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महाराष्ट्र विधानमंडल और एमआईटी के सहयोग से शासन पर पाठ्यक्रम : विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर

पुणे, अक्टूबर (जिमाका)
एमआईटी विश्वविद्यालय में ‘स्कूल ऑफ गवर्नमेंट’ का विस्तार कर नागपुर, पुणे और मुंबई में एमआईटी विश्वविद्यालय के माध्यम से शासन पद्धति विषयक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। यह पाठ्यक्रम एमआईटी छात्रों के साथ-साथ महाराष्ट्र विधानमंडल के सदस्यों के लिए भी उपयोगी होगा। यह विचार विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर ने किये।
एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय में  ‘मास्टर्स इन पॉलिटीकल लीडरशीप एण्ड गवर्नमेंट’ विषय पर पाठ्यक्रम के 19वें बैच के शुभारंभ पर वे बोल रहे थे। कार्यक्रम में विधानसभा के विरोधी पार्टी नेता विजय वडेट्टीवार, विद्यापीठ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ कराड, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल कराड, विधायक सुनिल टिंगरे, पूर्व सांसद सदस्य सुष्मिता देव, उल्हासदादा पवार, सचिन सावंत, डॉ. के. गिरीसन आदि उपस्थित थे। 
एडवोकेट नार्वेकर ने कहा कि महाराष्ट्र विधानमंडल और एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय को सहयोगी कार्यक्रम लागू करना चाहिए ताकि छात्र विधानमंडल के सदस्यों के साथ प्रशिक्षण कर सकें और विधानमंडल के सदस्यों के लिए विश्वविद्यालय में इस विषय में एक लघु पाठ्यक्रम पूरा करना संभव होगा। इन छात्रों में से देश को गौरवान्वित करेंगे ऐसा वैश्विक नेता बनेगा। यह अपेक्षा व्यक्त करते हुए उन्होंने यह विश्वास भी व्यक्त किया कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों के साथ-साथ समाज के लिए भी उपयोगी होगा।
उन्होंने आगे कहा, देश ने लोकतंत्र की संसदीय प्रणाली को अपनाया है। इस विधि में त्रुटियाँ हो सकती हैं, लेकिन यह सभी शासन प्रणालियों में सर्वश्रेष्ठ है। स्थानीय निकायों के सदस्यों से लेकर संसद सदस्यों तक, सभी पर भविष्य की चुनौतियों की पहचान करने और समाज का मार्गदर्शन करने की एक बड़ी जिम्मेदारी है। इस विषय का अध्ययन करते समय छात्रों को एक निश्चित दृष्टिकोण रखने की आवश्यकता होती है। अपने देश को विश्व का एक समृद्ध एवं खुशहाल देश बनाने के लिए प्रयासों की आवश्यकता है। स्वयं में नेतृत्व के गुण विकसित करके ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना संभव है। केवल चर्चा किये जाने वाले मुद्दों पर ध्यान न देकर उन बुनियादी मुद्दों पर विशेष ध्यान देना होगा जो समाज में अनुकूल परिवर्तन लाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। एमआईटी के सहयोग से नागपुर, पुणे और मुंबई में शासन पद्धति विषयक पाठ्यक्रम किए जाएंगे।
श्री वडेट्टीवार ने कहा आने वाले समय में अच्छे लोगों को राजनीति में महत्व मिलेगा, इसलिए छात्रों को सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए। मतभेदों पर आधारित राजनीति करने के बजाय जाति, पंथ, धर्म को भूलकर लोगों को लोगों से जोड़ने वाली राजनीति करें। संतों और महापुरुषों की जीवनियों का अध्ययन करने के साथ इस क्षेत्र में जीवित रहने के लिए साहस और दृढ़ता की आवश्यकता होती है। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद ये छात्र अपने क्षेत्र के नागरिकों को न्याय दिलाने और देश को आगे बढ़ाने के लिए काम करेंगे तो छात्र अच्छे नेतृत्व का निर्माण करेंगे। बलशाली भारत के निर्माण में नए शुरू किए गए पाठ्यक्रम का अच्छा योगदान रहेगा। 
डॉ. विश्वनाथ कराड ने कहा कि शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सतर्क, जानकार और आध्यात्मिक रूप से जागरूक रहनेवाला एक व्यक्ति अच्छा नेता बन सकता है। सिर्फ राजनीति में आने से नेतृत्व नहीं होता तो सकारात्मक सोच वाला एक सामाजिक कार्यकर्ता भी एक अच्छा नेता बन सकता है। देश और विश्व एक परिवार है, यह समझकर कार्य करना प्रत्येक नेतृत्व का कर्तव्य है। 
श्रीमती देव, श्री सावंत, डॉ. राहुल कराड, डॉ. के. गिरीसन ने भी अपने विचार इस अवसर पर व्यक्त किए। साथ ही विद्यार्थियों ने प्रतिनिधि के स्वरुप में अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट नार्वेकर के शुभ हाथों डॉ.राहुल कराड का अभिनंदन किया गया। साथ ही ‘एमआईटी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट’ की वार्षिक रिपोर्ट का गणमान्य व्यक्तियों द्वारा प्रकाशन किया गया।

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