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टोइंग वैन पर काम करनेवाले लड़कों के पीछे कौन है वो बाहुबली ! जो वाहनचालकों के साथ इतना बेखौफ दुर्व्यवहार करने के लिए देता है रजामंदी

हड़पसर, मई (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
यातायात पुलिस प्रशासन, टोइंग वैन पर काम करनेवाले लड़कों के और वाहनचालकों के बीच आए दिन टकराव होने के किस्से चौराहे पर होते हुए दिखाई दे रहे हैं! नो पार्किंग, यह सबसे अहम हिस्सा इस टकराव का है। यहां पर रास्ते के किनारे कहीं पर बोर्ड है तो कहीं नहीं है? यह वस्तुस्थिति है इसे झुठलाया नहीं जा सकता है। नो पार्किंग के मुद्दे को लेकर यातायात पुलिस व वाहन चालकों के बीच में जमकर बहस होती हुई रास्ते पर दिखती है। कई बार तो यह बहस झगड़े में रूपांतर होकर लड़ाई होने के भी किस्से घटे हैं। क्या सही मायने में यह जो भी हालात है क्या वो इस लोकतंत्र देश में शोभा देते हैं? 
यातायात पुलिस के साथ टोइंग वैन में सवार होकर नो पार्किंग में से या रास्ते के किनारे खड़ी हुई गाड़ी जो लड़के उठाते हैं उनका तो इतना रुबाब होता है कि मानो यातायात पुलिस प्रशासन को वो अपनी जेब में डालकर घूमते हैं! रास्ते के किनारे लगाई गई गाड़ी जब उनके द्वारा उठाई जाती है और वो बेबस वाहनचालक जिसने अपने किसी निजी काम के लिए गाड़ी रास्ते के किनारे लगाई है उसकी कुछ इस तरह से आवभगत करते हैं वो बहुत देखने लायक होता है अगर आपको मंजर को देखना है तो आपका हड़पसर में स्वागत है। उनका वाहनचालक के साथ व्यवहार बहुत ही बुरा होता है, बड़ी बदतमजी से वो बात करते हैं, मानो उस बिचारे ने गाड़ी वहां खड़ी करके बहुत बड़ा अपराध किया है। फिर वह इस अंदाज से बात करते हैं बस पूछो ही मत ! उनका रुबाब उनके वाहनचालक के साथ बोलते हुए तेवर यातायात पुलिस को भी शर्मिन्दा करे, कुछ ऐसे होते हैं। कई बार तो यह देखा भी गया है कि टोइंग वैन में उठाई गई गाड़ी ये लड़के पीछे से पैसे लेकर उतारकर देते हैं, जो यातायात पुलिस को भी पता नहीं चलता है। 
इनके पीछे वो कौन बाहुबली है जो इन्हें यह सब इतना बेखोफ करने के लिए रजामंदी देता है। कोई ना कोई तो होगा ही जो उन्हें इतनी ताकत दे रहा है! एक सवाल उपस्थित होता है कि यह सब आम जनता अपनी आंखों से देख रही है तो इनके साथ रहनेवाले यातायात पुलिसकर्मी को यह सब दिख नहीं रहा है? वो इसकी शिकायत अपने वरिष्ठ अधिकारियों के पास क्यों नही करते हैं? क्या इनकी ही आपस में मिलीभगत है? अगर नहीं है तो फिर आंख मूंदकर प्रशासन क्यों बैठा है? कानून के हाथ किसने बांधकर रखे हैं?

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