मुख्य समाचार

6/recent/ticker-posts

महाराष्ट्र में कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण : अपर मुख्य सचिव विकासचंद्र रस्तोगी

मुंबई, जनवरी (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
महाराष्ट्र की कृषि में महिलाओं का योगदान अत्यंत मूल्यवान है। महिला किसानों के लिए राज्य सरकार विभिन्न योजनाएँ और पहलें लागू कर रही है। टिकाऊ कृषि के लिए कृषि विभाग द्वारा अनेक उपाय किए जा रहे हैं। एम.एस. स्वामिनाथन रिसर्च फाउंडेशन कृषि विभाग के साथ मिलकर महिला किसानों के विकास के लिए कार्य कर रहा है, यह बात अपर मुख्य सचिव विकासचंद्र रस्तोगी ने कही।
महाराष्ट्र सरकार के कृषि विभाग और एम.एस. स्वामिनाथन रिसर्च फाउंडेशन (एमएसएसआरएफ) के संयुक्त तत्वावधान में सह्याद्री अतिथि गृह में महिला किसानों से जुड़े विभिन्न विषयों पर एक विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। 
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव विकासचंद्र रस्तोगी बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में एम.एस. स्वामिनाथन रिसर्च फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. सौम्या स्वामिनाथन, महिला किसान प्रतिनिधि, राज्य के विभिन्न हिस्सों में महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर कार्य करने वाली स्वयंसेवी संस्थाएँ, पशुसंवर्धन, दुग्ध व्यवसाय एवं मत्स्य व्यवसाय विभाग के सचिव एन. रामास्वामी, सहकार एवं विपणन विभाग के प्रधान सचिव प्रवीण दराडे, कृषि आयुक्त सूरज मांढरे, नानाजी देशमुख कृषि संजीवनी परियोजना के परियोजना संचालक परिमल सिंह, महाराष्ट्र कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान परिषद की महासंचालक वर्षा लड्डा, एकीकृत बाल विकास सेवा आयुक्त कैलास पगारे, उमेद-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी निलेश सागर, मुख्यमंत्री कार्यालय की विशेष कार्यकारी अधिकारी प्रिया खान, विधि एवं न्याय विभाग के संयुक्त सचिव मकरंद कुलकर्णी तथा महिला किसान अधिकार मंच की सीमा कुलकर्णी ने अपने विचार व्यक्त किए।
अपर मुख्य सचिव विकासचंद्र रस्तोगी ने कहा कि पिछले वर्ष भारत रत्न डॉ. प्रो. एम.एस. स्वामिनाथन की जन्मशताब्दी के अवसर पर कृषि विभाग ने उनके जन्मदिवस को ‘सतत कृषि दिवस’ के रूप में घोषित किया। सतत कृषि, पोषण सुरक्षा तथा कृषि कार्यों में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एम.एस. स्वामिनाथन रिसर्च फाउंडेशन के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है, जिसके माध्यम से कार्य किया जा रहा है।
डॉ. सौम्या स्वामिनाथन ने कहा, महिला किसानों की भूमिका को सशक्त बनाने के प्रयासों को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का सकारात्मक समर्थन प्राप्त है। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि के   सामने उत्पन्न चुनौतियाँ और संरचनात्मक बाधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बीड की द्वारकाताई वाघमारे, धाराशिव जिले के तुलजापुर की वैशाली घुगे और पुणे जिले के मावल तालुका की शांताबाई वारवे सहित महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से आई महिला किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने   दैनिक कृषि कार्यों में आने वाली समस्याओं और सरकार द्वारा किए जाने वाले उपायों पर अपने विचार रखे। विदी लीगल सेंटर और एम.एस. स्वामिनाथन रिसर्च फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में महिला किसानों की स्थानीय स्तर की चुनौतियों तथा संभावित नीतिगत और कार्यक्रमात्मक उपायों पर चर्चा की गई। महिला किसानों का एक समग्र डेटाबेस तैयार करने के विषय पर भी विचार-विमर्श हुआ।
मोटे अनाज की खेती के संवर्धन, चुनौतियाँ, आवश्यकताएँ और भविष्य की संभावनाओं पर विशेषज्ञों का मार्गदर्शन    
एम.एस. स्वामिनाथन रिसर्च फाउंडेशन के जैव विविधता निदेशक डॉ. ई. डी. इस्राइल ऑलिवर किंग ने मोटे अनाज की फसलों के सामने प्रमुख चुनौतियों, आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं पर प्रस्तुति दी। इसके बाद महिला किसानों के प्रत्यक्ष अनुभव सुने गए, जिनमें कृषि की वास्तविक समस्याएँ, पहचान, बाजार तक पहुँच और संसाधनों की उपलब्धता जैसे विषयों पर उन्होंने अपने विचार रखे।
ओडिशा मिलेट मिशन के अनुभवों की प्रस्तुति के माध्यम से यह बताया गया कि राज्य स्तरीय मिलेट कार्यक्रमों को किस प्रकार सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है। इसमें राज्य की विस्तार प्रणाली की भूमिका और अवसरों को स्पष्ट किया गया।
महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ, राहुरी अंतर्गत एनएआरपी, कोल्हापुर के सहयोगी अनुसंधान निदेशक डॉ. सुनील कराड, वसंतराव नाइक मराठवाड़ा कृषि विद्यापीठ, परभणी के एनएआरपी के सहयोगी अनुसंधान निदेशक डॉ. एस. जी. पवार तथा मुंबई पशु चिकित्सा महाविद्यालय के सहयोगी अधिष्ठाता डॉ. आर. एस. इंगोले ने अनुसंधान, बीज विकास और क्षेत्रीय क्रियान्वयन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के मिलेट क्षेत्र के अनुभवों पर भी प्रकाश डाला गया। आईआईएमआर, हैदराबाद की निदेशक डॉ. तारा सत्यवती और बाजरा प्रजनक डॉ. पी. संजना रेड्डी ने बाजरा अनुसंधान, उन्नत किस्मों और नीतिगत हस्तक्षेपों पर जानकारी दी। आईसीआरआईएसएटी, हैदराबाद के जीन बैंक के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वेत्रिवेंद्रन मणि ने जैव विविधता संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया। ओडिशा मिलेट मिशन के पूर्व अधिकारी दिनेश बालम ने ओडिशा में मिलेट आंदोलन के अनुभव साझा किए।
इस विचार-विमर्श से महाराष्ट्र में मोटे अनाज पर आधारित समाधान प्रणाली विकसित करने के लिए ठोस दिशा मिलेगी, ऐसी आशा व्यक्त की गई।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ