जनजातीय कार्य मंत्रालय निम्नलिखित योजनाओं को क्रियान्वित कर रहा है जिसके लिए राज्य सरकार से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर राज्य सरकार को फंड जारी किए जाते हैं।
अनुच्छेद 275(1), एससीए से टीएसएस और पीवीटीजी योजना के तहत अनुदान के संबंध में, राज्य को राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति (एसएलईसी) द्वारा अनुमोदित प्रस्तावों को प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। जनजातीय कार्य सचिव की अध्यक्षता में परियोजना अनुमोदन समिति द्वारा प्रस्तावों की जांच की जाती है, जिसके बाद वित्त विभाग द्वारा उस पर सहमति व्यक्त की जाती है। प्रत्येक राज्य को इन 3 योजनाओं में उस राज्य की जनसंख्या के मानदंड और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर हिस्सा आवंटित किया गया है। पिछले वर्षों में जारी किए गए फंडे में से बच गई राशि, फंडों के उपयोग की स्थिति और आदिवासी अनुदान प्रबंधन प्रणाली (एडीआईजीआरएएमएस) पर प्रस्तुत भौतिक प्रस्ताव रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए राज्य को धनराशि जारी की जाती है। इन राज्यों से प्राप्त प्रस्तावों और स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण जनजातीय कार्य मंत्रालय की वेबसाइट (tribal.nic.in) पर देखा जा सकता है। लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्रों और परियोजनाओं की प्रगति का विवरण मंत्रालय द्वारा विकसित डैशबोर्ड (dashboard.tirbal.gov.in) पर "स्टेट इन ए ग्लांस" मॉड्यूल में देखा जा सकता है, जिसे हर महीने के पहले दिन अपडेट किया जाता है।
वित्त चक्र 2021-26 के लिए, कई मौजूदा योजनाओं को एक-दूसरे के साथ मिला दिया गया है, उन्हें सुधार कर नया रूप दिया गया है और उनके दायरे को बड़ा कर दिया गया है। आदिवासियों के समग्र विकास के लिए बनाई गई 3 योजनाएं इस प्रकार हैं।
यह जानकारी जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने आज लोकसभा में दी।
- प्री मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना।
- II. संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान।
- एससीए से टीएसएस जिसे अब प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना के रूप में नया नाम दिया गया है।
- IV. विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के लिए अनुदान।
- टीआरआई को मदद।
अनुच्छेद 275(1), एससीए से टीएसएस और पीवीटीजी योजना के तहत अनुदान के संबंध में, राज्य को राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति (एसएलईसी) द्वारा अनुमोदित प्रस्तावों को प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। जनजातीय कार्य सचिव की अध्यक्षता में परियोजना अनुमोदन समिति द्वारा प्रस्तावों की जांच की जाती है, जिसके बाद वित्त विभाग द्वारा उस पर सहमति व्यक्त की जाती है। प्रत्येक राज्य को इन 3 योजनाओं में उस राज्य की जनसंख्या के मानदंड और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर हिस्सा आवंटित किया गया है। पिछले वर्षों में जारी किए गए फंडे में से बच गई राशि, फंडों के उपयोग की स्थिति और आदिवासी अनुदान प्रबंधन प्रणाली (एडीआईजीआरएएमएस) पर प्रस्तुत भौतिक प्रस्ताव रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए राज्य को धनराशि जारी की जाती है। इन राज्यों से प्राप्त प्रस्तावों और स्वीकृत परियोजनाओं का विवरण जनजातीय कार्य मंत्रालय की वेबसाइट (tribal.nic.in) पर देखा जा सकता है। लंबित उपयोगिता प्रमाणपत्रों और परियोजनाओं की प्रगति का विवरण मंत्रालय द्वारा विकसित डैशबोर्ड (dashboard.tirbal.gov.in) पर "स्टेट इन ए ग्लांस" मॉड्यूल में देखा जा सकता है, जिसे हर महीने के पहले दिन अपडेट किया जाता है।
- टीआरआई को अनुदान की योजना, टीआरआई को अनुसंधान परियोजनाओं, प्रशिक्षण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, त्योहारों के आयोजन, शिल्प मेला, पेंटिंग और अन्य प्रतियोगिताओं आदि जैसी विभिन्न गतिविधियों के लिए उनसे प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर फंड दिया जाता है। टीआरआई भवन, संग्रहालय और जनजातीय स्मारकों आदि जैसे बुनियादी ढांचे के उन्नयन/निर्माण के लिए टीआरआई को फंड जारी किया जाता है। इन राज्यों से प्राप्त प्रस्तावों और अनुमोदित परियोजनाओं का विवरण मंत्रालय की वेबसाइट (tribal.nic.in) पर देखा जा सकता है। परियोजनाओं का विवरण मंत्रालय द्वारा विकसित ऑनलाइन पोर्टल जैसे tri.tribal.gov.in और adiprashikshan.tribal.gov.in पर देखा जा सकता है।
वित्त चक्र 2021-26 के लिए, कई मौजूदा योजनाओं को एक-दूसरे के साथ मिला दिया गया है, उन्हें सुधार कर नया रूप दिया गया है और उनके दायरे को बड़ा कर दिया गया है। आदिवासियों के समग्र विकास के लिए बनाई गई 3 योजनाएं इस प्रकार हैं।
- प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम योजना :
- II. प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन :
- एसटी के लिए वेंचर कैपिटल फंड :
यह जानकारी जनजातीय कार्य मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने आज लोकसभा में दी।
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