मुंबई, जनवरी (महासंवाद) मराठी भाषा बहुत समृद्ध है। हमने देखा है कि मराठी समाचार पत्रों में विशेष रूप से लेख बहुत ही विद्वतापूर्ण और स्वादिष्ट होते हैं। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने पत्रकारों, लेखकों और मुंबई हिंदी सभा से अपील की कि वे इस समृद्ध साहित्य और लेखों को हिंदी भाषियों के लिए उपलब्ध कराने के लिए पहल करें।
महात्मा गांधी की प्रेरणा से वर्ष 1944 में शुरू हुए मुंबई हिंदी सभा के अमृत महोत्सव का शुभारंभ राज्यपाल श्री कोश्यारी की उपस्थिति में मुंबई स्थित राजभवन में संपन्न हुआ, तब वे बोल रहे थे।
इस अवसर पर मुंबई हिंदी सभा के कुलपति और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री छगन भुजबल, केंद्रीय हिंदी निदेशालय के उप निदेशक राकेश शर्मा, पत्रकार वर्षा सोलंकी, सभा के कुलपति विजय परदेशी, महासचिव सूर्यकांत नागवेकर और कोषाध्यक्ष देवदत्त साल्वी उपस्थित थे।
हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में गैर-हिन्दी भाषियों का योगदान महान
राज्यपाल श्री कोश्यारी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद बंगाली वक्ता होने के बावजूद अल्मोड़ा आने पर हिंदी में लोगों से बात करते थे और शिकागो में उत्कृष्ट अंग्रेजी बोलते थे। महर्षि दयानंद ने भी हिंदी भाषा में काम करना शुरू किया। राज्यपाल ने कहा कि हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में गैर-हिंदी भाषियों का योगदान कई गुना अधिक है, साथ ही देश को एकजुट करने के लिए महात्मा गांधी का हिंदुस्तानी भाषा का पुरस्कार उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है। राज्यपाल ने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा बोली जाती है, लेकिन अगर मराठी नहीं आ रही है तो हिंदी बोली जानी चाहिए।
महात्मा गांधी की प्रेरणा से वर्ष 1944 में शुरू हुए मुंबई हिंदी सभा के अमृत महोत्सव का शुभारंभ राज्यपाल श्री कोश्यारी की उपस्थिति में मुंबई स्थित राजभवन में संपन्न हुआ, तब वे बोल रहे थे।
इस अवसर पर मुंबई हिंदी सभा के कुलपति और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री छगन भुजबल, केंद्रीय हिंदी निदेशालय के उप निदेशक राकेश शर्मा, पत्रकार वर्षा सोलंकी, सभा के कुलपति विजय परदेशी, महासचिव सूर्यकांत नागवेकर और कोषाध्यक्ष देवदत्त साल्वी उपस्थित थे।
हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में गैर-हिन्दी भाषियों का योगदान महान
राज्यपाल श्री कोश्यारी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद बंगाली वक्ता होने के बावजूद अल्मोड़ा आने पर हिंदी में लोगों से बात करते थे और शिकागो में उत्कृष्ट अंग्रेजी बोलते थे। महर्षि दयानंद ने भी हिंदी भाषा में काम करना शुरू किया। राज्यपाल ने कहा कि हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में गैर-हिंदी भाषियों का योगदान कई गुना अधिक है, साथ ही देश को एकजुट करने के लिए महात्मा गांधी का हिंदुस्तानी भाषा का पुरस्कार उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है। राज्यपाल ने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी भाषा बोली जाती है, लेकिन अगर मराठी नहीं आ रही है तो हिंदी बोली जानी चाहिए।
हिंदी आपस में जोड़नेवाली भाषा है : छगन भुजबल
मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि हिंदी एक ऐसी भाषा है जो विभाजनकारी नहीं बल्कि परस्पर जोड़नेवाली भाषा है और हिंदी भाषा के कारण हम उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों के लोगों के साथ आसानी से संवाद कर सकते हैं। भुजबल ने कहा कि अमृता प्रीतम, महादेवी वर्मा, मुंशी प्रेमचंद और अन्य लेखकों ने हिंदी भाषा को समृद्ध बनाने में योगदान दिया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि हिंदी भाषा का प्रसार पूरे देश में होगा और देश को एकजुट करेगा।
इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित चयनित लोगों का अभिनंदन किया गया।
मुंबई हिंदी सभा की प्लेटिनम जुबली में शामिल हुए राज्यपाल कोश्यारी, मंत्री छगन भुजबल
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने बुधवार (19 जनवरी) को राजभवन, मुंबई में मुंबई हिंदी सभा के प्लेटिनम जयंती समारोह का उद्घाटन किया। वर्ष 1944 में महात्मा गांधी से प्रेरणा लेकर सभा की शुरुआत हुई थी। इस अवसर पर राज्यपाल ने हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में गैर हिन्दी भाषी लोगों के योगदान की सराहना की। उन्होंने स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, डॉ. के.बी. हेडगेवार और महर्षि दयानंद को दूरदर्शी बताया जो लोगों को एकजुट करने में हिंदी के महत्व को समझते थे।
मंत्री छगन भुजबल ने कहा कि हिंदी एक ऐसी भाषा है जो विभाजनकारी नहीं बल्कि परस्पर जोड़नेवाली भाषा है और हिंदी भाषा के कारण हम उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों के लोगों के साथ आसानी से संवाद कर सकते हैं। भुजबल ने कहा कि अमृता प्रीतम, महादेवी वर्मा, मुंशी प्रेमचंद और अन्य लेखकों ने हिंदी भाषा को समृद्ध बनाने में योगदान दिया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि हिंदी भाषा का प्रसार पूरे देश में होगा और देश को एकजुट करेगा।
इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित चयनित लोगों का अभिनंदन किया गया।
मुंबई हिंदी सभा की प्लेटिनम जुबली में शामिल हुए राज्यपाल कोश्यारी, मंत्री छगन भुजबल
महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने बुधवार (19 जनवरी) को राजभवन, मुंबई में मुंबई हिंदी सभा के प्लेटिनम जयंती समारोह का उद्घाटन किया। वर्ष 1944 में महात्मा गांधी से प्रेरणा लेकर सभा की शुरुआत हुई थी। इस अवसर पर राज्यपाल ने हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार में गैर हिन्दी भाषी लोगों के योगदान की सराहना की। उन्होंने स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी, डॉ. के.बी. हेडगेवार और महर्षि दयानंद को दूरदर्शी बताया जो लोगों को एकजुट करने में हिंदी के महत्व को समझते थे।
मुंबई हिंदी सभा के कुलपति और खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, हिंदी के केंद्रीय निदेशालय में हिंदी के उप निदेशक राकेश कुमार शर्मा, मुंबई हिंदी सभा के महासचिव सूर्यकांत नागवेकर, सभा के कुलपति विजय परदेशी, पत्रकार वर्षा सोलंकी एवं अन्य उपस्थित थे। राज्यपाल ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया।
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