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‘डेक्कन क्वीन’ के गौरवशाली 93 वर्ष

मुंबई, जून (हड़पसर एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क)
महाराष्ट्र के दो प्रमुख शहरों बंबई अभी मुंबई-पुणे के बीच 1 जून 1930 को ‘डेक्कन क्वीन’ गाड़ी का शुभारंभ ग्रेट इंडियन पेननसुला रेलवे (जीआईपी) जो बाद में मध्य रेल बनी, के इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि थी। इस क्षेत्र के दो प्रमुख शहरों को सेवाएं प्रदान करने के लिए मध्य रेल पर शुरू की गई यह पहली डीलक्स गाड़ी थी तथा इसे पुणे के नाम से जाना जाने लगा। इस गाड़ी को ‘क्वीन ऑफ डेक्कन’ (दख्खन की रानी) भी कहा जाता है।
आरंभ में, इस गाड़ी को 7 डिब्बों के दो रैकों के साथ चलाया गया, जिनमें से एक रेक को स्कारलेट मोलडिंग सहित सिल्वर कलर में पेंट किया गया था तथा दूसरे रेक को गोल्ड लाइनों के साथ रॉयल ब्ल्यू कलर मे पेंट किया गया था। मूल रेकों के डिब्बो के अंदर फ्रेम्स का निर्माण इंग्लैंड में किया गया था जबकि डिब्बों का निर्माण जीआईपी रेलवे के मांटुगा कारखाने में किया गया था।
‘डेक्कन क्वीन’ में शुरूआती दौर में केवल प्रथम श्रेणी और द्वितीय श्रेणी के डिब्बे लगाए गए थे। प्रथम श्रेणी के डिब्बे 1 जनवरी 1949 को हटाए गए तथा द्वितीय श्रेणी के डिब्बों को प्रथम श्रेणी के रूप में पुन: डिजाइन किया गया जिन्हें जून 1955 तक चलाया गया, बाद में इस गाड़ी में पहली बार तृतीय श्रेणी के डिब्बे लगाए गए। इन डिब्बों को अप्रैल 1974 से आगे द्वितीय श्रेणी के रूप में पुन: डिजाइन किया गया।  मूल रेकों के डिब्बों को इंटिग्रल कोच फैक्टरी, पेरांबुर द्वारा निर्मित एंटी टेलीस्कोपिक स्टील बॉडीड इंटिग्रल कोचों द्वारा 1966 में बदला गया। आरामदेह यात्रा तथा आंतरिक फर्निशिंग और फिटिंग में सुधार के लिए बोगियों के उन्नत डिजाइन हेतु इन डिब्बों को शामिल किया गया। अतिरिक्त स्थान उपलब्ध कराने के लिए डिब्बों की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 की गई। पिछले कुछ वर्षों में इस गाड़ी में लगाए जाने वाले डिब्बों की संख्या 17 डिब्बों के मौजूदा स्तर तक लाई गई।
इस गाड़ी के शुरू होने से लेकर अब तक यात्रियों को आरामदेह यात्रा के लिए सुविधाऍं उपलब्ध कराने के अलावा यह गाड़ी भारत में पहली बार रोलर बेयरिंग वाले डिब्बों की शुरूआत, 110 वोल्ट प्रणाली सहित एंड ऑन जनरेशन डिब्बों के स्थान पर सेल्फ जनरेटिड डिब्बे लगाना तथा यात्रियों के लिए अधिक स्थान उपलब्ध कराने के लिए प्रथम तथा द्वितीय श्रेणी कुर्सीयान की शुरूआत जैसे कई सुधार कार्यों की गवाह रही है। खिड़की के ऊपर लाल रंग की पट्टी सहित क्रीम और आक्सफोई ब्ल्यू कलर की विशिष्ट रंग संगति इस गाड़ी के लिए हाल ही में अपनाई गई है। बेहतर सुख-सुविधाओं, आरमदेह यात्रा के सुधारित मानकों तथा गुणवत्तपूर्ण सेवा के लिए यात्रियों की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए ‘डेक्कन क्वीन’ को पूरी तरह से नया रूप देना आवश्यक समझा गया।
इस गाड़ी के रेक को निम्नलिखित विशेषताओं के साथ 1995 में बदला गया :-
-पूर्णत: नव निर्मित या लगभग एक वर्ष पुराने एयर ब्रेक डिब्बे।
-पुराने रेक के 5 प्रथम श्रेणी कुर्सीयानों को 5 एसी कुर्सीयानों द्वारा बदला गया है, जिससे धूलमुक्त वातावरण वाले 65 अतिरिक्त स्थान उपलब्ध हुए हैं। पुराने डिब्बों की तुलना में द्वितीय श्रेणी के 9 कुर्सीयान में अतिरिक्त 120 सीटें उपलब्ध हुई हैं।  इस प्रकार पुराने रेक में उपलब्ध 1232 सीटों की तुलना में नए रेक में 1417 सीटें उपलब्ध हुई हैं जो कि 15% अधिक हैं।
-भोजनयान में 32 यात्रियों के लिए टेबल सर्विस उपलब्ध है तथा इस भोजनयान के माइक्रोवेव ओवन, डीप फ्रीजर और टोस्टर जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इस भोजनयान को कुशन वाली कुर्सियों तथा कारपेट के साथ सुसज्जित किया गया है।
‘डेक्कन क्वीन’ (दख्खन की रानी) का इतिहास अक्षरश: दो शहरों का इतिहास बयां करता है। ‘डेक्कन क्वीन’ के समय पर प्रस्थान और आगमन के कारण दोनों शहरों के यात्री काफी खुश हैं। इस गाड़ी के पिछले 92 वर्षों के शानदार इतिहास के कारण यह गाड़ी दो शहरों के बीच परिवहन का एकमात्र माध्यम बन गई है।
एलएचबी कोच- मध्य रेल ने 12123/12124  ‘डेक्कन क्वीन’ के सभी कन्वेंशनल कोचों को दिनाँक 22.6.2022 से मुंबई से तथा 23.6 2022 से पुणे एलएचबी कोचों में परिवर्तित करने का निर्णय लिया है।
परिवर्तित कम्पोजीशन- 4 एसी चेयर कार, 1 विस्टाडोम कोच, 8 सेकेंड क्लास चेयर कार, 1 जनरल सेकेंड क्लास सह गार्ड ब्रेक वान एवं जनरेटर कार।
यह विज्ञप्ति  जनसंपर्क विभाग, मध्य रेल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस द्वारा जारी की गई है।




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