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कालजयी काव्य, समकालीन सवाल : पुणे में रश्मिरथी पर विचार

रविवार की एक सुकून भरी शाम, लगभग साढ़े चार बजे, कोरेगांव पार्क स्थित मोनालिसा कला ग्राम में 12 से 77 वर्ष की आयु के लगभग 25 लोग एकत्र हुए। चर्चा का केंद्र था लगभग 75 वर्ष पूर्व रचित वह काव्य, जो 5,000 वर्ष पुराने महाकाव्य महाभारत पर आधारित है-राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रश्मिरथी। ऐसे समय में, जब पढ़ने की आदतें, विशेषकर शास्त्रीय हिंदी साहित्य की, लगातार घटती जा रही हैं, यह कृति विभिन्न पीढ़ियों के पाठकों को एक मंच पर लाने में सफल रही।
रश्मिरथी महाभारत के सबसे जटिल पात्रों में से एक, कर्ण के जीवन को केंद्र में रखकर सम्मान, निष्ठा, सामाजिक अन्याय, आत्मबल, मित्रता और नैतिक द्वंद्व जैसे विषयों की गहन पड़ताल करती है। शहर के कविता समूह कविता KAFE द्वारा 11 जनवरी को आयोजित इस आयोजन में कई मूलभूत प्रश्नों पर सार्थक चर्चा हुई-क्या कर्ण के साथ समाज ने अन्याय किया? क्या वह दुर्योधन का साथ छोड़ सकता था? क्या गरिमा, धर्म से अधिक महत्वपूर्ण है? क्या रश्मिरथी में कृष्ण कर्ण के प्रति करुणाशील दिखाई देते हैं या रणनीतिक? प्रतिभागियों ने कर्ण के उन गुणों पर भी विचार किया, जिन्हें वे अपने भीतर पहचानते हैं या अपनाना  चाहते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत शहर के कलाकार अविकल की संक्षिप्त बांसुरी वादन से हुई, जिसने पूरे वातावरण को चिंतनशील बना दिया। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में पुणे के लेखक, कवि, निबंधकार, अनुवादक और प्रसारक डॉ. सुनील देवधर उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि जब तक समाज का स्वरूप मूल रूप से नहीं बदलता, महाभारत की घटनाएं  दोहराई जाती रहेंगी। जिस प्रकार आज के समाज की कुछ बातें सही मानी जाती हैं, उसी प्रकार उस युग में भी कुछ मूल्य और परिस्थितियां उचित थीं।
डॉ. देवधर ने महाकाव्य के ऐतिहासिक और भौगोलिक संदर्भों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कर्ण के ‘अंगराज’ कहलाने के महत्व को समझाया और बताया कि वर्तमान भागलपुर प्राचीन अंग प्रदेश से संबंधित है। इसके अलावा उन्होंने उन पांच गांवों का उल्लेख किया, जिन्हें युद्ध टालने के अंतिम प्रयास के रूप में पांडवों ने दुर्योधन से मांगा था-इंद्रप्रस्थ (दिल्ली), स्वर्णप्रस्थ (सोनीपत), पांडुप्रस्थ (पानीपत), व्याघ्रप्रस्थ (बागपत) और तिलप्रस्थ (तिलपत)।
एक प्रतिभागी ने कहा कि रश्मिरथी इसलिए कालजयी है क्योंकि यह कर्ण के चरित्र को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है, जो महाभारत में उसकी पारंपरिक छवि से भिन्न है। जहां कई लोगों ने कर्ण की दानशीलता, पुत्र धर्म, दुर्योधन के प्रति निष्ठा, महत्वाकांक्षा और विपरीत परिस्थितियों में उसके धैर्य की सराहना की, वहीं कुछ ने उसके दोषों और निर्णयों पर भी विचार किया। चर्चा में यह स्वीकार किया गया कि कर्ण का जीवन उसके गुणों के साथ-साथ उसके कठिन विकल्पों, आंतरिक संघर्षों और नैतिक दुविधाओं से भी गढ़ा गया-यही उसे एक अत्यंत मानवीय और बहुआयामी चरित्र बनाता है।
प्रतिभागी सुभाष संगम के अनुसार, कर्ण न तो पूरी तरह नायक है और न ही खलनायक, बल्कि महाभारत के अनेक परतदार पात्रों में से एक है। उन्होंने कहा कि महाभारत के पात्र हम सभी के भीतर किसी न किसी रूप में जीवित रहते हैं-कभी हम अर्जुन की तरह लक्ष्य पर केंद्रित होते हैं, दिन के दौरान द्रौपदी की तरह अन्याय से व्यथित होते हैं और रात को कर्ण की तरह अपने अतीत से उपजी आशंकाओं और असुरक्षाओं के साथ सो जाते हैं।
कई प्रतिभागियों ने कर्ण के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए उसके साथ हुए अन्यायों को याद किया-इंद्र द्वारा छल से कवच-कुंडल मांगना, परशुराम द्वारा सामाजिक पहचान के कारण शिक्षा से वंचित किया जाना और कुंती द्वारा जन्म के समय उसका परित्याग। वहीं द्रौपदी के चीरहरण के समय उसकी चुप्पी को एक गंभीर नैतिक चूक के रूप में भी रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम में सबसे कम उम्र की प्रतिभागी 12 वर्षीय अनाबिया भी शामिल थीं, जिनके पिता कवि हैं। माता-पिता के प्रोत्साहन पर वे श्रोता के रूप में चर्चा में शामिल हुईं और रश्मिरथी को समझने तथा विभिन्न दृष्टिकोण सुनने की जिज्ञासा लेकर आईं।
मोनालिसा कला ग्राम की संस्थापक लीसा पिंगले ने कहा कि कला और साहित्य केवल अलमारियों में सजे रहने के लिए नहीं होते, बल्कि उन्हें जीने, सवाल करने और पीढ़ियों के बीच साझा करने की आवश्यकता होती है। रश्मिरथी जैसी कृति जब विभिन्न आयु वर्गों को गरिमा, चयन और आंतरिक संघर्षों पर सोचने के लिए एक मंच पर लाती है, तो हिंदी साहित्य की प्रासंगिकता और भी सशक्त होती है।
कविता KAFE की संस्थापक गरिमा मिश्रा ने कहा कि ऐसे दौर में, जब किताबें किंडल पर पढ़ी जा   रही हैं और जीवन मोबाइल स्क्रीन और रील्स के इर्द-गिर्द सिमटता जा रहा है, रश्मिरथी जैसी कालजयी हिंदी कृति को लेकर मिला यह उत्साह अत्यंत भावुक और उत्साहवर्धक है।
यह आयोजन द भारतीय फ़्रीक्वेंसी, रिदान एरे और अनन कोहोर्ट्स के सहयोग से आयोजित किया गया।

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