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मतदाता राजनीतिक पार्टियों को देखने के बजाय विचारों और कार्यों को देखकर वोट दें : अतुल येवले

शिरूर, जुलाई (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज़ नेटवर्क)
मणिपुर में जारी हिंसा को आज दो महीने हो गए हैं, पूरा देश हर दिन खबरें देख और पढ़ रहा है, लेकिन हाल ही जो खबर आई वो भयानक है। हमारे देश में दो महिलाओं के कपड़े उतार दिए जाते हैं, उनके साथ अवांछित बर्ताव किया जाता है, उनका वीडियो बनाया जाता है और पूरे देश में वायरल किया जाता है। क्या कहें इस कृत्य को? आप इस देश को कहां लेकर जा रहे हैं?
महिलाओं की इज्जत का तमाशा क्यों चल रहा है? अपने देश का नाम कलंकित हो रहा है?  फिर भी मोदी सरकार चुपी साधकर क्यों बैठी है? कुछ दिन पहले महिला एथलीट ने उनके साथ हुए अन्याय के खिलाफ न्याय पाने के लिए दिल्ली में प्रदर्शन किया तो उनके साथ मारपीट कर उनके खिलाफ मामला दर्ज कर किया गया और महत्वपूर्ण बात यह है कि अन्याय करनेवाला खुलेआम घूम रहा है। उस वक्त ही देश के लिए जान लगाकर गोल्ड मेडल पानेवाली उन बेटियों को न्याय मिलता और बृजभूषण सिंह को उचित सजा मिली होती तो देश में शायद आज यह स्थिति नहीं बनती। एक तरफ एक आदिवासी महिला को देश की राष्ट्रपति बनाकर, इसका ढिंढोरा पीटना और तो दूसरी ओर महिलाओं की तब तक हिंसा होने दी गई जब तक कि उनके घूंघट नहीं हटा दिए गए। ध्यान दें कि न केवल मणिपुर में महिलाओं की गरिमा को ठेस नहीं लगी है बल्कि देश की सभी महिलाओं की गरिमा को धूल में मिला दिया गया है। आप इस देश को किस राह पर लेकर जा रहे हैं? यह सवाल हर भारतवासी को पूछना चाहिए? देश को आज़ादी मिलने के बाद आप क्या कर रहे हैं? इस देश के संविधान द्वारा महिलाओं को इंसान के रूप में जीने का जो अधिकार और सुरक्षा दी गई है वह क्या केवल नाम के लिए है? इतना ही नहीं बल्कि शासक डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा लिखित संविधान को भी क्या भूल गये हैं? राज्यपाल, पद पर बैठे सांसदों, विधायकों का भी मुंह क्यों बंद है? दिनदहाड़े महिलाओं से बलात्कार हो रहे हैं, बच्चे असुरक्षित हैं और धर्म के नाम पर राजनीति की जा रही है। गरीब और गरीब होते जा रहे हैं और अमीर और अमीर होते जा रहे हैं। युवा बेरोजगारी बढ़ रही है, कोई नौकरी नहीं, हमें नहीं पता कि क्या करें, सरकार ध्यान नहीं दे रही है इस दुविधा से युवा पीढ़ी जूझ रही है। इन सभी स्थितियों में सरकारें पूरी तरह से अद्यतित हैं। किसानों के हाल तो बेहाल हैं, खेती के लिए पानी नहीं है, यदि पानी है तो बिजली नहीं है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? यदि आप वास्तव में परिवर्तन चाहते हैं, तो भाजपा, कांग्रेस और अन्य सभी गठबंधन दलों, असहाय नेताओं को ठुकराकर एक अलग सोच वाली भारत राष्ट्र समिति ( बीआरएस) की विचारधारा को स्वीकार करें। यदि आप वास्तव में बदलाव चाहते हैं तो तेलंगाना मॉडल देखें। वहां कितना बड़ा परिवर्तन किया है, तेलंगाना के मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर राव ने 9 साल तक मोदी पर भरोसा करने का क्या हुआ? बस मतदाताओं का मजाक ही उड़ाया गया है! हम सबको 2024 में इन नेताओं को सबक सिखाना है। हमें भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) जैसी पार्टी की जरूरत है। अबकी बार किसान सरकार का नारा लगाने की जरूरत है। यह अनुरोध भारत राष्ट्र समिति (बी आरएस) शिरूर-हवेली विधानसभा मतदार संघ के समन्वयक अतुल येवले ने की है।

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