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आधुनिक महाराष्ट्र के विकास का मार्ग ‘समृद्धि महामार्ग’

किसी भी क्षेत्र का विकास वहां की यातायात की सुविधाएं कितनी विकसित हैं और यातायात कितना सुचारु है इस पर निर्भर होता है। राज्य के विकास में सड़कों का विकास सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि राज्य में सड़क नेटवर्क विकसित किया जाता है, तो निश्चित रूप से आर्थिक विकास को गती मिल सकती है, यह जानकर अथक प्रयासों के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में ‘हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि महामार्ग’ का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 11 दिसंबर को किया जा रहा है। इस अवसर पर यह विशेष लेख...
‘हिंदुहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि राजमार्ग’ के प्रथम चरण में नागपुर से शिर्डी (कोकमठाण) तक 520 किमी सड़क का काम पूरा हो गया है। शिर्डी से मुंबई तक की बची हुई सड़क जुलाई 2023 तक शुरु की जाएगी। इस महामार्ग में राज्य के दस जिले, 26 तालुके और 392 गांव शामिल हैं और छह लेन वाले इस महामार्ग की लंबाई 701 किलोमीटर है। इस हाईवे की बदौलत नागपुर से मुंबई का 18 घंटे का सफर अब सिर्फ 8 घंटे में किया जा सकता है। नागपुर से शिर्डी की दूरी में 13 घंटे लगते थे; अब यह दूरी पांच घंटे में तय की जा सकेगी। मुंबई से औरंगाबाद जाने में भी कम समय लगेगा।
घोषणा से पूर्तता तक : नागपुर और मुंबई के बीच यात्रा को सुविधाजनक बनाने के नागपुर-मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण करने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 31 अगस्त 2015 को विधानसभा में की थी। 30 नवंबर 2015 को इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी की बैठक में इस हाईवे के निर्माण का निर्णय लिया गया था।
राज्य के विद्यमान मुख्यमंत्री तथा सार्वजनिक बांधकाम (उपक्रम) विभाग के तत्कालीन मंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में इसकी कार्यवाही आरंभ हुई थी। इस यंत्रणा द्वारा गति के साथ किया गया कार्य निश्चय ही प्रशंसनीय है। इस परियोजना की कुल लागत 55 हजार 335 करोड़ रुपये है। इस महामार्ग के अंतर्गत कुल 1901 कार्यों में से 1787 कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा 114 कार्य प्रगति पथ पर हैं।
समय की बचत और विकास का राजमार्ग
इस महामार्ग के दोनों ओर रहने वाले लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। इस परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण एक वर्ष के रिकॉर्ड समय में पूरा किया गया। यह सड़क रोजगार के अवसर पैदा कर एक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार राजमार्ग बनाने में मदद करेगी। यात्रियों की सुविधा के लिए एक्सप्रेस-वे के दोनों बाजू पर 20 स्थानों पर सुविधा केंद्र बनाए गए हैं। इन सड़कों से क्षेत्रीय मार्केट में वृद्धि होगी और कृषि उत्पादों के तेजी से यातायात करने में मदद मिलेगी। इससे इन क्षेत्रों में उद्योग और उत्पादन केंद्रों की क्षमता बढ़ेगी।
हरित मार्ग : इस क्षेत्र में वन्य जीवों को नुकसान ना पहुंचे इसके लिए 100 वन्यजीव मार्ग बनाए गए हैं। वन्य जीवों के आवास के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर ‘साउंडप्रूफिंग’ का प्रावधान किया गया है। एक हजार से अधिक कृत्रिम खेत तालाब निर्माण किए गए हैं। इस सड़क के किनारे 11 लाख से अधिक पेड़ और लगभग 22 लाख झाड़ियाँ और लताएँ लगाने की योजना है। इससे पर्यावरण को बचाने में मदद मिलेगी। यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचने और दुर्घटना होने की स्थिति में तत्काल सहायता प्राप्त करने के लिए 15 यातायात सहायता केंद्र, बचाव और दुर्घटना नियंत्रण के लिए 21 रैपिड रिस्पांस वाहन और लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाली 21 एम्बूलेंस प्रदान की जाएंगी।
वाहनों को तत्काल ईंधन मिले, इसके लिए भी सुविधा दी गई है। यहां पर सौर ऊर्जा से 138.47 मेगावॉट बिजली पैदा होगी, 22 जिलों को गैस की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, वाहन चार्जिंग स्टेशन के कारण ऊर्जा बचाने में मदद होगी। वाहनों के टोल भरने के लिए ‘फास्ट टैग’ प्लाजा बनाए जाएंगे। इस मार्ग पर यात्रियों को यातायात में बिना किसी परेशानी के सुरक्षित और आरामदायक यात्रा के लिए सभी सुविधाएं निर्माण की गई हैं। दक्षिण कोरिया की सरकार के साथ हुए समझौते के अनुसार अगले दो वर्षों में द्विपक्षीय निधि के माध्यम से इस मार्ग पर एक अत्याधुनिक इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित करने की योजना है, जो इस महामार्ग पर यातायात को विनियमित करने में भी मदद करेगी।
पाँच लाख रोजगार का निर्माण
इस मार्ग पर ‘कृषि समृद्धि केंद्र’ के नाम से जाने जाने वाले नए शहरों का निर्माण किया जा रहा है। ऐसे नए शहरों के विकास के लिए 18 स्थल निश्चित किए गए हैं। जहां कौशल विकास केंद्र, अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, शैक्षणिक संस्थान और आईटी पार्क स्थापित किए जाएंगे। इन शहरों में स्थापित कृषि आधारित उद्योग किसानों को कृषि से आय बढ़ाने के लिए रोजगार, स्वरोजगार और अन्य अवसर प्रदान करेंगे। एक्सप्रेसवे से लगभग 5 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
यह महामार्ग पर्यटन को बढ़ावा देगा क्योंकि यह विभिन्न पर्यटन स्थलों जैसे शिर्डी, वेरुल, लोनार सरोवर, अजिंठा, एलोरा, औरंगाबाद, त्र्यंबकेश्वर के ज्योतिर्लिंग और घृष्णेश्वर, पंचवटी, इगतपुरी आदि स्थानो को जोड़ेगा। यह महामार्ग दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट के माध्यम से भी माल की तेज आवाजाही की सुविधा प्रदान करेगा।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने उनके कार्यकाल के दौरान सुवर्ण चतुष्कोण की भूमिका रखी थी। इसके अनुसार मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता शहर चार लेन के महामार्ग से जुड़े हुए हैं। इसके सकारात्मक परिणाम आज देखने को मिल रहे हैं। इसी तर्ज पर महाराष्ट्र राज्य में भी इन जिलों को जोड़ने का काम किया गया है। इसी से ‘हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि महामार्ग’ भी साकार हुआ है।
राज्य में सभी के लिए एक कुशल, सुरक्षित, समय की बचत, सस्ती और अच्छी गुणवत्ता वाली परिवहन व्यवस्था होना समय की मांग है। बदलते समय में महाराष्ट्र की तेज गति के साथ प्रगति के लिए राज्य के जिलों को जोड़ने वाली उत्कृष्ट गुणवत्ता वाली गतिमान परिवहन व्यवस्था प्रदान करने में ‘हिंदूह्रदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि महामार्ग’ महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। गतिशील सड़क विकास के माध्यम से राज्य के विकास के लिए सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम बहुत ही आश्वासक है।
-संध्या गरवारे खंडारे
सहायक संचालक

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