श्री सत्येंद्र सिंह
सप्तगिरी सोसायटी,
जांभुलवाडी रोड,
आंबेगांव खुर्द, पुणे-411046,
मोबाइल-9922993647
अपना हित सोचना-समझना जीव का स्वाभाविक गुण है। परहित सोचना राजनीतिक गुण है। यह राजनीति शब्द बहुत व्यापक है। पहले धर्म, समाज सेवा में परहित सोचना समाहित था पर अब सब कुछ राजनीति में समाहित प्रतीत होता है, घर भी। देशों के बीच, समाजों के बीच, धर्मों के बीच, भाइयों के बीच, भाई-बहन के बीच सब जगह राजनीति है। वैसे देखा जाए तो शुद्ध रूप में राज्य शासन करने के जो नियम हैं वही राजनीति है, पर आज तो सांस सांस में राजनीति है। सेवा शब्द तो राजनीति का पर्याय ही बन गया है, परंतु अच्छे कामों में, जातियों और अपराधों में भी राजनीति इस कदर प्रवेश कर गई है कि सच क्या है, यही पता नहीं चलता। और अरे यह सब राजनीति है, छोड़ो कह कर आम आदमी ज्वलंत विषयों से भी कन्नी काट कर अपने काम में लग जाता है।दासता, स्वतंत्रता, सभ्यता, राजनीति, सेवा, अपराध सब कुछ हमने बाहर से सीखा है, ऐसा समझने समझाने का एक माहौल बन गया है। भारतीय, जो कुछ भी है, उसे पढ़ना अंधविश्वास, गिरी हुई सोच माने जाने का भी माहौल बना हुआ है। बहुप्रसिद्ध ग्रंथ वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, मनुस्मृति और विद्वानों में चाणक्य, महात्मा गांधी, बाबासाहेब आंबेडकर, विवेकानंद चंद नामों से ही अधिकांश का परिचय है। अष्टाध्यायी, योगवाशिष्ठ, भर्तृहरि शतक, दर्शन आदि ग्रंथ बिनोवा भावे, काका कालेलकर, अरविंद घोष, गुलजारी लाल नंदा प्रभृति विद्वान और राममनोहर लोहिया आदि जैसे नामों से भी परिचय है, लेकिन इन्हें पढ़ा नहीं जाता और जब भी कोई उदाहरण दिया जाएगा तो विदेशी विद्वानों का, लेकिन यहां प्रश्न स्वयं की सोच का है। ग्रंथों का अध्ययन अपने अंदर सोचने की क्षमता को विकसित करने के लिए किया जाता है। इतिहास का अध्ययन केवल इसलिए किया जाता है कि भूतकाल में जो गलतियां हुईं उन्हें दुहराया न जाए और जो अच्छा हुआ है उसका देश काल परिस्थिति के अनुरूप अनुसरण किया जाए।
आज सम्पूर्ण विश्व एक इकाई बन गया है। अपनी निजी सोच को विकसित करके विद्वत्जन मनुष्य को अधिक से अधिक सुख सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नित नये अनुसंधान कर रहे हैं तो कुछ विगत का अंधानुकरण करके केवल अपने शारीरिक, मानसिक और ऐंद्रिक सुख पूर्ति के लिए घृणित से घृणित कार्य कर रहे हैं।
यह समय अध्ययन, मनन, चिंतन के लिए बहुत ही उपयुक्त व उपयोगी समय है। आधुनिक वैज्ञानिक शोधों ने ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन सामग्री जुटाकर हमारे सामने रख दी है। वेद, पुराण, उपनिषद, पूरब, पश्चिम, उत्तर दक्षिण के सभी विद्वत्जनों का साहित्य आज इंटरनेट पर उपलब्ध है। अध्ययन करके अपने आत्मिक, मानसिक व बौद्धिक विकास का इससे अच्छा अवसर पता नहीं मिले न मिले, इसलिए केवल वाट्सएप, फेसबुक पर आने वाली चंद पोस्टों को अपने ज्ञान का आधार न बनाकर मूल ग्रंथों का अध्ययन करें और अपने व्यक्तित्व का विकास करके औरों के विकास का साधन बनें तो राजनीति शब्द के मायने ही बदल जाएंगे। जहां व्यक्ति की सोच जितनी ईमानदार, शुद्ध, भेदभाव रहित व पारदर्शी होगी वहीं पर सामाजिक व सामासिक समरसता विद्यमान रहेगी और व्यक्ति स्वभावत: सुखी रहेगा। यही नहीं हमारे सामने भारतीय प्रतिभाओं के इतने अच्छे चरित्र मौजूद हैं कि उनका अनुकरण करके भी हम अपना जीवन सफल बना सकते हैं।

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