले बहुत सालों से दिवाली भोर संगीत महोत्सव रमा एकादशी से भाईदूज तक आयोजित किया जाता है। इसमें महाराष्ट्र के संगीत क्षेत्र के कई नामी कलाकारों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस साल पंडित उपेंद्र भट की संतवानी, वरिष्ठ संगीतकार और गायक श्रीधर फड़के द्वारा ‘फिटे अंधाराचे जाळे’, शास्त्रीय गायक अजीत कडकडे द्वारा ‘कैवल्याच्या चांदण्याला’, रमा कुलकर्णी, मालवीका दीक्षित, राहुल जोशी, अजीत विसपुते द्वारा लता मंगेशकर की स्वर्गीय यादें, सलील कुलकर्णी व संदीप खरे का ‘आयुष्यावर बोलू काही’ और कु. अंजली व कु. नंदिनी गायकवाड के ‘अवघा रंग एक झाला’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
पुरस्कारार्थी प्रा. हरि नरके, डॉ. बच्चूसिंह टाक और विधायक चेतन तुपे ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का सूत्र-संचालन प्रा. नितिन लगड और आभार प्रदर्शन उपाध्यक्ष अविनाश तुपे ने किया।

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