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क्यों बढ़ रहे हैं तलाक के मामले?

श्री सुधीर मेथेकर
अध्यक्ष-हड़पसर साहित्य और संस्कृति मंडल, पुणे

आज भी कई परिवार अपनी 35 वीं, 50 वीं शादी की सालगिरह मनाते हुए पाए जाते हैं। ऐसे में पूरा परिवार इस दिन को खुशी के साथ उत्साह से मना रहा है। निश्चित ही यह एक सुखद घटना है। वहीं दूसरी ओर तलाक होने का अनुपात बहुत बढ़ गया है, यह बहुत ही चिंता की बात है। इसका प्रतिकूल प्रभाव पूरे परिवार, अगर उनकी संतान होती है, तो उनके साथ भी ऐसा होता है, यह नहीं भूलना चाहिए। 
तलाक के आंकड़े हाल ही में एक दैनिक में प्रकाशित हुए हैं, जो देखने पर मन चिंतित होता है। पिछले साल 2021 के आसपास तलाक के 3797 मामले दर्ज किए गए, यह आंकड़े सामने आए हैं, इनमें से 3700 से अधिक दावों का निपटारा किया गया तो आपसी सहमति से अधिक मुकदमे निपटाए गए। दूसरे शब्दों में, इस परिवार के पति-पत्नी अलग हो गए हैं! संक्षेप में तलाकशुदा!
हमें यह सोचने की जरूरत है कि हमारे समाज में तलाक क्यों बढ़ रहे हैं? क्या यह उनके बीच एक दूसरे के साथ सुसंवाद की कमी के कारण है? चूंकि दोनों काम कर रहे हैं, इसलिए अहंकार जाग जाता है और अक्सर बहस होती है? क्या यह भूमिका नाराजगी के कारण निभाई जा रही है? क्या दोनों में से किसी एक की नौकरी चली जाती है तो क्या ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं डिप्रेशन के कारण होती हैं? अत्यधिक लड़कियों के परिवार में माता / पिता ध्यान देते हैं, इससे विवाद होकर क्या तलाक के दावे दायर किए जाते हैं? मुझे लगता है कि इस ओर ऐसी चीजों पर सावधानी से विचार कर समझौता किया जाना चाहिए।
कुछ लव मैरिज होती हैं, शादी से पहले बड़े-बड़े सपने देखे जाते हैं, लेकिन समय के साथ मेरा ही सच तथ्य है, मैं भी कमा रही हूं /कमा रहा हूं, यह अहंकार निर्माण होता है और एक-दूसरे से अलग होने का निर्णय लिया जाता है। दोनों आपसी सहमति से अलग हो जाते हैं या तलाक के फैसले में पाए जाते हैं। लेकिन क्या आपको लगता है कि यहां समस्या हल हो गई है? तो कुछ हद तक आपको कहना होगा नहीं! दोनों की उस संतान का क्या हुआ? तलाक के बाद एक और समस्या भी पैदा होती है उस बच्चे की देखभाल कौन करेगा और कैसे करेगा? इसके लिए न्यायालय की कार्यवाही पुन: प्रारंभ शुरू हो जाती है। इस सभी में बच्चे की मानसिक स्थिति का कौन विचार करेगा? क्या ये परिवार इसके बाद भी सदा सुखी रहते हैं? एक दूसरे से बिछड़ने के बाद मन की उलझन को कैसे रोकेंगे? अगर आप दोबारा शादी करना चाहते हैं, तो ऐसा दोबारा नहीं होगा (!) इसकी गारंटी क्या और कौन देगा? तो इस पर समाधान क्या है? यह सवाल उठता है!
अपने स्वयं के कैरियर के विकास पर ध्यान केंद्रित करने की बढ़ती प्रवृत्ति, अलग-अलग शिफ्ट में काम करने से बना तनाव, उससे जो दूरी पैदा होती है और जो गुस्सा पैदा होता है, उसी से गुस्से में लिए गए फैसले। मैं स्वतंत्र रह सकती/सकता हूँ, मैं स्वतंत्र हूं, मैं अपने निर्णय खुद ले सकती/सकता हूं। इतनी दूर की सोच रखकर लिए गए निर्णय तलाक तक ले जाते हैं यह कहा जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले हमें अपने अहंकार को अलग रखना होगा। हमेशा लगातार एक-दूसरे को समझने की कोशिश करनी होगी। अगर आप अपने संसार को खुशहाल परिवार बनाना चाहते हैं, तो आपको समझौता करना होगा। अपने घर के बड़ों का समय-समय पर मार्गदर्शन लेते रहना चाहिए। लड़की की वैवाहिक जिंदगी में मां-बाप हस्तक्षेप न करें। इसके विपरीत, लड़कियों के माता-पिता को उन्हें समझाना चाहिए कि वे जहां भी गलत हों, वहां समझाकर बताना चाहिए, साथ ही दोनों को भी अपने संसार को खुशहाल परिवार किस तरह बनता है इस पर उनके साथ बातचीत करनी चाहिए, तब ही दोनों का जीवन ही नहीं बल्कि दो परिवारों का मनोमिलन उत्तम होकर तलाक तक दोनों नहीं जाएंगे। जब दोनों काम कर रहे हों तो एक-दूसरे के मन में शक का भूत नहीं आना चाहिए। आजकल सोशल मीडिया भी एक दूसरे के मन में शक पैदा कर रहा है, इसलिए इसका उपयोग आवश्यकतानुसार करना चाहिए। इसके उपयोग में भी पारदर्शिता होनी चाहिए, तभी किसी भी तरह का शक दोनों के बीच कलह  पैदा नहीं करेगा। इसके लिए परिवार के मुखिया को भी इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।   तलाक नहीं होगा, यह कहना साहसी है, हालांकि इसे कम करने के लिए हम सभी को मिलकर काम करना होगा। अंत में, यदि परिवार अप्रभावित रहता है, तो प्रगति सुनिश्चित होती है।

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