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महाराष्ट्र की भाग्य रेखा

कनेक्टिविटी (संपर्क), निरंतरता और संवाद ही विकास का मूलमंत्र होता है। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई और राज्य के बाकी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी, निरंतरता और संवाद को और मजबूत और गतिमान करने के लिए राज्य सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से कदम उठाए हैं। ‘समृद्धि महामार्ग’ भी उसी में से एक है। समृद्धि महामार्ग यह विदर्भ, मराठवाड़ा के किसानों, आम जनता, नव उद्यमी, छोटे उद्यमियों, व्यापारियों की महत्त्वाकांक्षा को पूरा करने वाला राजमार्ग है। इस परियोजना का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुभ हाथों किया गया। इससे विदर्भ-मराठवाड़ा से मुंबई की दूरी बहुत ही कम हो गई है।
महाराष्ट्र का औद्योगिक विकास मुख्य रूप से मुंबई, पुणे, नासिक के भागों में केंद्रित हुआ है, क्योंकि इन स्थलों पर प्राथमिक सुविधाएं, अच्छी सड़कों की उपलब्धता है, यहां पर आनेवाले निवेशकों को मराठवाड़ा और विदर्भ की तरफ आगेकूच करने के लिए तेज गति सडको की जरुरत महसूस हुई है। इसके परिणामस्वरुप सात सौ किलोमीटर लंबे राजमार्ग का निर्माण हुआ  है। 4 दिसंबर को इस संकल्पना को मूर्त रूप देने वाले विद्यमान मुख्यमंत्री और तत्कालीन सार्वजनिक बांधकाम (उपक्रम) मंत्री एकनाथ शिंदे और इस सड़क की संकल्पना करनेवाले विद्यमान उपमुख्यमंत्री तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रत्यक्ष रुप से इस महामार्ग का निरीक्षण किया, तो उस समय उन दोनों के चेहरे पर आनंद था। यह आनंद कर्तव्य पूर्ति का था, सपने को प्रत्यक्ष रुप से पूरा होते हुए देखने का था।
समस्याओं से समाधान तक...
नागपुर, भंडारा, गढ़चिरौली, गोंदिया, यवतमाल इन भागों से मुंबई पहुंचने में दो-दो दिनों का समय लगना, यह यादें अब पुरानी हो गई हैं। नागपुर से दिल्ली क्या और मुंबई क्या, दोनों एक ही समान, लेकिन राज्य का कारोबार का प्रमुख स्थल राजधानी मुंबई, विदर्भ में कपास, सोयाबीन, दालों, तिलहन की पैदावार बड़ी मात्रा में होती हैं। लेकिन सभी कल-कारखाने (फैक्ट्रियां) मुंबई, पुणे में हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा खनिज संपदा वाला क्षेत्र चंद्रपुर, गढ़चिरौली, यवतमाल और आसपास के क्षेत्र में है, लेकिन केवल खनिज पर आधारित कारखाना एक हजार किलोमीटर पर, पूर्व विदर्भ में बड़े पैमाने पर नदियां औरहजारों मामा तलावों से मीठे पानी की मछली का सबसे ज्यादा पैदावार विदर्भ में होती है, पर ताजी मछली के निर्यात के लिए नजदीक का रास्ता नहीं है। विदर्भ के युवाओं, शिक्षितों और किसानों की पीड़ा को समझकरतत्कालिन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यह दूरदर्शिता रखने वाले नेताने इस महामार्ग की कल्पना की और विद्यमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस कल्पना की पुर्तता के लिए पूरी शिद्दत की। ऐसे कितने ही अनेक दुविधाओं को दूर करने का काम इस समृद्धि महामार्ग के कारण होगा।
समृद्धी की ओर...
‘विकास का मूलमंत्र’ यह समृद्धि महामार्ग का ब्रीद है। 14 से 16 घंटे का समय मुंबई पहुंचने में लगता हैं, वहीं अब इस नजदीक के मार्ग से मुंबई पहुंचने में सात से आठ घंटे समय लगेगा। कच्चा माल, खनिज, दूध, मछली, कृषि उत्पाद इस मार्ग से मुंबई जैसे शहर में पहुंचेगा और इससे बाजार उपलब्ध होगा, इसलिए समृद्धि मार्ग सही मायने में महाराष्ट्र कीभाग्य रेखा साबित होगा।
701 किलोमीटर की विशाल लंबाई के साथ, 6 लेन के साथ 120 मीटर की आकर्षक चौड़ाई, वाहन को गतिमान तरिके से चलाने के लिए प्रत्येक लेन को डिज़ाइन किया गया है, इसके बीच में कोई न आए, इसके लिए सुरक्षा रैंप लगाया गया है। इसके कारण कुछ ही क्षणों में तेज रफ्तार वाहन आंखों से ओझल हो जाएगा। समृद्धि महामार्ग के निरीक्षण के अवसर पर हाल ही में यह दृश्य देखने को भी मिला। सड़कों की चौड़ाई, प्रत्येक लेन का डिजाइन, गुणवत्ता, साज-सज्जा, दिशा दर्शक पटल, सुरक्षा मानक यहसभी आकर्षक है।
नागपुर और विदर्भ को राजधानी मुंबई के करीब लाने वाला यह महामार्ग मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गतिमान विकास सपने को साकार करनेवाला साबीत होगा।
श्री प्रवीण टाके,
जिला सूचना अधिकारी, नागपुर

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