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राष्ट्रीय युद्ध स्मारक दक्षिणी कमान : असाधारण योद्धाओं की बहादुरी और बलिदान का प्रतीक

 
कैंटोन्मेंट परिसर में दक्षिण कमांड युद्ध स्मारक संग्रहालय को हाल ही में भेंट देकर संग्रहालय का निरीक्षण किया। तब हमारी सेना की शानदार गौरव गाथा सुनकर मैं हैरान होने के बजाय गर्व से भर गया। गौरव गाथा को देखकर मेरा सीना हैरानी से नहीं बल्कि गर्व से चौड़ा हो गया। यहां का संग्रहालय कमांड के स्थापना होने से लेकर अब तक के इतिहास को उजागर करता है। इस संग्रहालय में चित्रित किया गया इतिहास सदर्न कमांड के तहत आनेवाले महाराष्ट्र, दक्षिण भारत व राजस्थान के असाधारण  द्धाओं की बहादुरी एवं बलिदान की गाथा है। इस संग्रहालय में सन् 1000 ईस्वी से लेकर आज तक के दक्षिणी कमांड के इतिहास और इसमें अपनी जान कुर्बान करनेवाले शहीद सैनिकों को दिखाता है। 
इस संग्रहालय में दिखाई गई तस्वीरें, शिल्प, युद्ध दस्तावेज़, शिल्प, अर्धप्रतिमा और तैलचित्र इस सुनहरे इतिहास की झलक दिखाती हैं। इसके अलावा, संग्रहालय में पेंटबॉल रेंज पर्यटकों के लिए विद्रोहियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशन का सीधा अनुभव देता है। संग्रहालय में भारत ने दुश्मनों से हस्तगत किए गए टैंक भी प्रदर्शित किए गए हैं। युद्ध में जीते गए टैंक, बंदूकें और हवाई जहाज साथ ही हमारे सैनिकों द्वारा इस्तेमाल की गई बंदूकें और उनका शानदार इतिहास देखकर, सेना की उपलब्धियों का शानदार इतिहास सामने आया।
यहां, मिग-23 हवाई जहाज ने 27 साल तक देश की अच्छी सेवा की है और भारतीय आसमान में 154,000 घंटे से ज़्यादा उड़ान भरी है। कहा जाता है कि देश इस हवाई जहाज को सलाम करता है, जो हमारी मातृभूमि की रक्षा करते हुए दुश्मन के मन में डर पैदा करता है,  इस विमान को देश सलाम करता है। यह भी उल्लेखित करना चाहता हूं।
श्री सुधीर मेथेकर 
(वरिष्ठ लेखक)


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