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ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ फार्मसी में ‘प्राध्यापक विकास कार्यक्रम’ का आयोजन

Trinity College of Pharmacy


विशेषज्ञों ने शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धति अनुसंधान पर दिया मार्गदर्शन

कोंढवा, फरवरी (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
श्री. कल्याणराव जाधव शैक्षणिक संकुल के 'ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ फार्मसी' महाविद्यालय की ओर से 12 से 14 फरवरी 2026 के दौरान तीन दिवसीय "प्राध्यापक विकास कार्यक्रम" आयोजित किया गया था। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संजय चौधरी और प्रमुख अतिथि डॉ. सतीश पोलशेट्टीवार, डॉ. निरंजन चिवटे व पूजा सूर्यवंशी के शुभ हाथों से सरस्वती पूजन करके कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

दवाई विकास विनियमन और शिक्षा का विकास अधिक बार खतरनाक तरीकों से आधुनिक साक्ष्यों के आधार पर प्रणाली की ओर संक्रमण करने के लिए महत्वपूर्ण है।जो सुरक्षित, प्रभावी और सुलभ दवाओं को सुनिश्चित करता है। ऐसी राय ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ फार्मसी के प्राचार्य डॉ. संजय चौधरी ने व्यक्त की।

प्रमुख अतिथि डॉ.सतीश पोलशेट्टीवार ने विकास कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत नैदानिक परीक्षण, डिज़ाइन व वैश्विक सामंजस्य संयोजन करके यह कैसे किया जा सकता है। इस पर मार्गदर्शन किया।

डॉ.निरंजन चिवटे ने अध्यापकों के लिए  जनरेशन झेड मानसिकता को समझकर लेना बेहद जरूरी है क्योंकि यह पीढ़ी सबसे पहले कम ध्यान देने की अवधि के साथ डिजिटल नेटिव्ह है। ईमानदारी, दृश्य सामग्री और तत्काल प्रतिक्रिया को महत्व देते है। ऐसा भी उन्होंने कहा।

पूजा सूर्यवंशी ने मार्गदर्शन करते हुए कहा कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता और प्रभावी संचार यह  शिक्षण में पेशेवर बेहतरीन होने के कुछ बुनियादी तत्व हैं। हालांकि विषय का कौशल महत्वपूर्ण होनेपर भी भावनाओं को समझने के लिए, प्रबंधन करना और रचनात्मक रूप से अभिव्यक्त करने की क्षमता अध्यापकों के लिए सुरक्षित, मददगार और सीखने का एक दिलचस्प माहौल बनता है।

कार्यक्रम के दूसरे दिन, व्यक्तिगत कुशल और आसान सीखना तैयारी करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजन्स (एआय) द्वारा पढ़ाने और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को आगे बढ़ाना बहुत ज़रूरी है। यह राय डॉ. रेमेथ ने व्यक्त की।

डॉ. रमेश सावंत ने सिलिको पद्धति द्वारा आशाजनक दवा उम्मीदवारों की पहचान गति बढ़ाकर दवा अनुसंधान का समय एवं उच्च लागत को कम करने के लिए कंप्यूटर सहायता प्राप्त दवा डिजाइन और खोज जरूरी है,इससे सफलता की दर बढ़ जाती है,बेहतर असर के लिए आणविक आपसी समाधान अनुकूलित करता है।

डॉ.आत्माराम पवार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के माध्यम से अनिवार्य करने से भारत में स्वास्थ्य विज्ञान शिक्षा का प्रभाव 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार स्वास्थ्य सेवा कर्मी को तैयार करने के उद्देश्य से सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक क्षमताओं में कमी को पूरा करना ज़रूरी है।

कार्यक्रम के तीसरे दिन डॉ. मुकेश शिंदे ने दवा की खोज और विकास का 'एआय' पर असर पर एक व्याख्यान दिया।उद्योग के लिए विनियामक आवश्यकताएँ और लंबी दवा विकास प्रक्रियाओं के बारे में जुड़ी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।कृत्रिम बुद्धिमत्ता इनसे निपटने में अहम भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक श्री. कल्याणराव जाधव, संस्था सचिव समीर कल्ला, अध्यक्ष श्री. विनोद जाधव, प्रबंध निदेशक हर्षदा जाधव, विभावरी देशमुख, छात्र विकास और कल्याण के अधिष्ठाता डॉ. हेमंत देशमुख, तकनीकी निदेशक डॉ. अजय फुलंबरकर ने भी प्राध्यापकों को मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम के समन्वयक की जिम्मेदारी प्रा. रुची शर्मा ने निभाई। प्रा डॉ. दिलनवाज पठाण, डॉ. भूषण फिरके, डॉ. नालंदा बोरकर, प्रा. प्राची पवार और सभी प्राध्यापकों के सहयोग से कार्यक्रम का समापन हुआ।

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