पुणे, जुलाई (जिमाका)
राज्य में प्रत्येक वर्ष एक हजार अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्था (बार्टी) और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम प्रौद्योगिकी केंद्र, इंडो जर्मन टूल रूम (आयजीटीआर) छत्रपति संभाजीनगर के बीच सामंजस्य करार किया गया है।
बार्टी की निबंधक इंदिरा अस्वार व आयजीटीआर के महाव्यवस्थापक आर. डी. पाटिल ने सामंजस्य करार पर हस्ताक्षर किए। उपजिलाधिकारी तथा बार्टी कौशल विकास विभाग के विभाग प्रमुख अनिल कारंडे, आयजीटीआर के कौशल विकास वरिष्ठ प्रशिक्षण व्यवस्थापक जे. डी. बागुल, बार्टी के प्रकल्प व्यवस्थापक महेश गवई, आयजीटीआर की पुणे प्रकल्प अधिकारी मेघा सौंदणकर आदि इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
राज्य में अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के बीच कौशल विकास, उन्हें तकनीकी ज्ञान प्रदान करके कौशल की दृष्टि के अनुसार सशक्त बनाना, उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाना और उद्यमिता को बढ़ावा देना इस समझौते का उद्देश्य है। इस साझेदारी के माध्यम से बार्टी व आयजीटीआर संयुक्त रूप से अनुसूचित जाति समुदाय की आवश्यकताएँ और इच्छानुसार कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम क्रियान्वित किया जायेगा। प्रशिक्षुओं को सीएनसी टर्निंग, टूल एंड डाई मेकिंग, मशीन मेंटेनन्स, वेल्डिंग, कॅड/कॅम आदि विषय का 6 से 12 महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बार्टी की निबंधक श्रीमती इंदिरा अस्वार ने इस सामंजस्य करार के बारे में खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह राज्य में अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आयजीटीआर के महाव्यवस्थापक श्री आर. डी. पाटिल ने कहा कि अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और नौकरी में सहायता प्रदान करने के लिए बार्टी के साथ साझेदारी की है। अभ्यर्थियों को गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास प्रशिक्षण और बेहतर भविष्य के लिए नौकरी के अवसर प्रदान करने का दोनों संगठन प्रयास करते रहेंगे।
कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उम्मीदवारों के नामांकन के लिए विज्ञापन और पंजीकरण प्रक्रिया अगस्त 2023 में शुरू की जाएगी। नाम पंजीकरण प्रक्रिया और कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी के लिए इच्छुक उम्मीदवार https://barti.in व https://www.igtr-aur.org इन अधिकृत वेबसाइटाइयों पर जाएँ।
राज्य में प्रत्येक वर्ष एक हजार अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर संशोधन व प्रशिक्षण संस्था (बार्टी) और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम प्रौद्योगिकी केंद्र, इंडो जर्मन टूल रूम (आयजीटीआर) छत्रपति संभाजीनगर के बीच सामंजस्य करार किया गया है।
बार्टी की निबंधक इंदिरा अस्वार व आयजीटीआर के महाव्यवस्थापक आर. डी. पाटिल ने सामंजस्य करार पर हस्ताक्षर किए। उपजिलाधिकारी तथा बार्टी कौशल विकास विभाग के विभाग प्रमुख अनिल कारंडे, आयजीटीआर के कौशल विकास वरिष्ठ प्रशिक्षण व्यवस्थापक जे. डी. बागुल, बार्टी के प्रकल्प व्यवस्थापक महेश गवई, आयजीटीआर की पुणे प्रकल्प अधिकारी मेघा सौंदणकर आदि इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
राज्य में अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के बीच कौशल विकास, उन्हें तकनीकी ज्ञान प्रदान करके कौशल की दृष्टि के अनुसार सशक्त बनाना, उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाना और उद्यमिता को बढ़ावा देना इस समझौते का उद्देश्य है। इस साझेदारी के माध्यम से बार्टी व आयजीटीआर संयुक्त रूप से अनुसूचित जाति समुदाय की आवश्यकताएँ और इच्छानुसार कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम क्रियान्वित किया जायेगा। प्रशिक्षुओं को सीएनसी टर्निंग, टूल एंड डाई मेकिंग, मशीन मेंटेनन्स, वेल्डिंग, कॅड/कॅम आदि विषय का 6 से 12 महीने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बार्टी की निबंधक श्रीमती इंदिरा अस्वार ने इस सामंजस्य करार के बारे में खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह राज्य में अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आयजीटीआर के महाव्यवस्थापक श्री आर. डी. पाटिल ने कहा कि अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और नौकरी में सहायता प्रदान करने के लिए बार्टी के साथ साझेदारी की है। अभ्यर्थियों को गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास प्रशिक्षण और बेहतर भविष्य के लिए नौकरी के अवसर प्रदान करने का दोनों संगठन प्रयास करते रहेंगे।
कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उम्मीदवारों के नामांकन के लिए विज्ञापन और पंजीकरण प्रक्रिया अगस्त 2023 में शुरू की जाएगी। नाम पंजीकरण प्रक्रिया और कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी के लिए इच्छुक उम्मीदवार https://barti.in व https://www.igtr-aur.org इन अधिकृत वेबसाइटाइयों पर जाएँ।
बार्टी के महासंचालक श्री सुनील बारे ने बताया कि बार्टी और आयजीटीआर के बीच हुआ सामंजस्य करार राज्य में अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए कौशल विकास और आर्थिक सशक्तिकरण के अवसर निर्माण करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अनुसूचित जाति के अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और रोजगारक्षम बनना चाहिए।

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