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बुद्ध पूर्णिमा पर हिंदी विवि में ‘वैकल्पिक सभ्यता के लिए धम्म’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

तथागत के उपदेश सार्वभौमिक और सार्वकालिक हैं : प्रो. नीरजा गुप्ता
वर्धा, मई (ह.ए. प्रतिनिधि)

सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय, सांची की कुलपति प्रो. नीरजा गुप्ता ने कहा है कि आज के परिप्रेक्ष्य में तथागत गौतम बुद्ध के उपदेश सार्वभौमिक और सार्वकालिक हैं। हमें पाथेय को व्यवहार में बदलकर कर्म को समाज के लिए उपयोगी बनाना चाहिए। प्रो. गुप्ता बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज (बुधवार, 26 मई)  भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित तथा दर्शन एवं संस्कृति विभाग, डॉ. भदन्त आनन्द कौसल्यायन बौद्ध अध्ययन केन्द्र एवं संस्कृत विभाग, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा  के संयुक्त तत्त्वावधान में वैकल्पिक सभ्यता के लिए धम्म विषय पर आयोजित तरंगाधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर सारस्वत अतिथि संबोधित कर रही थीं। 
संगोष्ठी की अध्यक्षता महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के  कुलपति  प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने की। संगोष्ठी को उद्घाटक के रूप में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलाधिपति प्रो. कमलेशदत्त त्रिपाठी, मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एस. आर. भट्ट, विशिष्ट अतिथि के रूप में भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के अध्यक्ष प्रो. रमेश चन्द्र सिन्हा, सारस्वत अतिथि के रूप में केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा विश्वविद्यालय, सारनाथ, वाराणसी के कुलपति प्रो.नवांग साम्तेन और नव नालंदा महाविहार, विश्वविद्यालय, नालंदा के कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने संबोधित किया।
केंद्रीय उच्च तिब्बती शिक्षा विश्वविद्यालय, सारनाथ, वाराणसी के कुलपति प्रो. नवांग साम्तेन ने कहा कि भारतीय सभ्यता का विकास परस्पर विचार से हुआ है, परंतु आधुनिक सभ्यता के केंद्र में भौतिकवाद ही है। हम तात्कालिक सुख की दौड़ में शामिल होकर मैत्री, करुणा और संतोष को पीछे छोड़ रहे हैं। बौद्ध धम्म में निहित शील, समाधि, प्रज्ञा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि आंतरिक विश्व को विशाल बनाने और क्रोध को कम करने के लिए बौद्ध चिंतन कैसे मददगार है, इस पर वैज्ञानिक काम कर रहे हैं और दुनियाभर में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। 
नव नालंदा महाविहार, विश्वविद्यालय, नालंदा के कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ  ने कहा कि वर्तमान में मानवतावाद और धर्म को लेकर संवेदन शून्यता की स्थिति आ रही है, ऐसे में अपने मन को मानवीय भावों से प्रेरित करने के लिए बौद्ध धम्म के सिद्धांत अपनाने की आवश्यकता है। 
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. कमलेशदत्त त्रिपाठी ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में कहा कि वर्तमान चुनौतियों से निजात पाने का उत्तर धम्म में ही है। उन्होंने कहा कि सभ्यता व्यापक अर्थ में धम्म का पर्याय है। कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नई सभ्यता ने चुनौतियां खड़ी की हैं। 
प्रो. रमेश चन्द्र सिन्हा ने कहा कि हम नई दुनिया की बात करते हैं तो हमें बुद्ध की तरफ देखना होगा। भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एस. आर. भट्ट ने कहा कि बुद्ध का चिंतन सनातन है। 
अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने तकनीक के आधार पर सभ्यता की चर्चा करते हुए कहा कि धम्म और शील ही मनुष्य की पहचान है। व्यक्ति और समष्टि के विकास के लिए हमें बौद्ध दर्शन की करुणा दृष्टि को चरितार्थ करना होगा। उन्होंने स्वामी विवेकानंद की विचार दृष्टि का उल्लेख करते हुए कहा कि मानव सभ्यता का रास्ता भारतीय संस्कृति से ही जाता है। 
संगोष्ठी के आरम्भ में स्वागत वक्तव्य संस्कृति विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. नृपेंद्र प्रसाद मोदी ने दिया। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के दर्शन एवं संस्कृति विभाग के अध्यक्ष संगोष्ठी के संयोजक  डॉ. जयंत उपाध्याय ने किया तथा आभार  डॉ. भदन्त आनन्द कौसल्यायन बौद्ध अध्ययन केन्द्र के प्रभारी डा. कृष्ण चंद्र पाण्डेय नेने ज्ञापित किया। इस तरंगाधारित संगोष्ठी में अध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी विश्वविद्यालय के आधिकारिक यूट्यूब चैनल और फेसबुक के माध्यम से बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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