दुनिया के 50 से अधिक देशों में मराठी के प्रचार-प्रसार का संकल्प; लंदन में बनेगा ‘छत्रपति शिवाजी महाराज वैश्विक मराठी केंद्र’
मराठी केवल महाराष्ट्र की पहचान नहीं, बल्कि हमारा स्वाभिमान है। संत ज्ञानेश्वर से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज तक की समृद्ध परंपरा से जुड़ी मराठी भाषा अब देश की सीमाओं से आगे बढ़कर दुनिया के कई हिस्सों में पहुंच चुकी है। आने वाले समय में मराठी का वैश्विक विस्तार और तेज हो, इसके लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है। यह बात महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कही।
उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में मराठी को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए सोशल मीडिया, पॉडकास्ट, गेमिंग और कोडिंग जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी मराठी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि दुनिया के 50 से अधिक देशों में मराठी भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।
लंदन में बनेगा वैश्विक मराठी केंद्र
एकनाथ शिंदे ने बताया कि लंदन में करीब 70 से 80 हजार मराठी भाषी लोग रहते हैं। वहां महाराष्ट्र मंडल के माध्यम से मराठी भाषा की शिक्षा, पाठ्यक्रम और प्रमाणपत्र परीक्षाओं जैसे विभिन्न उपक्रम चलाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लंदन में ‘छत्रपति शिवाजी महाराज वैश्विक मराठी केंद्र’ स्थापित करने की दिशा में भी काम शुरू है। इसके लिए महाराष्ट्र मंडल की एक इमारत खरीदी गई है। इसी के साथ उन्होंने घोषणा की कि अगला विश्व मराठी साहित्य सम्मेलन लंदन में आयोजित किया जाएगा।
मराठी किताबों को उपहार देने की अपील
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने मराठी में पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने लोगों से अपील की कि जन्मदिन, सम्मान समारोह या अन्य खुशी के अवसरों पर फूलों का गुलदस्ता देने के बजाय मराठी की किताबें उपहार में देने की परंपरा शुरू की जाए।
उन्होंने कहा कि मराठी भाषा नीति के साथ-साथ ‘पुस्तकों का गांव’ और ‘कविता का गांव’ जैसे विभिन्न उपक्रमों के माध्यम से मराठी भाषा और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है।
शिंदे ने कहा कि मराठी की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और वैश्विक मंचों पर भी मराठी की मौजूदगी बढ़ाना जरूरी है।
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