संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दवा उत्पादक देश है। भारत दवाओं के सबसे सस्ते आपूर्तिकर्ता के रूप में जाना जा रहा है। पश्चिमी देशों में डॉक्टर मरीज़ों का निदान करते हैं और फार्मासिस्ट उन्हें उस बीमारी से उबरने के लिए दवाएँ देते हैं, हमारे भारत में ऐसी स्थिति नहीं है। भारत में फार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में काफी संशोधन चल रहा है।
पहले मास्टर डिग्री करने का समय नहीं था, लेकिन नौकरी के बदलते अवसरों और भविष्य में आनेवाली नई नौकरियों के कारण मास्टर डिग्री के साथ-साथ पीएचडी करने वालों की संख्या भी बढ़ रही है। पिछले दो दशकों में फार्मेसी करके मेडिकल शॉप शुरू करने का जो ट्रेंड था वो अब बदल रहा है। फार्मेसी क्षेत्र में नए सॉफ्टवेयर विकास हो रहे हैं, इसलिए आईटी सेक्टर की नामी कंपनियां भी अब फार्मा सेक्टर की ओर अपने कदम बढ़ा रही हैं। भारत में अब पुरानी बीमारियों और दवाओं पर सफल संशोधन शुरू है। फार्मेसी डिप्लोमा या डिग्री प्राप्त करने के बाद मेडिकल दुकान शुरू करने की अवधारणा गायब हो रही है। नया फार्म.डी. यह कोर्स कुछ वर्षों से भारत में भी शुरू किया गया है। फार्मेसी में भी कैरियर के ढेरों अवसर उपलब्ध हैं। फार्मास्युटिकल के साथ-साथ केमिकल कंपनियों में फार्मेसी की शिक्षा पूरी कर चुके युवाओं की भारी मांग है।
भारत वर्तमान में दुनिया के 80 से अधिक देशों को दवाएं निर्यात करता है। साथ ही ताजा आंकड़ों के मुताबिक फार्मा सेक्टर में निर्यात की कीमत 1.83 लाख करोड़ रुपये है। भारत उत्पादन के मामले में विश्वस्तर पर तीसरे स्थान पर और मूल्य के मामले में 14 वें स्थान पर है। भारत वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। जो अधिकांश कंपनियों को दवा के अपने जेनेरिक संस्करण का विपणन करने में सक्षम बनाता है। वैश्विक आपूर्ति में भारत की हिस्सेदारी 20% है और भारत विश्व स्तर पर टीकों का अग्रणी उत्पादक है। भारत का घरेलू फार्मास्युटिकल बाजार 2021 में 42 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने की सूचना है और 2030 तक इसके बढ़कर 120 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
नई उभरती बीमारियाँ और उनकी दवाएँ फार्मेसी के क्षेत्र में रोजगार के कई अवसर पैदा कर रही हैं। जैसे कि क्लिनिकल रिसर्च, आईटी कंपनियां, क्लिनिकल ट्रायल जैसे नए क्षेत्र खुल गए हैं। फार्मास्युटिकल कंपनियों को लगातार महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रत्येक उद्योग को आपूर्ति श्रृंखला संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बड़ी मात्रा में डेटा एकत्र करना और उसका विश्लेषण करना होता है। स्थिर मूल्य निर्धारण और नीतिगत माहौल की कमी का सामना करना पड़ता है। गुणवत्तापूर्ण उपकरणों में निवेश करने से हम इन बाधाओं को दूर कर सकते हैं। पूरी दुनिया में नकली दवाओं की समस्या विकराल होती जा रही है।
नकली दवाओं के खिलाफ लड़ाई में डिजिटल तकनीक का महत्वपूर्ण प्रभाव है। आज की दुनिया बड़े डेटा से संचालित है। आंतरिक प्रतिस्पर्धा के अलावा, दवा उद्योग को बाहरी खतरों का भी सामना करना पड़ता है।
एप्पल और आईबीएम जैसी बहुत बड़े टेक दिग्गज हेल्थकेयर उद्योग में उच्च तकनीक उपकरणों और ऑनलाइन स्वास्थ्य समुदायों के साथ स्वास्थ्य सेवा उद्योग में प्रवेश कर रहे हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में स्वास्थ्य डेटा में प्रवेश मिलता है। परिणामी फार्मास्युटिकल कंपनीयों ने प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकियों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।
यदि उम्मीदवार फार्मास्युटिकल उद्योग में कुछ नए बदलाव करने की योजना बना रहे हैं, तो इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे बेहतर पैकेज पाने के पात्र होंगे। डिजिटल थेरपीटिक्स, डिजिटल थेरेप्यूटिक्स साक्ष्य-आधारित सॉफ़्टवेयर और डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके रोगियों को उपचार प्रदान करता है। डिजिटल प्रशिक्षण फार्मास्युटिकल कार्यबल को नवीनतम उपलब्ध नवाचारों से परिचित कराता है। इसमें, उदाहरण के लिए, दवाओं के प्रशासन पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर या इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ बनाए रखने के लिए सॉफ़्टवेयर शामिल है।
परिशुद्ध चिकित्सा स्वास्थ्य देखभाल में एक नया कदम है। यह जीन और रोगी की जीवनशैली का अध्ययन करके रोगों के निदान, उपचार और रोकथाम के लिए एक अभिनव दृष्टिकोण प्रदान करता है। ब्लॉकचेन तकनीक फार्मास्युटिकल उद्योग को कई तरह से मदद कर सकती है। सबसे पहले इस नवाचार ने दवाओं के कुशल उत्पादन और वितरण को स्थापित करना संभव बना दिया है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता तेजी से प्रमुख होती जा रही है।
फार्मेसी के क्षेत्र में स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। प्रासंगिक अनुभव प्राप्त करने के बाद कोई व्यक्ति अपनी दवा की दुकान, फार्मास्युटिकल कंपनी खोल सकता है और दवा के थोक विक्रेता के रूप में भी काम कर सकता है, लेकिन अब शिक्षा के साथ दवा की दुकान शुरू करने की अवधारणा पिछले दो दशकों से पीछे छूट गई है और इसमें आमूल-चूल बदलाव आ गया है। जैसे कि प्रेस्क्रिपशन यह डिजिटल स्वरूप में प्राप्त होकर उस पर सूचना देना, लेबल लगाना ये चीजें स्वचालित होती जा रही हैं। हेल्थकेयर प्रोफेशनल जैसे कि डॉक्टर और फार्मासिस्ट उनका सहयोग यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि मरीज़ अपनी दवाएँ लिखकर दिए गए निर्धारित अनुसार उचित रूप से लेते हैं और किसी भी हानिकारक प्रभाव से बचते हैं। फार्मास्युटिकल उद्योग में तीव्र विकास स्वास्थ्य देखभाल और दवाओं में एक सकारात्मक पहलू ला रहा है। साथ ही इस उद्योग में रोजगार के अवसर भी अधिक हैं। नौकरी के अवसरों के अलावा वे उद्योग और अनुसंधान में उन्नति के बेहतर अवसर प्रदान करते हैं।
प्रतिष्ठित कॉलेजों से पाठ्यक्रम पूरा करने पर अनुभव और प्रशिक्षण के साथ-साथ अच्छे पैकेज भी मिल सकते हैं। इस क्षेत्र में योग्यता हासिल करने से विभिन्न प्रकार की नौकरी की भूमिकाएँ प्राप्त हो सकती हैं, जो आमतौर पर अच्छी व्यावसायिक उन्नति देता है। वैकल्पिक रूप से फार्मासिस्ट बनने के लिए, आप एक शोध वैज्ञानिक के रूप में चिकित्सा के अपने ज्ञान का उपयोग अन्य व्यवसायों में कर सकते हैं, चिकित्सा विज्ञान संपर्क, फार्मेसिस्ट बनने के लिए हो सकता है। इस संदर्भ में यह उल्लेख करना समीचीन है कि फार्मसी प्रथम श्रेणी कमाई की संभावना प्रदान करती है और लगातार सबसे विश्वसनीय माना जाता है।

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