मुख्य समाचार

6/recent/ticker-posts

अनाथों की माता सिंधुताई सपकाल ‘पद्मश्री पुरस्कार’ से सम्मानित

    गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार यानी पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई, जिसमें महाराष्ट्र राज्य के कुल सात व्यक्ति शामिल हैं। इसमें सामाजिक कार्यकर्ता सिंधुताई सपकाल भी शामिल हैं, उन्हें इस सर्वोच्च पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सिंधुताई के पुणे जिले के सासवड के पास और मांजरी में अनाथ आश्रम हैं। पुणे समेत महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में सिंधुताई के 6 बाल आश्रम हैं। यहां करीब सैकड़ों की संख्या में अनाथ बच्चे हैं। बेघर बच्चों की देखरेख करने वाली सिंधुताई के लिए कहा जाता है कि इनके 1500 बच्चे, 150 से ज्यादा बहुएं और 300 से ज्यादा दामाद हैं। सिंधुताई ने अपनी जिंदगी अनाथ बच्चों की सेवा में गुजारी है। पद्मश्री पुरस्कार मिलने पर सिंधुताई ने कहा कि यह पुरस्कार मेरे सहयोगियों और मेरे बच्चों का है। पद्मश्री सिंधुताई को अब तक 700 से ज्यादा सम्मान से नवाजा जा चुका है। यह पुरस्कार मेरे उन बच्चों के लिए हैं जिन्होंने मुझे जीने की ताकत दी। उन्होंने लोगों से अनाथ बच्चों को अपनाने की अपील की है। महाराष्ट्र राज्य के रजनीकांत देवीदास श्रॉफ (ट्रेड एंड इंडस्ट्री) को पद्मभूषण और पद्मश्री से परशुराम आत्माराम गंगावने (कला), नामदेव कांबले (साहित्य और शिक्षा), जसवंती जमनादास पोपट (ट्रेड एंड इंडस्ट्री), गिरीश प्रभुणे (सामाजिक कार्य) को नवाजा गया है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ