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अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय में ‘देहमाहारसंभवम्’ विषय पर परिषद संपन्न

पुणे, फरवरी (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)

आयुर्वेद शिक्षण मंडल के प्रथम संस्थापक स्वर्गीय वैद्यराज हरिभाऊ परांजपे की 115वीं जयंती के अवसर पर हाल ही में अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज में ‘देहमाहारसंभवम्’ विषय पर 45वां राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन का उद्घाटन संस्थान के सचिव प्रो.  डॉ. मधुकर हरि परांजपे के शुभ हाथों किेया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्वेद विशेषज्ञ सम्मेलन, नई दिल्ली के सचिव डॉ. वी.डी. अग्रवाल, अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य डॉ. सीमा परांजपे, आयुर्वेद शिक्षा बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील भैरत और महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हेमलता जलगांवकर भी मौजूद थीं।
सम्मेलन में बताया गया कि किस प्रकार आयुर्वेद दर्शन के साथ-साथ आयुर्वेदिक आहार अनेक रोगों से मुक्ति के साथ-साथ रोगों को दूर रखने में उपयोगी है। सम्मेलन के चर्चा सत्र में कहा गया कि आयुर्वेद में असंक्रामक रोगों को दूर रखने का विशेष उपाय है। इन-पेशेंट आयुर्वेद उपचार विधियों, पोषण, चिकित्सा अर्थव्यवस्था, जीवन में उपवास का महत्व, गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार का उपयोग, स्तनपान की समस्याओं से बचने के लिए आहार आदि पर चर्चा हुई।
निबंध प्रतियोगिता : इस अवसर पर निबंध प्रतियोगिता के विजेता नेहा राठौड़, पुणे, करण लखानी, गुजरात को प्रथम पुरस्कार और ध्वनि सोनवणे, वडोदरा और रुतुजा जोशी, नासिक को विभाग से द्वितीय पुरस्कार एवं तीसरा पुरस्कार प्रीति परब, गोवा और भाग्येशा रसाल को दिया गया।
भाषण प्रतियोगिता में गौराहर सरकाले, कोडोली, ध्वनि सोनवणे, पारुल, आकाश बर्वे व देवानंद शिंदे को प्रथम पुरस्कार और अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय के दो विद्यार्थियों को  द्वितीय पुरस्कार एवं तृतीय पुरस्कार वी. एस. स्नेहा, बेंगलुरु, सोना मृदुला, पुणे को वितरित किया गया।

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