पुणे, अप्रैल (ह.ए. प्रतिनिधि)
पुणे जिले के जिला सूचना अधिकारी पद पर कार्यरत प्रथम श्रेणी के अधिकारी राजेंद्र सरग कर्तव्य पथ पर अपनी सेवाएं देते हुए कोरोना वायरस से फ्रंट लाइन पर जंग लड़ते हुए शनिवार की सुबह शहीद हो गए। अभी कुछ दिनों पहले ही उन्हें कोरोना संक्रमण की शिकायत हुई थी जिसके बाद उन्हें होम आइसोलेट होने की सलाह दी गई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद जब उन्हें अस्पताल की आवश्यकता हुई तो उन्हें शहर के किसी भी अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं हो पाया, जिसके चलते उनके इलाज में विलंब हुआ और कोरोना वायरस संक्रमण ने उनसे उनकी जिंदगी छीन ली। शनिवार की सुबह ससून अस्पताल में कोरोना के कारण उनका दु:खद निधन हो गया। सरग के प्राण बचाने के लिए चिकित्कों ने अंतिम समय तक प्रयत्न किया, परंतु वे सरग को नहीं बचा सके। वे 54 वर्ष के थे। वे अपने पीछे पत्नी, दो बेटों को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं।
वे नाशिक जिले के नांदगांव के निवासी थे। उन्होंने औरंगाबाद में पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की। पत्रकारिता के बाद उन्हें सरकारी नौकरी मिल गई। बीड, परभणी, अहमदनगर और पुणे जिले में जिला सूचना अधिकारी के रूप में काम किया। बहुत ही मिलनसार व्यक्तित्व के धनी अधिकारी वर्ग के साथ-साथ पत्रकारों में बहुत ही लोकप्रिय थे। राजेंद्र सरग को विभिन्न विषयों पर कार्टून बनाने का शौक था। अनेक वर्षों से कुछ दैनिक, साप्ताहिक व दिवाली अंकों में उनके कार्टून प्रसिद्ध हुए थे। बालगंधर्व में उन्होंने व्यंग्यचित्रों की प्रदर्शनी लगाई थी। पिछले सप्ताह उनका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद उनका उपचार शुरू था। ससून अस्पताल के आईसीयू में इलाज शुरू था। अच्छा इलाज हो, इसके लिए पुणे के जिलाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख ने चिकित्सकों को निर्देश दिए थे।
साथ ही उपमुख्यमंत्री कार्यालय, स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय लगातार इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे थे। चिकित्सक भी उन्हें बचाने के लिए जी-जान लगा रहे थे। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे, अन्न व नागरी आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, मदद व पुनर्वसन मंत्री विजय वडेट्टीवार, पूर्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने राजेंद्र सरग के निधन पर दुःख व्यक्त किया है। राजेंद्र सरग के निधन से चारों ओर शोक की लहर फैल गई है। हर कोई उनके निधन से दुखी है।
पुणे जिले के जिला सूचना अधिकारी पद पर कार्यरत प्रथम श्रेणी के अधिकारी राजेंद्र सरग कर्तव्य पथ पर अपनी सेवाएं देते हुए कोरोना वायरस से फ्रंट लाइन पर जंग लड़ते हुए शनिवार की सुबह शहीद हो गए। अभी कुछ दिनों पहले ही उन्हें कोरोना संक्रमण की शिकायत हुई थी जिसके बाद उन्हें होम आइसोलेट होने की सलाह दी गई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद जब उन्हें अस्पताल की आवश्यकता हुई तो उन्हें शहर के किसी भी अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं हो पाया, जिसके चलते उनके इलाज में विलंब हुआ और कोरोना वायरस संक्रमण ने उनसे उनकी जिंदगी छीन ली। शनिवार की सुबह ससून अस्पताल में कोरोना के कारण उनका दु:खद निधन हो गया। सरग के प्राण बचाने के लिए चिकित्कों ने अंतिम समय तक प्रयत्न किया, परंतु वे सरग को नहीं बचा सके। वे 54 वर्ष के थे। वे अपने पीछे पत्नी, दो बेटों को रोता-बिलखता छोड़ गए हैं।
वे नाशिक जिले के नांदगांव के निवासी थे। उन्होंने औरंगाबाद में पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की। पत्रकारिता के बाद उन्हें सरकारी नौकरी मिल गई। बीड, परभणी, अहमदनगर और पुणे जिले में जिला सूचना अधिकारी के रूप में काम किया। बहुत ही मिलनसार व्यक्तित्व के धनी अधिकारी वर्ग के साथ-साथ पत्रकारों में बहुत ही लोकप्रिय थे। राजेंद्र सरग को विभिन्न विषयों पर कार्टून बनाने का शौक था। अनेक वर्षों से कुछ दैनिक, साप्ताहिक व दिवाली अंकों में उनके कार्टून प्रसिद्ध हुए थे। बालगंधर्व में उन्होंने व्यंग्यचित्रों की प्रदर्शनी लगाई थी। पिछले सप्ताह उनका कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद उनका उपचार शुरू था। ससून अस्पताल के आईसीयू में इलाज शुरू था। अच्छा इलाज हो, इसके लिए पुणे के जिलाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख ने चिकित्सकों को निर्देश दिए थे।
साथ ही उपमुख्यमंत्री कार्यालय, स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय लगातार इलाज के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे थे। चिकित्सक भी उन्हें बचाने के लिए जी-जान लगा रहे थे। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे, अन्न व नागरी आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, मदद व पुनर्वसन मंत्री विजय वडेट्टीवार, पूर्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने राजेंद्र सरग के निधन पर दुःख व्यक्त किया है। राजेंद्र सरग के निधन से चारों ओर शोक की लहर फैल गई है। हर कोई उनके निधन से दुखी है।

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