मुख्य समाचार

6/recent/ticker-posts

तीन पीढ़ियों से वारकरी हूँ : ह.भ.प. जयसिंग ज्योतिबा जांभले

आंबेगांव खुर्द, जून (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
मेरे पितामह, पिताजी और मैं वारकरी संप्रदाय में हैं और मैं 22 वर्ष से श्री ज्ञानेश्वर महाराज की पादुका आलंदी से पैदल चलकर पुणे ला रहा हूँ और पुणे से देहू। तीन पीढ़ियों से वारकरी संप्रदाय में रहकर वारकरी आचारों का पालन कर कर रहा हूँ। हरि भक्त परायण जयसिंग ज्योतिबा जांभले ने यह उल्लेख ज्येष्ठ नागरिक संघ विरंगुला केंद्र जांभुलवाडी रोड में आयोजित उनके जन्मदिन के अवसर पर  किया। 
उन्होंने अपने संस्मरण सुनाते हुए कहा कि उनका जन्म जांभुलवाडी गांव के एक संपन्न परिवार में हुआ। बचपन में घर में काफी गाय भैंस, धान्य व कडधान्य खूब रहता था परंतु पैसा नहीं था। उन्होंने बताया कि जांभुलवाडी से पैदल नंगे पांव चलकर पढ़ने के लिए कात्रज आना पड़ता था। उस समय जांभुलवाडी के बाद दत्तनगर में कुछ मकान थे और धनकवडी का क्षेत्र तो एकदम वीरान था। दोपहर में भी अकेले आने में डर लगता था।  
जांभले के 71वें वर्ष में प्रवेश करने पर उपस्थित सभी ज्येष्ठ नागरिक साथियों ने शुभकामनएं दीं और उनके प्रेमी, मिलनसार, सहयोगी स्वभाव की सभी ने प्रशंसा की। इसी अवसर पर प्रकाश पाशलकर और अशोक बावडे को भी जन्मदिन की शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम अनिल ढोकले की अध्यक्षता में हुआ। इस अवसर पर चंद्रकांत गुरव, संजय रणसिंग, सत्येंद्र सिंह, चंद्रकांत घोडके, दिलीप तोडकर, अशोक खोत, सदानंद शिंदे, कैप्टन विलास रामगुडे, सुरेश लातूरकर, संतोष बोडके, वी.जी.शेटे, चंद्रकांत जांभले आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन संजय रणसिंग ने किया।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ