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मनपा विस्तार और कुछ प्रश्न

-श्री सत्येंद्र सिंह
पुणे महानगरपालिका में 23 गांव मिला कर उसे महाराष्ट्र की सबसे बड़ी नगरपालिका बना दिया गया है। पहले 11 गांव मिलाए गए तो कुछ नए वार्ड भी बनाए गए जो अन्य वार्डों की तुलना में क्षेत्रफल, जनसंख्या और सुविधाओं की आवश्यकताओं को देखते हुए बहुत बड़े थे। नए नगरसेवक गला फाड़-फाड़ कर मनपा भवन में अपने क्षेत्र के विकास के लिए निधि की मांग करते रहे। उनको अपेक्षित निधि मिल सकी या नहीं यह तो पता नहीं परंतु निधि मिलने की बात कहते हुए जगह जगह विभिन्न कार्यों का भूमिपूजन खूब किया गया। भूमिपूजन के बाद न तो किसी नगरसेवक ने उस स्थान पर दुबारा पैर रखा और नागरिकों में से कभी किसी ने निधि मंजूरी का न तो  प्रमाण मांगा और न उन कार्यों का कोई टेंडर नोटिस देखा। कई नगरसेवकों ने सौ-सौ भूमि पूजन कर डाले और कम से कम दस लाख व ऊपर ही धनराशि आवंटन की बात कही, परंतु  बहुत कम कार्यों की शुरुआत का आभास हुआ और जिस स्वीकृत राशि का उल्लेख किया गया था, वह राशि कहां गई, इसका आभास तक किसी को नहीं है।
हड़पसर एक्सप्रेस के प्रतिनिधि ने नए वार्डों के नागरिकों से संपर्क कर वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया तो यही बताया गया कि जिन स्थानों पर भूमिपूजन हुआ उस स्थान पर अब भूमिपूजन का बोर्ड तक नहीं है। कई नागरिकों ने दबी जबान से कहा कि मनपा प्रशासन ने जिन कार्यों के लिए निधि का आबंटन किया और जिन कार्यों का केवल भूमिपूजन करके कार्यों की इतिश्री कर दी, उन कार्यों के लिए आवंटित धनराशि संबंधित नगरसेवकों से वापस ली जाएगी और यदि निधि खर्च होने की कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है तो क्या यह जांच की जाएगी कि निधि का व्यय उसी काम के लिए हुआ है, जिसके लिए निधि मंजूर की गई थी और आगे कोई निधि आवंटित की जाती है तो क्या पहले से स्वीकृत राशि का हिसाब मांगा जाएगा? मनपा में जोड़े गए नये 23 गांवों के लिए वार्ड संरचना और बजट आवंटन की योजना बनाने से पहले पूर्व में मिलाए गए 11 गांवों की जरूरत, विकास आदि के लिए बनाई गई नीति का पूरी तरह अनुपालन करके भविष्य के लिए मार्ग प्रशस्त कर लिया जाएगा ताकि आगे सुचारू विकास संभव हो सके।
मनपा में मिलाए गांवों में प्रॉपर्टी टैक्स में बढ़ोतरी, बिना पानी दिए पानी का टैक्स, बिना रोड उपलब्ध कराए रास्ते का कर, बिजली, साफ सफाई यानी कि सभी का टैक्स देते देते वहां के नागरिक भूल चुके हैं कि उन सुविधाओं के हकदार हैं।
-श्री सत्येंद्र सिंह
सप्तगिरी सोसाइटी, आंबेगांव, पुणे

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