हम सभी को जन आंदोलन में शामिल होकर समर्थन करना चाहिए
शिवसेना पुणे शहर के उपशहर प्रमुख समीर तुपे द्वारा नागरिकों से अपील
मेडिकेअर हॉस्पिटल में जन्मी नन्हीं बिटिया के माता-पिता के साथ आनंदोत्सव मनाते हुए समीर तुपे, मनीषा झेंडे, डॉ.शंतनु जगदाले, बेटी बचाओ जन आंदोलन के जनक डॉ. गणेश राख व अन्य दूसरे चित्र में शिवसेना पुणे शहर के उप शहर प्रमुख समीर तुपे ने नन्हीं बिटिया को गोद में लेकर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा लगाया।
हड़पसर, सितंबर (ह.ए. प्रतिनिधि)
‘बेटी बचाओ जन आंदोलन’ के जनक डॉ. गणेश राख अपने देश की शान हैं। उनके द्वारा स्थापित की गई ‘बेटी बचाओ जन आंदोलन पहल’ की एक छोटी सी चिंगारी ने आज महान परिवर्तन की क्रांति ला दी है। अपने भारत देश के साथ-साथ इस जन आंदोलन ने अब विश्वस्तर पर अपनी जड़ें मजबूत कर ली हैं। अनेक देशों से डॉ.गणेश राख को आमंत्रित किया जाता है कि वे आएं और बेटी बचाओ जन आंदोलन की जन जागरूकता उनके देश में करें, यह हम सभी देशवासियों के लिए गौरव की बात है। इस जन आंदोलन में डॉ.गणेश राख का अमूल्य योगदान है। हम सभी देशवासियों को इस जन आंदोलन में शामिल होकर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा लगाकर इस मुहिम का समर्थन करना चाहिए। यह अपील शिवसेना पुणे शहर के उपशहर प्रमुख समीर तुपे ने की है।
‘बेटी बचाओ जन आंदोलन’ के जनक डॉ. गणेश राख द्वारा संचालित मेडिकेअर हॉस्पिटल में एक नवजात लड़की का जन्म हुआ, अस्पताल में विशेषज्ञता एवं अवधारणा यह है कि ‘बेटी बचाओ जन आंदोलन’ की मुहिम में अगर एक लड़की का जन्म होता है, तो अस्पताल पूरा खर्च नहीं लेता है। आज भी एक नवजात बच्ची का मेडिकेअर हॉस्पिटल में जन्म हुआ और इस मौके को ख़ुशी का आनंदोत्सव मनाते हुए केक काटा गया, तब समीर तुपे बोल रहे थे। इस अवसर पर नवजात लड़की के माता-पिता व उनके परिजन, बेटी बचाओ जन आंदोलन के जनक डॉ.गणेश राख, हड़पसर यातायात नियंत्रण विभाग की पुलिस निरीक्षक मनीषा झेंडे, राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता डॉ.शंतनु जगदाले, डॉ. लालासाहब गायकवाड, डॉ.विजय जोशी, डॉ. अमोल पतंगे, मालवाडी शिवसेना शाखा प्रमुख अमित कांबले, सागर भंडारी व मेडिकेअर हॉस्पिटल के क़र्मचारीगण प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
‘बेटी बचाओ जन आंदोलन’ के जनक डॉ. गणेश राख ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बेटियां देश की आन, बान और शान होती हैं। अपनी मुस्कान से घरों में खुशियों की सौगात इक़ट्ठी करनेवाली परियां होती हैं। उनके चहकने से ही हर घर रोशन होता है। लड़के के जन्म जैसा ही लड़की के जन्म को भी स्वीकार करें। बेटियां हमारे देश का स्वाभिमान हैं। उन्हें घुट-घुटकर नहीं बल्कि आज़ादी से सांस लेकर जीने दो। अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए उनके हौसले बुलंद करो।

0 टिप्पणियाँ