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वेस्ट टू एनर्जी परियोजना के माध्यम से प्रतिदिन 12 मेगावाट का विद्युत उत्पादन

पिंपरी, अक्टूबर (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका की ओर से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रतिदिन 700 टन क्षमता की परियोजना से 12 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है और अगले कुछ दिनों में यह परियोजना पूरी क्षमता से कार्यान्वित हो जायेगी। इससे 14 मेगावाट बिजली विद्युत उत्पादन किया जाएगा। यह जानकारी आयुक्त शेखर सिंह ने दी है।
आयुक्त शेखर सिंह ने कहा कि इस परियोजना के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निपटान के साथ-साथ पर्यावरणीय समस्याओं को हल करने का उद्देश्य प्राप्त किया जा रहा है और यह परियोजना महानगरपालिका की लागत में बचत करनेवाली साबित हो रही है।
पिंपरी चिंचवड़ शहर में उत्पन्न होनेवाले दैनंदिन लगभग 1 हजार 150 मीट्रिक टन कचरे पर मोशी में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र में संसाधित किया जाता है। इसमें से 700 मीट्रिक टन कचरे से 14 मेगावाट बिजली निर्माण करना यह वेस्ट टू एनर्जी यानी कचरे से ऊर्जा बनाने की परियोजना का उद्देश्य है। यह परियोजना डीबीओटी सिद्धांत पर सार्वजनिक निजी भागीदारी के तहत विकसित की गई है और उनके माध्यम से 21 वर्षों की अवधि के लिए चलाई जाएगी।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विनियम 2016 के अनुपालन में इस परियोजना का निर्माण किया गया है और कार्बन उत्सर्जन की निगरानी के लिए कार्बन उत्सर्जन निरिक्षण प्रणाली का उपयोग किया गया है। इस परियोजना से हर साल करीब 7 लाख टन कार्बन उत्सर्जन रोका जा सकेगा। 
अपशिष्ट से बिजली निर्मिती परियोजना को चलाने के लिए लगभग 2 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होती है व शेष बिजली ओपन ऍक्सेस पद्धति से महानगरपालिका के वॉटर ट्रीटमेंट प्लान्ट और सीवेज उपचार संयंत्रों के लिए उपयोग किया जा रहा है। इस परियोजना को शहर में एकत्र किए गए कचरे के गुणधर्म को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है और कचरे को पूरी क्षमता से जलाने के लिए मूविंग ग्रेट का उपयोग किया गया है। 
कचरे से बिजली बनाने की परियोजना के बारे में बोलते हुए आयुक्त शेखर सिंह ने कहा कि इस परियोजना के आधार पर न केवल कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जा रहा है, बल्कि इससे महानगरपालिका के बिजली बिल में भी काफी बचत हो रही है। यह परियोजना भारत सरकार की ग्रीन ओपन एक्सेस नीति के अनुरूप भी है। शहर को अभिनव मामलों में आगे ले जाने के लिए महानगरपालिका प्रतिबद्ध है।
कचरे से बिजली बनाने की परियोजना के लिए चिखली में सीवेज उपचार संयंत्र में 5 एमएलडी पानी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे पीने के पानी की भी बचत हो रही है। महानगरपालिका की यह महत्वाकांक्षी परियोजना क्रियान्वित हो चुकी है और इससे कूड़ा डंप करने के लिए अधिक जगह की जरूरत नहीं रह गयी है। इसके अलावा महानगरपालिका के बिजली बिल में भी बचत हो रही है। 
ग्रिड सिंक्रोनाइजेशन के साथ बिजली निर्मिती परियोजना की मदद से 17 अक्टूबर तक कुल 22.88 लाख यूनिट बिजली निर्मिती की गई है। महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने 6 अक्टूबर को प्लांट कमीशनिंग प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया है।

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