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देश, दुनिया और समाज को बचाने के लिए बेटियों को भी लड़कों की तरह प्यार, सम्मान, सुरक्षा मिलनी ही चाहिए : बेटी बचाओ अभियान के जनक डॉ. गणेश राख

‘बेटी बचाओ अभियान’ के जनक डॉ. गणेश राख द्वारा की गई पहल का आज अपने भारत देश के साथ-साथ पूरी दुनिया में स्वागत किया जा रहा है। बेटी बचाओ अभियान की जागरूकता फैलाने के लिए पूरे विश्व से आज अभियान के जनक डॉ.गणेश राख को विशेष रूप से निमंत्रित किया जा रहा है, जो भारतवासी होने पर निश्चित ही हमारे लिए एक अभिमान की बात है। उन्होंने नन्हीं बिटिया के लिए जो आवाज उठाई थी वो आज चरम सीमा पर है, जिस नन्हीं बिटिया को जन्म लेते ही उसका गला घोंटा जाता था या उसे अपनी माँ से दूर कर दिया जाता था, ऐसे पाशवी हृदय को मोम बनाने में अहम भूमिका डॉ. गणेश राख ने निभाई है। नन्हीं बिटिया के जन्म होने पर आज समाज में उसका स्वागत किया जा रहा है, इसके पीछे डॉ. गणेश राख का बहुत ही अमूल्य योगदान रहा है। डॉ. गणेश राख द्वारा संचालित मेडिकेअर हॉस्पिटल में जन्म   लेनेवाली बिटिया रानी का बहुत ही जोश व उत्साह के साथ स्वागत किया जाता है। आज उनके द्वारा बेटी बचाओ अभियान की जो छोटी सी ज्योति जलाई गई थी वो आज चिंगारी बनकर पूरे विश्व में फैल गई है। पूरे विश्व में इस अभियान को जन सैलाब जबर्दस्त समर्थन कर रहा है और बेटी बचाओ का नारा लगा रहा है, इस मुहिम में डॉ. गणेश राख अहम भूमिका निभा रहे हैं।
बेटी बचाओ अभियान को मिल रही अपार सफलता को चरम सीमा पर ले जाने के लिए डॉ. गणेश राख को काफी संघर्ष करना पड़ा है। यहां तक एक समय ऐसा आया था कि उनका अस्पताल भी दाव पर लग गया था। अस्पताल के निर्माण कार्य करने के लिए लिये गये कर्जे को लेकर बैंक ने उन्हें जब्ती की भी नोटिस भेजी थी। इस कठिन समय का उन्होंने बड़ी वीरता के साथ सामना किया। कड़ा संघर्ष किया, परंतु उस कठिन वक्त में भी उनके द्वारा जारी बेटी बचाओ अभियान को पूरी निष्ठा व लगन से जारी रखा। उनके इसी संघर्ष की वजह से आज बेटी बचाओ अभियान बहुत तेज गति से बढ़ रहा है, बड़ी-बड़ी हस्तियों के साथ-साथ आम जनता भी आज डॉ. गणेश राख के कंधे से कंधा मिलाकर बेटी बचाओ अभियान में अपना योगदान दे  रही है। 
बेटी बचाओ अभियान की पहल की नीव रखी गई तब डॉ. गणेश राख ने बेटी के जन्म के बाद डिलीवरी का एक भी पैसा न लेने का फैसला लिया। उससे पहले एक परिस्थिति यह थी कि बेटी का जन्म होने पर पिता को चिंता होती थी कि एक बेटी का जन्म हुआ है? अब हमारा वंश आगे कैसे बढ़ेगा? उसकी परवरिश व शिक्षा कैसे पूरी होगी? उसकी शादी के लिए पैसे कैसे जुटाएंगे? ऐसे एक या अनेक प्रश्न उठते थे? और यह तथ्य कि एक लड़की का जन्म अनजाने में हुआ है, निराशाजनक है? यह भावना मन में आती थी। आज के समय में देखा जाए तो डॉ. गणेश राख के अभियान का असर समाज की व्यवस्था पर इतना गहरा प्रभाव कर चुका है कि डॉक्टरों की तरह अन्य व्यवसायी भी जैसे फार्मासिस्ट, पैथॉलॉजिस्ट लैब, स्कूल, कॉलेज, कोचिंग क्लासेस, पेंटर, एडवोकेट्स, रिक्शा चालक, ज्वेलर्स और अनेक क्षेत्र के व्यवसायी अपने-अपने व्यवसाय में विशेष छूट देकर बेटी बचाओ अभियान में अपना    योगदान दे रहे हैं। इसके अलावा 13,000 सेे अधिक सामाजिक संगठनों, 25 लाख स्वयंसेवकों ने बेटी बचाओ आंदोलन में भाग लिया है। डॉ. राख ने अपने दम पर एक रचनात्मक कार्य शुरू किया है, जिसमें लोग जुड़ते गए और कारवां आगे बढ़ता गया। बेटी बचाओ जन आंदोलन के लिए अपने भारत देश और भारत के बाहर एक हजार से अधिक रैलियां/मार्च निकाले जा चुके हैं। इसमें हजारों लोगों ने हिस्सा  लिया है।
सभी को यह महसूस होना चाहिए कि देश, दुनिया और समाज को बचाने के लिए, बेटी को बचाना है तो उसे भी लड़के की तरह प्यार, सम्मान, सुरक्षा मिलनी ही चाहिए।


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