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सहकारी गृहनिर्माण संस्थाएं मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं : मुख्य कार्यकारी अधिकारी निलेश गटणे

पुणे, अक्टूबर (जिमाका)
सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं ने मानवीय दृष्टिकोण को अपनाना चाहिए। यह अपील गृहनिर्माण सहकारी संस्था पदाधिकारी, संचालक व सभासदों के लिए आयोजित कार्यशाला के अवसर पर झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निलेश गटणे ने की। 
महाराष्ट्र राज्य सहकारी संघ और पुणे व पिंपरी-चिंचवड झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण द्वारा संयुक्त रूप से कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर झोपड़पट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण के सहायक निबंधक सहकारी संस्था पी. टी. घुगे, महाराष्ट्र राज्य सहकारी संघ के मुख्याधिकारी एस. एस. बोडके, सहकार अधिकारी श्रेणी 1 विशाल दाते, मुख्याधिकारी एम. एल. सरवदे, एम.डी. भोईर, उपमुख्याधिकारी एस. डी. आगरकर, सहकार शिक्षणाधिकारी युवराज भोसले, अजय जाधव, व्याख्याता के. उदय शंकर आदि उपस्थित थे।
श्री गटणे ने कहा कि सहकारी गृहनिर्माण संस्थाओं ने अपने परिसर को साफ-सुथरे रखना चाहिए। संस्था के भवन का बीमा कराना चाहिए ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में मदद मिल सके। संस्था की बिल्डिंग का फायर ऑडिट और 30 साल बाद बिल्डिंग का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाए। संस्था की जगह का हस्तांतरण के बाद यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि यह प्रॉपर्टी कार्ड पर दर्ज है। रखरखाव लागत राशि को संयुक्त नाम पर सावधि जमा के रूप में रखा जाना चाहिए। स्लम पुनर्वास प्राधिकरण के तहत स्थापित हाउसिंग सोसाइटियों में किरायेदारों को समायोजित नहीं किया जाना चाहिए।
व्याख्याता के. उदय शंकर ने सदस्य, निदेशक के अधिकार और जिम्मेदारियां, लेखा परीक्षण, सहकारी अधिनियम की धारा 154 बी के प्रावधान, हाउसिंग सोसाइटियों पर लागू विभिन्न कानून, संस्था डीम कन्वेयंस, इमारत पुनर्विकास स्ट्रक्चरल ऑडिट, फायर ऑडिट अन्य विषयों की जानकारी दी।

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