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किसान की उत्पादन लागत कम करने का प्रयास करें : कृषि मंत्री धनंजय मुंडे

राज्यस्तरीय रबी पूर्व मौसम समीक्षा बैठक कृषि मंत्री की अध्यक्षता में संपन्न
पुणे, अक्टूबर (जिमाका)
किसान की उत्पादन लागत कम करने के लिए कृषि यंत्रीकरण का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए। कर्ज, नापिकी आदि के कारण किसानों की आत्महत्या नहीं होगी, इसके लिए किसानों की मदद के लिए कृषि विभाग को अधिक प्रयास करने चाहिए। यह निर्देश कृषि मंत्री धनंजय मुंडे ने दिए। 
कृषि मंत्री श्री मुंडे की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय रबी पूर्व मौसम समीक्षा बैठक 2023-24 साखर संकुल में आयोजित की गई। इस अवसर पर यहां कृषि विभाग के अपर मुख्य सचिव अनूप कुमार, कृषि आयुक्त सुनील चव्हाण, सहकार आयुक्त अनिल कवडे, कृषि विभाग के सहसचिव गणेश पाटिल, महाराष्ट्र कृषि शिक्षा व अनुसंधान परिषद के महासंचालक रावसाहब भागडे, स्मार्ट प्रकल्प के संचालक कौस्तुभ दिवेगावकर, महाबीज के व्यवस्थापकीय संचालक सचिन कलंत्रे, महाराष्ट्र राज्य कृषि उद्योग विकास महामंडल के व्यवस्थापकीय संचालक डॉ. मंगेश गोंदवले के साथ सभी कृषि संचालक आदि उपस्थित थे। 
मंत्री श्री मुंडे ने कहा कि महाराष्ट्र एक समय अनाज और दालों का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य था। आज हम इसमें पिछड़ गए हैं और ज्वार, बाजरा और दालों जैसे अनाजों का महत्व आज महसूस हो रहा है, इसलिए किसानों को इन फसलों के लिए प्रोत्साहित करना होगा। रबी मौसम के दौरान उत्पादन में वृद्धि हो इस हेतु अधिकारियों को आत्मविश्वास के साथ काम करना चाहिए। 
इस वर्ष कुछ हिस्सों में बांधों में जल भंडारण की स्थिति गंभीर रहने से ग्रीष्मकालीन संशोधन देना कठिन है। अतः इस क्षेत्र को रबी फसलों एवं चारा फसलों के उत्पादन की ओर मोड़ने का प्रयास किया जाना चाहिए। कुसुम, अलसी, तिल, सरसों, पीली ज्वार और दालों जैसे कम खेतीवाले अनाजों की खेती को प्रोत्साहित करके किसानों को इन फसलों के लिए अच्छे दामों की गारंटी दी जानी चाहिए। यह निर्देश कृषि मंत्री श्री मुंडे द्वारा दिए गए।
उन्होंने कहा कि राज्य के थोक उत्पादों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए कृषि निगम को उनकी ब्रांडिंग कर एक ऑनलाइन प्लेटफार्म उपलब्ध कराना चाहिए तथा अमेज़न जैसे ई-बिजनेस प्लेटफार्म के साथ गठजोड़ करना चाहिए।
कृषि मंत्री ने कहा कि इस अवसर पर संयुक्त कृषि निदेशक ने विभागवार रबी की बुआई, पानी की स्थिति, बीज की उपलब्धता, उर्वरक की उपलब्धता की समीक्षा की। उर्वरकों की लिंकिंग न हो इस बात का ध्यान रखा जाए। राज्य के सभी स्थानों की फसल उत्पादन, लागत, खाद की उपलब्धता आदि प्रतिदिन अद्यतन होकर डैशबोर्ड पर प्रदर्शित होती रहे, ऐसी यंत्रणा बनाई जाए। इस समय उन्होंने कृषि यांत्रिकीकरण योजना की भी समीक्षा की। 
मशीनीकरण के तहत राष्ट्रीय कृषि विकास योजना उपअभियान का कम से कम 75 प्रतिशत राशि वितरण का लक्ष्य 2 सप्ताह के अंदर हासिल किया जाये और अगले चरण की मांग केंद्र सरकार से की जाए। 
बड़े ट्रैक्टर जैसी मशीन के बिना कम लागत पर नवीन उपकरण बनानेवालों के प्रयोगों को देखकर ऐसे उपकरण उपलब्ध कराए जा सकते हैं क्या यह भी देखने का प्रयास किया जाना चाहिए। 
अपर मुख्य सचिव अनूप कुमार ने कहा कि किसानों को मिलनेवाला दाम और उपभोक्ता को प्रत्यक्ष मिलनेवाली वास्तविक कीमत के बीच बहुत बड़ा अंतर है, इसे बदलने के लिए मूल्य श्रृंखला विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना के साथ-साथ स्मार्ट प्रकल्प में भी इन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
कृषि आयुक्त सुनील चव्हाण ने प्रस्तुतिकरण करके कहा कि रबी फसलों के औसत 53 लाख 98 हजार हेक्टेयर की तुलना में इस वर्ष खेती का लक्ष्य 58 लाख 76 हजार खेती का लक्ष्य प्रति हेक्टेयर है। ज्वार का क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर, गेहूं का 10 लाख हेक्टेयर, मक्का का 5 लाख हेक्टेयर, चना का 21 लाख 52 हजार हेक्टेयर, दलहन का 87 हजार हेक्टेयर खेती का उद्देश्य है।
रबी ज्वार बीज मिनी किट 200 ग्राम से 2 किलोग्राम तक के 3 लाख 30 हजार किटों के प्रभावी वितरण से ज्वार बुआई को प्रोत्साहन मिला है।
सहकार आयुक्त अनिल कवडे ने रबी मौसम में फसल ऋण वितरण की जानकारी दी। रबी मौसम में 20,782 करोड़ रुपये ऋण वितरण लक्ष्य है, इसे दिसंबर तक हासिल कर लिया जाएगा। 
बैठक में कृषि विद्यापीठ के अनुसंधान संचालक, सभी विभागीय कृषि सहसंचालक, जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी, आत्मा के प्रकल्प संचालक, जिला कृषि विकास अधिकारी आदि उपस्थित थे।

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